चतरा सांसद ने टंडवा एनटीपीसी प्रबंधन के अनियमितता पर खोला मोर्चा, वरीय अधिकारियों को संज्ञान लेने के निर्देश
स्थानीय लोगों को धूल और धूंआ का सिर्फ तोहफा देकर बालाओं के साथ मौज-मस्ती कर रहे संबंधित अधिकारी, ट्रांसपोर्टरों पर मेहरबान एनटीपीसी प्रबंधन रास रंग में डूबा
राष्ट्र संवाददाता
चतरा: जिला के टंडवा में संचालित एनटीपीसी ईकाई द्वारा उत्पादित जहरीला राख और चिमनी से उगलता धूंआ आसपास के गांवों को छोड़िए कई किलोमीटर दूर रहने वाले लोगों तक को भी बीमार कर रहा है। जबकि , दूसरी ओर कमीशनखोरी से अर्जित पैसों से 7 दिसंबर को एनटीपीसी का स्थापना दिवस बीत जाने के बाद भी परियोजना नशे में मशगूल जैसा बालाओं के साथ झूम रहा है! मानों वो अपनी जबाब देही से बेफिक्र और पूरी तरह से बेखौफ हो। लोगों के जिंदगियों पर तांडव करने वालों को अपने मज़े के सिवा कुछ भी नजर हीं नहीं आ रहा। आरोप तो ये लगाया जाता रहा है कि परियोजना प्रबंधन कमीशनखोरी में डूबकर ठेकेदारों के पास नतमस्तक है। सवालों का जबाब आखिर कौन देगा कि जहरीला राख ग्रामीणों सड़कों में बड़े पैमाने पर जहां- तहां गिरा दिये जा रहे हैं जबकि निर्धारित मात्रा आपूर्ति स्थल तक नहीं पहुंचने के बावजूद वो कुंभकर्णी नींद में क्यों सोया है? यही वजह है कि केंद्र सरकार को कोसते हुवे लोगों का कहना है कि ऐसे दमनकारी केंद्रीय परियोजना में व्याप्त भ्रष्टाचार पर वो एक बार सर्जिकल स्ट्राइक करने की जुर्रत तो करे। बहरहाल, चतरा सांसद एनटीपीसी प्रबंधन पर अनियमितता को लेकर मुखर रुख अख्तियार तो किया है लेकिन असरदार होता है ये भविष्य के गर्त में है। एनटीपीसी ऐश पौंड दुलाई में अनियमितता, दुलाई के तय मानक नियमों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन, राष्ट्रीय सम्पति जैसे सड़को का नुकसान के साथ- साथ उक्त क्षेत्र में रह रहे ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ने का गंभीर आरोप चतरा सांसद टंडवा एनटीपीसी प्रबंधन पर लगाया है।

