साहित्य और संस्कृति के संवर्द्धन में ही राष्ट्र की समृद्धि है
त्रिवेणी कला केंद्र में फाउंडेशन ऑफ कृष्ण कला केंद्र द्वारा आयोजित आज का कार्यक्रम गुरु शिष्य परंपरा का एक बेहतरीन उदाहरण रहा जिसमें कृष्ण कला केंद्र की अध्यक्षा श्रीमती अनु सिन्हा जी ने अपने आदरणीय गुरु राजेंद्र गंगानी जी के निर्देशन में साहित्य कला संस्कृति के संवर्धन और संरक्षण हेतु एक संतति संगोष्ठी का आयोजन किया । स्वागत भाषण देते हुए श्रीमती अनु सिन्हा जी ने कहा कि इस संगोष्ठी के आयोजन के पीछे उनका मूल उद्देश्य शास्त्रीय नृत्य और संगीत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना और साथ ही साथ साहित्य को जन-जन तक पहुंचाना है। इस भगीरथ प्रयास की शुरुआत उन्होंने पिछले वर्ष से ही शुरू कर दी थी जिसमें उन्होंने नोएडा संस्कृति महोत्सव में राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों के साथ-साथ विद्यालय के बच्चों को भी मंच तक लाकर उनके उत्साह को बढ़ाया था । अब यह ऐसे प्रयास को अपनी जन्म भूमि झारखंड में भी समृद्ध करना चाह रही हैं और भविष्य में ऐसे ही कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर देश के विभिन्न भागों में करने की उनकी योजना है। इस पुनीत अवसर पर समाज के विशिष्ट जनों ने इनका सहयोग दिया है । आज के इस कार्यक्रम में अतिथि के रूप में हमारे बीच उपस्थित हुए श्री राम मोहन मिश्रा जी , श्री जीतराम भट्ट जी और श्री गजेन्द्र सोलंकी जी । कार्यक्रम का उद्धाटन हंसराज कॉलेज की प्राचार्या डाॅ रमा के करकमलों द्वारा किया गया । आज का यह कार्यक्रम दो सत्रों में सम्पन्न किया गया । प्रथम सत्र में
हिंदी दिवस के उपलक्ष में
साहित्य और संस्कृति जैसे विषयों पर चर्चा आयोजित की गई । इस सत्र के अन्तर्गत गाँधी जी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में गाँधी और भारत , कला संस्कृति और गाँधी, भाषा साहित्य और गाँधी जैसे गूढ़ विषयों पर विभिन्न साहित्यकारों विचारकों प्रोफेसरों ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किया । संगोष्ठी सत्र में मौजूद वक्ता थे सुश्री नलिनी कमलिनी जी , श्रीमती कविता शंकर, श्री ओमप्रकाश सिंह, श्री राहुल कुमार सिंह, श्री महेन्द्र प्रजापति इत्यादि ।
द्वितीय सत्र में नृत्य संगीत से संबंधित के कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गयी ।कला एवम साहित्य से जुड़े लोगों को सम्मानित किया गया। मंच संचालन कर रही झारखंड से आई शिक्षाविद डाॅ अनीता शर्मा एवं डॉ कल्याणी कबीर को साहित्य के क्षेत्र में उनकी विशेष उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।किया। नवंबर में होने वाले झारखंड महोत्सव के लिए भी विभिन्न साहित्यकारों एवमं कलाकारों को आमंत्रित किया गया।
