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    Home » आत्मघाती नशीली दवाओं सहित मादक पदार्थ को कैसे रोका जा सकता है?
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    आत्मघाती नशीली दवाओं सहित मादक पदार्थ को कैसे रोका जा सकता है?

    News DeskBy News DeskJuly 11, 2025No Comments3 Mins Read
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    आत्मघाती नशीली दवाओं सहित मादक पदार्थ को कैसे रोका जा सकता है?

    हमारे समाज के विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्र विभिन्न समस्याओं से ग्रस्त है। कुछ युवाओं, महिलाओं और पुरुषों द्वारा पर्यावरण को नष्ट करने के कई आरोप स्थानीय लोगो से सुनने को मिलते रहते है ।

     


    देश में ऐसे कई दफ्तर हैं जहां शराब और नशीली दवाएं खुले आम बेची जा रही हैं। कुछ इलाकों में नामघर के अंदर शराब की बोतलें फेंके जाने के भी आरोप लगते रहते हैं । कई सड़कें ऐसी हैं जहां स्ट्रीट लाइटें नहीं हैं और इसकी सुविधा लेते हुए कुछ नशे में धुत्त युवा मोटरसाइकिलों पर शराब और नशीली दवाएं बेचने का कारोबार करते है । पुलिस प्रशासन की कड़ी तैनात के बावजूद निर्बाध रूप से सुरा नशीली चीजों का ठेका चल रहे है।
    नशीली दवाओं, विदेशी शराब, शराब, जुआ आदि का बोलबाला है जिसने सामाजिक वातावरण को अस्त-व्यस्त कर दिया है। अब हम एक ऐसी पैचीदा मोड़ पर हैं जहाँ आत्मघाती नशा और मादक पदार्थ युवा पीढ़ी के बीच सामाजिक अलगाव के साथ एक सामाजिक व्याधि बन गई हैं। इसलिए प्रत्येक माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक को जागरूक होना होगा ताकि आने वाले दिनों में हम नई पीढ़ी को समाज के एक अच्छे चिंतक के रूप में प्राप्त कर सकें। यदि हम बढ़ती पीढ़ी के बीच आत्मघाती नशीली दवाओं सहित मादक पदार्थ के नुकसान के बारे में सामाजिक जागरूकता नहीं फैला सकते , तो एक जागरूक समाज की अवधारणा किसी बिंदु पर गायब हो जाएगी।

     


    यह बेहद जरूरी है कि नशे को रोकने के लिए पुलिस के साथ-साथ हर माता-पिता अपने बच्चों पर नजर रखें। मादक पदार्थ और नशीले पदार्थों से मुक्त समाज के निर्माण के लिए समाज के हर माता-पिता को ऐसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ ‘विश्व नशा दिवस’ प्रतिवर्ष 26 जून को मनाया जाता है। 7 दिसंबर, 1987 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यह घोषित किया कि 26 जून को नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के विरोधिता प्रदर्शन के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाएगा । हर साल एक विशिष्ट विषय के साथ नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ यह अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। इस साल का विषय है जागरूक समुदाय की पहल । 1992 में महिलाओं के नेतृत्व वाले नशा-विरोधी आंदोलन के परिणामस्वरूप, भारत के प्रमुख राज्य आंध्रप्रदेश में सभी प्रकार की नशीली दवाओं की बिक्री और शराब के सेवन को दंडनीय अपराध माना गया। हालाँकि नशाबंदी में सरकार की उद्देश्य पर अभी भी सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन महिला आंदोलन का राजनीतिक प्रभाव कोई जटिल नहीं है। यह आंदोलन तब शुरू हुआ जब महिला समूहों ने अपने गांवों को शराब से मुक्त कराने की कोशिश की। सभी की यह सामान्य समस्या बन चूकी थी कि शराब ने उनकी जीवन , परिवार को नष्ट कर दिया है। इसीलिए बड़ी संख्या में महिलाएं इस आंदोलन में शामिल हुईं । एक कारण यह भी है कि सरकार द्वारा वित्त पोषित गैर सरकारी संगठनों ने शराबी पतियों के हाथों महिलाओं के दुर्व्यवहार की कहानियों के साथ जागरूकता अभियान चलाया।
    इसलिए जागरूक समुदाय, माता-पिता, पुलिस प्रशासन, सरकार आदि सभी को मिलकर जागरूकता बढ़ाने और आत्मघाती नशीली दवाओं सहित मादक पदार्थ के उपयोग को रोकने के लिए काम करना चाहिए ताकि हमारे समाज के पर्यावरण नष्ट होने से बच जाएं ।

     

    लेखिका : मनीषा शर्मा
    अनुवादक :रितेश शर्मा
    जालूकबारी , गुवाहाटी

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