85 वर्षीय विस्थापित विंदू ग्वालीन अब भी सहायता से वंचित 30 साल बाद भी सुविधा नहीं, इलाज के लिए पैसे नहीं; अधिकारी बेपरवाह,
राष्ट्र संवाद संवाददाता
चांडिल : ईचागढ़ प्रखंड के दालग्राम गांव की करीब 85 वर्षीया विंदू ग्वालीन आज भी विस्थापित सहायता से वंचित हैं। सरकारी दफ्तरों के वर्षों से चक्कर काटने के बावजूद अब तक उन्हें कोई लाभ नहीं मिल पाया है। बढ़ती उम्र और गंभीर बीमारी के कारण हालात यह हैं कि इलाज तक के लिए पैसे नहीं हैं। आर्थिक स्थिति बदहाल है और परिवार पूरी तरह परेशान।
विंदू ग्वालीन के पुत्र भूवन गोप ने बताया कि मां का कार्ड बन जाने पर ही सहायता राशि मिलेगी, लेकिन कई बार आदित्यपुर विकास भवन जाने के बाद भी अधिकारी उनकी ओर ध्यान नहीं देते। भूवन के अनुसार, वर्ष 2019–20 में आवेदन देने के बावजूद अब तक किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई है।
मामले की जानकारी मिलने के बाद विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो रविवार को दालग्राम पहुंचे और विंदू ग्वालीन से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों से एक 85 वर्षीय महिला को लाभ से वंचित रखना प्रशासनिक असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है.
महतो ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर अधिकारी इसी तरह इन्हें दौड़ाते रहे और इनके साथ कोई अनहोनी हुई, तो मैं उनकी लाश लेकर अधिकारियों के दफ्तर जाऊँगा। जरूरत पड़ी तो अदालत का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।” उन्होंने कहा कि यह पूरा प्रकरण तंत्र की कमजोरी और संवेदनहीनता को उजागर करता है। मंच की ओर से परिवार को न्याय दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।

