“शिक्षा मंत्री का बयान दुर्भाग्यपूर्ण, आंदोलन को साजिश बताना छात्रों का अपमान : AIDSO”
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर/रांची :
झारखंड में इंटरमीडिएट नामांकन को लेकर उपजे संकट पर छात्रों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। राज्य के विभिन्न जिलों में चल रहे छात्र आंदोलनों को लेकर शिक्षा मंत्री द्वारा दिए गए बयान—जिसमें उन्होंने इसे विपक्ष की साजिश और दिल्ली जाकर आंदोलन करने की सलाह दी—पर अब तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन (AIDSO) की झारखंड इकाई ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और छात्रों का अपमान करार दिया है।

AIDSO के प्रदेश सचिव सोहन महतो ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह छात्र-छात्राओं की वास्तविक समस्याओं से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि राजभवन के निर्देश पर इस सत्र से सभी कॉलेजों में 11वीं का नामांकन बंद कर दिया गया है और 12वीं के छात्र-छात्राओं को कॉलेज से 5 किमी के दायरे में स्थित सरकारी स्कूलों में शिफ्ट करने का निर्देश दिया गया है। इससे न सिर्फ छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है, बल्कि वे शैक्षणिक असमंजस के शिकार हो रहे हैं।

छात्रों के सामने तीन सवाल – और कोई जवाब नहीं:
1. बीच सत्र में कॉलेज से शिफ्टिंग क्यों?
2. जहां स्कूल ही नहीं हैं, वहां छात्र कहां पढ़ें?
3. नई शिक्षा नीति लागू किसने की – सरकार या विपक्ष?
इन सवालों के जवाब की जगह जब शिक्षा मंत्री इसे विपक्षी दलों की साजिश कहकर टालते हैं, तो छात्रों में आक्रोश स्वाभाविक है। AIDSO ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार छात्रों की संख्या के अनुसार प्लस-टू विद्यालयों का निर्माण, आधारभूत संरचना की व्यवस्था और शिक्षकों की नियुक्ति करने में असफल रही है। इसके चलते हजारों छात्र या तो शिक्षा से वंचित होंगे या फिर निजी स्कूलों की महंगी फीस भरने को मजबूर होंगे। बिष्टुपुर में हुआ था मंत्री का घेराव

8 जुलाई को जमशेदपुर के माइकल जॉन ऑडिटोरियम में जब शिक्षा मंत्री पहुंचे, तो ‘इंटरमीडिएट बचाओ संघर्ष समिति’ और अन्य छात्र संगठनों ने उन्हें घेर लिया। छात्रों के पास ठोस सवाल थे लेकिन मंत्री के पास ठोस जवाब नहीं। AIDSO ने सरकार को चेताया है कि यदि छात्रों की जायज मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन प्रदेश भर में उग्र आंदोलन छेड़ेगा। सचिव सोहन महतो ने कहा कि छात्रों की समस्याओं को विपक्ष की साजिश कहकर टालना, सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
छात्रों की मांगें स्पष्ट हैं – उन्हें शिक्षा चाहिए, राजनीति नहीं।

