जादूगोड़ा में बालू माफियाओं का आतंक, स्वर्णरेखा और राज दोहा घाट से हो रही धड़ल्ले से तस्करी
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा: जादूगोड़ा और आसपास के इलाकों में बालू माफियाओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। दिन हो या रात, बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टरों पर बालू लादकर खुलेआम तस्करी की जा रही है। ताज़ा मामला उत्तरी इंच पिछड़ा पंचायत के स्वर्णरेखा नदी और राज दोहा घाट का है, जहां से अब तक करीब 50 हाईवा बालू ट्रैक्टरों के माध्यम से उठाया जा चुका है, जबकि लगभग 200 हाईवा बालू अभी भी ट्रैक्टर मालिकों द्वारा सुरक्षित रखा गया बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन और खनन विभाग की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी पैमाने पर तस्करी संभव नहीं है। इस अवैध खनन से सरकार को हर दिन करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है।

कैसे होती है तस्करी
वाहन सीधे नदी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, इसलिए मजदूरों से बालू को नदी किनारे से ऊपर उठवाकर अस्थायी स्टॉक तैयार किया जाता है। इसके बाद रात के अंधेरे में ट्रैक्टरों में भरकर शहर और विभिन्न इलाकों तक पहुंचाया जाता है।
पर्यावरण पर गंभीर खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार अवैध खनन से नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। भू-जल स्तर पर असर पड़ेगा, बाढ़ और मिट्टी कटाव जैसी समस्या और गंभीर रूप से बढ़ सकती है।

कानूनी प्रावधान के बावजूद बेखौफ कारोबार
झारखंड खनिज नियमावली 2017 के तहत बिना लाइसेंस खनन करना प्रतिबंधित है। IPC की धारा 379 और 414 तथा खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1957 की धारा 21 के तहत कठोर सजा का प्रावधान है। इसके बावजूद बालू माफिया कानून की धज्जियां उड़ाते हुए धंधा कर रहे हैं।

ग्रामीणों की नाराजगी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई नहीं की तो स्वर्णरेखा और राज दोहा जैसी नदियां सूखने की कगार पर पहुंच जाएंगी। कुलड़िहा पंचायत से भी अवैध बालू उठाव हो रहा है, जिससे दुड़कू गांव के लोगों ने शिकायत विधायक तक पहुंचाई है। रात को ट्रैक्टरों की आवाज से ग्रामीणों की नींद टूट जाती है, खासकर बुजुर्ग और हृदय रोगी लोग परेशान हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खनन विभाग से मांग की है कि बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टरों को तुरंत जब्त किया जाए, बालू माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई हो और घाटों पर सख्त निगरानी रखी जाए।


