महत्वपूर्ण किले को भेदने की कश्माकश सवर्ण भूमिहार पर झारखंड मुक्ति मोर्चा लगाएगी दांव –
देवानंद सिंह
लोकसभा चुनावों के सरगर्मी पूरे देश में उफान पर है और चुनावी उफान में झारखंड सरीखे राज्य कैसे अलग रह सकता है। 2024 के जनादेश में चुनाव पूर्व कई उथल-पुथल के संदेश मिल रहे हैं झारखंड की सियासत की बात हो और और झारखंड की सियासत में प्रयोग ना हो ऐसा संभव हो नहीं सकता खासकर झारखंड के चुनाव में जमशेदपुर लोकसभा सीट की बात न हो, ऐसा बिल्कुल भी नहीं हो सकता है, क्योंकि यह राज्य की महत्वपूर्ण सीट है, इसीलिए राजग गठबंधन और महागठबंधन दोनों ही इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि आखिर इस महत्वपूर्ण किले को कैसे भेदा जा सकता है, इसको लेकर बीजेपी और महागठबंधन में शामिल पार्टियों में जबरदस्त कश्माकश तो है ही इस बार झामुमो जमशेदपुर सीट पर प्रयोग भी कर सकती है
भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड में उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है | कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा, राजग भी जिताऊ उम्मीदवारों पर मंथन कर रही है। जिस तरह झारखंड मुक्ति मोर्चा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अनुपस्थिति में प्रत्याशी की घोषणा की है, उससे यह साफ हो गया है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पश्चिमी सिंहभूम सीट खुद से ही भाजपा की झोली में डाल दिया है भाजपा उम्मीदवार जीता कोड़ा के सामने जोवा माझी कहीं से भी दमदार प्रत्याशी नहीं मानी जा रही है इस सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा अगर किसी हो उम्मीदवार को प्रत्याशी बनती तो इस बार स्थिति कुछ और होती
देश में चुनाव हो और जातीयता की बात ना निकले यह संभव नहीं है यूं तो सार्वजनिक रूप से सभी राजनीतिक दल जातीयता के बात करने से कतराते हैं, लेकिन भारतीय लोकतंत्र के चुनावी सरगर्मी के बीच जातीयता की बात ना करना चुनावी महापर्व में बेईमानी होगी।
जमशेदपुर सीट पर भाजपा ने दो बार सांसद रहे विद्युत वरण महतो को तीसरी बार भी उम्मीदवार बनाया है, जबकि गठबंधन ने अब तक इस सीट पर अपने उम्मीदवार का फैसला नहीं किया है। भाजपा को ब्राह्मण, भूमिहार, राजपूत, कायस्थ का वोट मिलते आया है, जबकि सवर्ण का वोट जमशेदपुर लोकसभा सीट के लिए लगभग चार लाख के आसपास है और झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ कांग्रेस भी इस बात पर मंथन कर रही है कि जमशेदपुर लोकसभा सीट से किसी सवर्ण खासकर के भूमिहार जाति को टिकट दिया जाए। झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के अंदरखाने में मंथन इस बात पर हो रहा है कि बहरागोड़ा, घाटशिला, पोटका, जुगसलाई, जमशेदपुर पश्चिम से गठबंधन प्रत्याशी विधायक है और किसी भूमिहार सवर्ण जाति को टिकट मिलता है तो शहरी क्षेत्र में वोटों का बंटवारा निश्चित है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जेल जाने से जमशेदपुर लोकसभा सीट ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के आदिवासी मतदाता नाराज दिख रहे हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा यह सोच रही है कि गठबंधन के तहत हमारे सभी विधायक झारखंड मुक्ति मोर्चा प्रत्याशी को ग्रामीण क्षेत्र से जब लीड दिलाकर शहरी क्षेत्र में प्रवेश करेंगे तो यहां से भूमिहार या सवर्ण का प्रत्याशी अगर झारखंड मुक्ति मोर्चा को देते हैं तो शहरी वोटों का बड़े पैमाने पर बंटवारा होगा और इसका सीधा-सीधा फायदा गठबंधन प्रत्याशी को होगा। झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस इसी बात पर मंथन कर रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के आला नेता इस पर विचार कर रहे हैं, हालांकि चर्चा यह भी बाजार में हो रही थी कि कुणाल सारंगी कि घर वापसी हो रही है और चुनाव वही लड़ेंगे, लेकिन यह अफवाह ही साबित हुआ। अब जब झामुमो ने पश्चिम सिंहभूम सीट पर प्रत्याशी की घोषणा कर दी है और झारखंड मुक्ति मोर्चा का चारों तरफ किरकिरी होने लगी है, तब जमशेदपुर सीट पर झामुमो गंभीर दिख रही है और हो सकता है कि किसी सवर्ण जाति को अपना प्रत्याशी बनाएं। उस स्थिति में भाजपा को कड़ी चुनौती मिल सकती है भाजपा भी यह जानती है कि इस बार के चुनाव में उसे भीतर घाट का सामना करना पड़ेगा वैसे लोगों की लिस्ट भी संगठन ने तैयार कर रखी है जो भीतर घात करने को अभी से तैयार हैं
बहरहाल प्रत्याशी घोषणा के बाद ही जमशेदपुर का चुनावी माहौल गर्म होगा लेकिन इतना तय है कि
सवर्ण भूमिहार को झामुमो प्रत्याशी बनती है तो जमशेदपुर सीट पर मुकाबला कड़ा होगा

