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    Home » सियासी चक्रव्यूह में फंसकर ‘विलेन’ साबित हुए तेजस्वी
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    सियासी चक्रव्यूह में फंसकर ‘विलेन’ साबित हुए तेजस्वी

    News DeskBy News DeskMarch 5, 2023No Comments3 Mins Read
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    पटना: कहते हैं कि सियासत में अचानक साथ रहने वाले नेता का राजनीतिक कद बढ़ने लगे तो सामने वाला सावधान हो जाता है। बिहार में हाल के दिनों में डेप्यूटी सीएम और लालू के छोटे बेटे तेजस्वी यादव राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि बनाने निकले थे। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की। हेमंत सोरेन से मिले। उससे पहले पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव से भी मिले थे। राजनीतिक गलियारों में चर्चा चलने लगी कि तेजस्वी यादव अपनी अलग छवि बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ‘बैटिंग’ कर रहे हैं। किसी ने नीतीश कुमार को तेजस्वी के नये-नये पॉलिटिकल मूव की जानकारी दे दी।

     

     

    सियासी जानकार मानते हैं कि नीतीश कुमार के कान खड़े हो गए। हालांकि, नीतीश कुमार ने इसका एहसास नहीं होने दिया। तब तक सामने तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों की पिटाई का मामला सामने आ गये। नीतीश कुमार ने इस मामले पर ऐसी सियासी बिसात बिछाई की तेजस्वी उसमें उलझकर रह गये।

    नीतीश एक्शन में आ गए

     

    तमिलनाडु से जैसे ही मजदूरों की पिटाई का मसला सामने आया। नीतीश संभलकर खेलने लगे। उन्हें मालूम है कि ये मुद्दा जनभावना से जुड़ा हुआ है। वे बीजेपी से भी सख्त नहीं हुए। मामले को लेकर ट्वीट करने के बाद संभलकर बोलते रहे। जानकार मानते हैं कि इस बीच नीतीश कुमार तेजस्वी यादव को बीजेपी को जवाब देने के लिए फ्रंट फुट पर कर दिया। खुद पीछे हट गए। तेजस्वी राष्ट्रीय स्तर की छवि बनाने के चक्कर में तमिलनाडु के पक्ष में बोलने लगे। तेजस्वी यादव ने मजदूरों की पिटाई का मामला अफवाह बता दिया। उसके बाद वायरल हुए वीडियो को पुराना बताते हुए बीजेपी पर हमलावर हो गये। इस बीच नीतीश कुमार ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तमिलनाडु में अधिकारियों को रवाना कर दिया। बिहार के वरिष्ठ अधिकारियों के एक दल ने बकायदा चेन्नई की जिलाधिकारी एस. अमृता ज्योति के बैठक की। चार सदस्यीय दल में डी बालमुरुगन, ग्रामीण विकास सचिव, पी कन्नन, आईजीपी (सीआईडी), श्री आलोक, विशेष सचिव, श्रम विभाग और संतोष कुमार, पुलिस अधीक्षक शामिल थे।

     

     

    तेजस्वी बीजेपी को झूठा ठहराने में रह गये
    तेजस्वी यादव अति उत्साह में आ गये। सियासी जानकारों के मुताबिक नीतीश जो चाहते थे वो हो चुका था। पूरे बिहार को ये संदेश चला गया कि तेजस्वी यादव बिहार के मजदूरों की चिंता नहीं करते हैं। तेजस्वी ने विधानसभा में विपक्षी सदस्यों की ओर इशारा करते हुए कहा कि इन लोगों को स्पष्ट रूप से तथ्यों में कोई दिलचस्पी नहीं है। अफवाह फैलाना इनकी आदत है। कुछ दिन पहले ही उन्होंने शहीद सेना के जवान के पिता की गिरफ्तारी को लेकर सदन की कार्यवाही बाधित की थी। इस बीच नीतीश कुमार वहां के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के संपर्क में रहे। यहां तक कि शनिवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सभी मजदूर सुरक्षित हैं।

     

    मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि उन्होंने नीतीश कुमार से फोन पर बात की और उन्हें आश्वासन दिया कि श्रमिकों को कोई नुकसान नहीं होने दिया जायेगा। स्टालिन ने कुमार को बताया कि सभी श्रमिक हमारे श्रमिक हैं जो तमिलनाडु के विकास में मदद करते हैं और मैंने उन्हें आश्वासन दिया है कि श्रमिकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचने दिया जायेगा।

    साभार

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