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    इजराइल-ईरान युद्ध के 12 दिन और संघर्ष विराम

    News DeskBy News DeskJune 30, 2025No Comments7 Mins Read
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    इजराइल-ईरान युद्ध के 12 दिन और संघर्ष विराम

     

     

    निशिकांत ठाकुर

    इजराइल–ईरान के बीच चले युद्ध में किसी की नहीं चली और ईरान ने सर्वशक्तिशाली विश्व के नेता मानने को बाध्य करने के बाद अपनी शर्त पर युद्ध विराम का आदेश जारी कर दिया है। जिस तरह बेमौसम आसमान में काले –सफेद बादल गरजते हैं,  धरती पर लोगों की आश को जगाकर कभी बिना पानी और कभी झमाझम बारिश करके निकल जाते हैं, ठीक उसी प्रकार विश्व के सर्वाधिक शक्तिशाली राष्ट्र के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कभी कुछ कहते हैं फिर कभी भारी  बम वर्षा कर खुश होते हैं कि हमने कमाल कर दिया ! जब इतने शक्तिशाली व्यक्ति विश्व को दिग्भ्रमित करते हैं  और कहते हैं  वे दो सप्ताह का समय ईरान को देते हैं कि वह संभल जाए, फिर रातों रात पलटकर युद्ध के बीच में  कूदकर ईरान के कई महत्वपूर्ण  ठिकानों को ध्वस्त करने की बात अहले सुबह  करते हैं तो इसका असर उनकी  विश्वसनीयता को प्रभावित करता है।

     

    आज कई देशों में इस बात के लिए प्रदर्शन किया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने युद्ध के नियमों का उल्लंघन किया है, अतः उन्हें त्यागपत्र दे देना चाहिए । लेकिन विश्व में यह लोकोक्ति आज भी प्रचलित है कि प्रेम और युद्ध में सब जायज है । कहा तो यह भी जा  रहा है कि संसार के अब तक के सबसे बड़े युद्ध में भगवान श्री कृष्ण ने यह कहा था कि वह नि:शस्त्र युद्ध का हिस्सा बनेंगे, लेकिन उन्हें भी धर्म रक्षार्थ रथ का पहिया भीष्म  पितामह पर उठाना पड़ा था। वह पौराणिक काल का  युद्ध था , लेकिन जो युद्ध आज लड़ा जा रहा है वह नितांत आधुनिक तकनीक से लड़ा जा रहा है । जहां धर्म की बात कोई नहीं करता केवल जीत के लिए हम कुछ भी करेंगे ।

     

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं ईरान ने शांति की राह नहीं पकड़ी तो और बड़े हमले किए जाएंगे । हमले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि हमारा हमला सफल रहा , ईरान के संयंत्र पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान को अब शांति के रास्ते पर चलना चाहिए।  वह ईरान के साथ युद्ध नहीं बल्कि वार्ता करना चाहते हैं। हमला ईरान पर नहीं बल्कि उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए किया गया है । ईरान ने अगर शांति की राह नहीं पकड़ी तो भविष्य में और ज्यादा बड़े हमले अमेरिका करेगा , ऐसा इसलिए कि ईरान में बहुत सारे स्थान ऐसे हैं जहां हमले किए जा सकते हैं । इधर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी बमबारी पर खुशी जाहिर करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप के प्रति आभार जताया । नेतन्याहू ने यह भी कहा कि उनकी और राष्ट्रपति ट्रंप की नीति समान है , हम शक्ति का उपयोग शांति स्थापित करने के पक्षधर हैं।

     

     

    ईरान ने अमरीकी हमले को संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए अंतराष्ट्रीय कानूनों को तोड़ना  कहा है ।  ईरान के विदेशमंत्री अब्बास आरागची ने कहा है कि परमाणु मसले पर कूटनीति का समय गुजर गया है अब उनका देश आत्मरक्षा के लिए अमेरिका का युद्धोंनामुखी और गैर कानूनी कृत्य जिम्मेदार होगा । ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम जारी रखने का फैसला किया है। रूस के पूर्व राष्ट्रपति एवं रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दमित्री मेदवेदेव ने अपने एक पोस्ट में कहा है कि अमरीकी हमले में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कोई नुकसान नहीं हुआ है । उन्होंने यह भी कहा ईरान को परमाणु हथियारों की आपूर्ति के लिए कई देश तैयार हैं , डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला करके अमेरिकी के लिए नया युद्ध शुरू कर दिया है ।  मेदवेदेव ने  अपने  पोस्ट में लिखा है कि शांति स्थापित करने वाले रूप में डोनाल्ड ट्रंप  इस तरह की सफलता के लिए नोबेल शांति पुरस्कार नहीं जीत पाएंगे । ईरान पर हमला करके अमेरिकी ने क्या हासिल किया ? उनका कहना है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम जारी रखेगा और अमेरिका की जमीनी कार्रवाई में शामिल होने से जो खतरा उत्पन्न हो गया है उसका उत्तर दिया जाएगा । ईरान की राजनीतिक व्यवस्था सुरक्षित है और बहुत संभावना है कि यह और मजबूत हो ।

     

    भारत ने बौद्ध और महात्मा गांधी के सिद्धांतों को अपनाते हुए तत्काल तनाव कम करने की अपील की है । भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि कूटनीति और संवाद के जरिए ही टकराव टाला जा सकता है । प्रधानमंत्री ने अपनी भारतीय नीति का पालन करते हुए शांति की स्थापना को जरूरी बताया । प्रधानमंत्री और ईरान के राष्ट्रपति के बीच पिछले रविवार बातचीत हुई ।  इस बातचीत में  प्रधानमंत्री की ओर से गहरी चिंता जताई गई और उन्होंने तनाव को कूटनीति के माध्यम से तत्काल कम करने की अपनी अपील दोहराई । ईरान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच यह बातचीत फोन पर हुई  ।  यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मीडिया इंटरनेट पर भी एक पोस्ट में कहा कि हमने मौजूदा स्थिति पर विस्तार  से चर्चा की और तनाव बढ़ने पर गहरी चिंता जताई। ज्ञात हो कि भारत — इजराइल और ईरान  के मध्य बहुत ही पुराना , लंबा और मधुर संबंध रहा है और उनके टकराव में यदि युद्ध विराम नहीं हुआ तो तीसरे विश्व युद्ध के खतरे को नकारा नहीं जा सकता । चूंकि भारत स्वतंत्रता  के बाद 1962 और 1971 का युद्ध ही लड़ा है और वह सदैव से शांति का ही पक्षधर रहा है , लेकिन जब इजराइल और ईरान के मध्य अमेरिका कूद  पड़ा है तो भारत निश्चित रूप से अपनी शांति और कूटनीति के मार्ग को ही अपनाएगा । यह ही उचित है और जिन्होंने कभी भी शांति के मार्ग को  नहीं अपनाया उनका अंत बहुत ही बुरा हुआ है ।

     

     

    अमेरिका , इजराइल और ईरान तीनों का यह उपरोक्त कथन है, लेकिन सोशल मीडिया को देखने और सुनने के बाद मन  विचलित हो जाता है। इस युद्ध का  छिद्रान्वेषण तो वही  रिपोर्टर कर सकते हैं जो युद्धक पत्रकारिता का प्रशिक्षण लेकर युद्ध में स्वतंत्र रूप से निष्पक्ष होकर पत्रकारिता करने गए हैं । लेकिन, ऐसे भारतीय पत्रकार  तो गिने चुने ही होंगे, वे सिर्फ हालात पर नजर रखकर केवल कयास ही लगा सकते हैं। अगर सोशल मीडिया पर जाएं तो एक से एक दिग्गज भी भारत में बैठकर ईरान और इजराइल के बीच जारी घमासान का विश्लेषण करते है ।  कुछ मीडिया तो एक तरफा ही रिपोर्टिंग करके अपने को निहाल  करते रहते हैं और समाज दिग्भ्रमित होता रहता है । आज के कुछ निष्पक्ष पत्रकार  ही सच सामने लाते रहते हैं , उनके अनुसार यदि समीक्षा करें तो निःसंदेह ईरान ने इजराइल को पछाड़ रखा है और वह बार बार अमेरिका सहित इजराइल का साथ देने वालों को आगाह कर रहा है कि जो कोई भी इजराइल की तरफ से लड़ने जाएगा उसे वह छोड़ेगा नहीं । यहां तक कि ईरान ने अमेरिका को चेताते हुए कहा है कि इसका परिणाम तो अमेरिका को भी भोगना ही पड़ेगा । जो भी हो भारतीय शांति की राह पर चल कर ही वह आजतक अपने लक्ष्य को पाने में सफल होता रहा है ।

     

     

    वह महात्मा गांधी और बुद्ध के मार्ग को आगे भी अपनाता है तो  भारी जनसंख्या वाला यह  देश भी  शांति से जीवन यापन कर सकेगा तथा  भारतीयों का भविष्य उज्वल होता रहेगा । ऐसा इसलिए कि युद्ध की जिस  स्थिति को दिखाया जा रहा है वह निःसंदेह भयावह है , डराने और डरने वाला  भी । भारत इतना सक्षम आज नहीं हो सका है कि वह इस तरह के युद्ध की विभीषिका से कभी उबर पाएगा । इसलिए हमारे पूर्व  में दिए गए शांति का मार्ग ही एक मात्र उपाय है, लेकिन उपाय भी कबतक काम आएगा । यदि विश्व युद्ध को संभावना बढ़ी तो उसकी चपेट में भारत भी आ जाएगा। इसलिए भारत सदैव यही चाहेगा कि किसी प्रकार हो, शांति विश्व में स्थापित हो और भाईचारा का  वातावरण सामान्य हो , इस सारी स्थिति का हमारे ऊपर बैठे नेताओं को अच्छी तरह एहसास है जो देशहित के लिए हितकारी ही है ।

     

    (लेखक वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं)

     

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