चाईबासा में 10 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
DGP अनुराग गुप्ता की रणनीति से नक्सलियों को मिला भरोसा
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– पुनर्वास और अवसरों के जरिए स्थायी शांति की ओर कदम
देवानंद सिंह
चाईबासा, 25 सितंबर : झारखंड में नक्सल उन्मूलन अभियान को नई मजबूती तब मिली, जब गुरुवार को चाईबासा में भाकपा माओवादी संगठन के 10 सक्रिय नक्सलियों ने पुलिस लाइन में हथियार डाल दिए। आत्मसमर्पण करने वालों में चार महिलाएं भी शामिल हैं। यह घटना झारखंड सरकार की उग्रवादी आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
आत्मसमर्पण समारोह में DGP अनुराग गुप्ता ने नक्सलियों का स्वागत करते हुए कहा कि जो लोग हिंसा की राह छोड़कर समाज में लौटना चाहते हैं, उन्हें सरकार सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देगी। उन्होंने बताया कि पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर दिए जाएंगे, ताकि वे एक नई जिंदगी शुरू कर सकें। साथ ही उन्होंने साफ किया कि जो नक्सली अब भी हथियारबंद गतिविधियों में शामिल रहेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि चाईबासा का यह आत्मसमर्पण केवल पुलिसिंग की जीत नहीं, बल्कि विश्वास और संवाद पर आधारित रणनीति का परिणाम है। DGP अनुराग गुप्ता के नेतृत्व में पुलिसिंग का फोकस केवल सख्त कार्रवाई पर नहीं, बल्कि पुनर्वास और समाज में पुनर्स्थापना पर भी रहा है। इससे नक्सलियों को भरोसा मिला कि वे सुरक्षित माहौल में मुख्यधारा का हिस्सा बन सकते हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह घटना क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास की दिशा में बड़ा कदम है। सरकार अब नक्सल प्रभावित इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी अवसरों पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि युवाओं को हिंसा की बजाय सकारात्मक रास्ता मिल सके।
चाईबासा का यह आत्मसमर्पण इस संदेश के साथ सामने आया है कि हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटना न केवल संभव है, बल्कि इससे जीवन और समाज दोनों को नई दिशा मिल सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम आने वाले समय में अन्य नक्सलियों के लिए भी प्रेरणा बनेगा और झारखंड स्थायी शांति व विकास की ओर तेजी से बढ़ेगा।
बीजेपी शासन में लगातार कमजोर हो रहा नक्सलवाद
केंद्र की बीजेपी सरकार का दावा है कि उसकी सुरक्षा और विकास आधारित रणनीति से देश में नक्सलवाद लगातार कमजोर हो रहा है। सरकार ने सख्त सुरक्षा अभियान चलाने के साथ-साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दी है। यही वजह है कि नक्सली हिंसा छोड़कर मुख्यधारा की ओर लौट रहे हैं। चाईबासा में हुआ हालिया आत्मसमर्पण इसी व्यापक नीति का परिणाम है, जो दिखाता है कि केंद्र की योजनाओं और राज्य की पहल ने मिलकर नक्सल समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं।

