क्या पैसा कमाना ही हमारे जीवन का एकमात्र लक्ष्य हैं ?
जीवन में पैसा ही सब कुछ नहीं है। लेकिन हा, आज के भौतिकवादी युग में यह लोगों के जीवन का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। लोगों की बुनियादी जरूरतों के अलावा, पैसा जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मुख्य प्रेरक शक्ति है। जीवन का लक्ष्य रोजी-रोटी कमाना और बच्चा पैदा करके जीवन यापन करना नहीं हो सकता। अन्य जानवर भी यही करते हैं। मनुष्य के रूप में, हमें इससे थोड़ा अलग और कुछ ज्यादा करने की आवश्यकता है।

इसीलिए कहा जाता है पैसे की ताकत की सीमाएं हैं। पैसा हमारी प्रतिभा को विकसित करने में अवश्य मदद कर सकता है लेकिन साहस और बुद्धि को विकसित नहीं कर सकता। हम सोचते हैं कि अगर हमारे पास बहुत सारा पैसा होगा तो सब कुछ सही होगा, सब कुछ अच्छा चलेगा और हमारा परिवार भी खुश रहेगा, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता है। अधिकांश लोगों का मानना है कि पैसा ही सब कुछ है, यह हमारी सभी समस्याओं का समाधान है । हम जो चाहें खरीद सकते हैं, यह हमें अपना जीवन जीने में मदद करता है और हमें खुशी तथा शांति से भर देता है।

लेकिन वास्तव में क्या ऐसा होता है? बड़े बड़े अमीर लोग जीवन में बहुत दुखी हैं, अपने जीवन से असंतुष्ट हैं। सब कुछ होते हुए वह अकेला हैं। उसके जीवन में ऐसा कोई नहीं , जो उसे निस्वार्थ प्यार करता हो। यहां तक कि वह खुद भी पैसा कमाने में इतना व्यस्त हो जाता हैं कि स्वयं को , परिवार को भी समय नहीं दे पाते , उनके साथ समय नहीं बिता पाते । इसलिए अपने जीवन के अंतिम समय में उन्हे खुद से सवाल पूछना पड़ता है कि “आखिर पैसा ही सबकुछ हैं क्या ?” तो इससे पता चलता है कि सुखी, निरोगी और सार्थक जीवन जीने के लिए आपको बहुत अधिक धन की आवश्यकता नहीं है। एक प्रतिष्ठित अमेरिकी व्यवसायी तथा प्रख्यात लेखक गैरी वेनार्चुक ने लिखा, ” अगर आप पैसे के पीछे भागेंगे, तो एक दिन आप उस दौड़ में खुद को जरूर खो देंगे, और अगर आपको पैसा मिल भी जाए तब भी आप खुश नहीं होंगे।”

इसलिए याद रखें, पैसा कमाना हमारे जीवन का एकमात्र लक्ष्य नहीं हो सकता। पैसा हमारे लक्ष्यों को प्राप्त करने का एक साधन मात्र है।

मूल लेखिका : मनीषा शर्मा
अनुवादक :रितेश शर्मा
पता : जालूकबारी , गुवाहाटी

