राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े युवा नेता सतीश सिंह की यादें हुई ताजा
राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े लोगों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। लेकिन कुछ ऐसे लोग हैं जिनकी चर्चा वाकई में जरूरी महसूस की जाती है उन्हीं में से एक शख्स है सतीश सिंह राम। राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े सतीश सिंह राम मंदिर के शिलान्यास के मौके पर भावुक नजर आए, दरअसल उनके संघर्ष की लंबी दास्तां है ।राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ने के बाद महज 16 वर्ष की आयु में उन्हें जेल जाना पड़ा ,जेल जाने से उनका उत्साह घटने के बजाय काफी बढ़ गया वे राम जन्मभूमि आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने लगे ।शहर के युवाओं में जागरूकता फैलाई उनमें जोश भरा और फैसला किया कि जब तक राम मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो जाती तब तक वे शांत बैठने वाले नहीं हैं। युवा अवस्था में युवाओं का नेतृत्व करते हुए वह हमेशा इस आंदोलन को धार देते रहे ,शीला पूजन हो या कारसेवा सभी कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले सतीश सिंह ने कभी हार नहीं मानी राम जन्मभूमि आंदोलन में वह 1992 के दिसंबर में अयोध्या जाने की तैयारी कर ही रहे थे कि उसी वक्त प्रशासन द्वारा मिली रिपोर्ट के आधार पर उन्हें उनके घर से ही गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें जेल भेज दिया गया लेकिन जेल की सलाखें उन्हें कहां रोक सकती थी। जेल से निकलने के बाद वह उसी तैयारी और जोश के साथ अपने आंदोलनकारी साथियों के जज्बातों के साथ आगे बढ़े आज भी जब बाबरी मस्जिद गिराने की बात होती है तो वह रोमांचित हो जाते हैं, उन्हीं के समकालीन समय में बजरंग दल के अध्यक्ष रमेश कुमार के नेतृत्व में राम नारायण शर्मा ,जोगी पांडे ,हरेंद्र पांडेय जैसे हिंदूवादी नेता भी राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़कर अयोध्या गए ।उस जमाने में खड़ागाझाड़ चौक पर शीला पूजन हो या कार सेवा की तैयारियां सभी कार्यों में सतीश सिंह ने एक जिम्मेदारी भरी भूमिका निभाई ।आज शिलान्यास के पवित्र मौके पर सतीश सिंह ने नमो संदेश के सभी कार्यकर्ताओं एवं टीम के साथ राम भक्तों का आभार जताया, आज वह अपने आंदोलन की सार्थकता पर फुले नहीं समाते सतीश सिंह ने उन भड़कते दिलों में राम जन्मभूमि के आंदोलन के प्रति जहां उत्साह भरा वही बुझे हुए दिलों में दीप प्रज्वलित कर शान के साथ आगे बढ़ने के लिए भावनात्मक उत्तेजना भरी। आज के इस स्वर्णिम मौके पर उन्होंने विश्व के राम भक्तों को नमन किया और शुभकामनाएं भी दी!

