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    Home » भारत-नेपाल सीमा की निगरानी के लिए सैनिकों की मदद के लिए ग्रामीणों ने चंदा कर बनवा दिया पुल
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    भारत-नेपाल सीमा की निगरानी के लिए सैनिकों की मदद के लिए ग्रामीणों ने चंदा कर बनवा दिया पुल

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 24, 2020No Comments4 Mins Read
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    पीलीभीत (उत्तरप्रदेश). पड़ोसी देश नेपाल की सीमा को लेकर उपजे विवाद के बाद सुतिया नदी में पानी के चलते सीमा की निगरानी संभव नहीं थी ऐसे में एसएसबी कमांडेंट के आग्रह पर ग्रामीणों ने चंदा एकत्र कर नदी पर बांस के पुल का निर्माण करा दिया जिससे अब सरहद की निगरानी हो रही है. ग्रामीणों के इस प्रयास की काफी सराहना हो रही है, वहीं जनप्रतिनिधियों को भी इससे सबक लेना चाहिए.

    पीलीभीत में इंडो- नेपाल बार्डर पर नोमैंस लैंड पर अधिकतर नेपालियों या भारतीय लोगों ने अवैध कब्जे कर रखे हैं और उन पर खेती की जा रही है. कई स्थानों पर पक्के निर्माण भी किए गए हैं. हालांकि इसको लेकर आये दिन दोनों देशों के अधिकारियों की बैठकें होती रही हैं, लेकिन आज तक सीमा से अतिक्रमण नहीं हट सका. बीती 5 जुलाई 2020 को नेपाल द्वारा सीमा के पिलर नंबर 38 और 39 के बीच कराये जा रहे सड़क निर्माण पीलीभीत के अधिकारियों द्वारा रुकवाया गया था, नोमेंस लेण्ड पर नेपाल द्वारा सड़क निर्माण की सूचना पर मौके पर तत्कालीन जिला अधिकारी वैभव श्रीवास्तव अधिकारियों के साथ नाव से नाला पार करके पहुँचे, विवाद से दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण स्थिति हो गई थी. हालांकि बाद में सीमांकन होने तक निर्माण कार्य को रोक दिया गया था, लेकिन आज भी लगातर सड़क निर्माण की सामग्री ट्रकों से लाई जा रही है, लेकिन नोमेंस लेण्ड तक भारतीय सेना नही जा पा रही थी, सुतिया नदी में पानी अधिक होने के कारण सीमा की निगरानी संभव नहीं हो पा रही थी ऐसे में एसएसबी 49 वीं वाहिनी के कमांडेंट अजय कुमार ने ग्राम पंचायत बमनपुर भगीरथ के प्रधान गुरुदेव सिंह से सुतिया नदी पर पुल निर्माण कराने का आग्रह किया. चूंकि सीमा पर ग्राम निधि से पुल का निर्माण नहीं हो सकता, ऐसे में गुरदेव सिंह ने ग्रामीणों से चंदा एकत्र कर पुल का निर्माण कराया जो 5 दिन में पूर्ण हो गया अब एसएसबी के जवान और क्षेत्रीय नागरिक आसानी से सीमा की निगरानी कर रहे हैं, ताकि नेपाल सरकार सीमा पर पुन: सड़क का निर्माण न शुरू कर दे और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है.

    ग्रामीणों का यह है कहना

    ग्रामीण मुक्तेश्वर सिंह व मानसिंह ने कहा कि ग्रामीणों ने देश की सुरक्षा में लगे जवानों को सीमा तक पहुचाने के लिये पुल का निर्माण कर अपनी देश भक्ति का परिचय दिया वहीं दोस्त कहे जाने वाले पड़ोसी देश नेपाल चीन की मदद से नोमेंस लेण्ड में सड़क का निर्माण करा रहा है, चीन का नाम इसलिये लिया जा रहा है, क्योंकि अभी तक नेपाल, भारत के मैत्री सम्बन्ध के चलते सीमा खुली थी और चौकसी कम थी, और सड़क निर्माण कराने की हैसियत भी नहीं थी, लेकिन चीन भारत को हर तरफ से घेर कर डराना चाहता है, इसलिए नेपाल अपनी गोद मे बिठा लिया. 5 जुलाई को हुए विवाद के बाद सड़क का निर्माण तो रोक दिया गया लेकिन सड़क निर्माण में लगने वाली सामग्री लगातर नोमेंस लेण्ड पर एकत्र की जा रही है, चीन नेपाल के सम्बंध के बाद और सीमा पर सड़क का निर्माण होने से सीमा पर अब 24 घण्टे पेट्रोलिंग की जरूरत थी, जो कि इस पुल के बिना नही हो सकती थी, इसलिये गांव वालों के द्वारा वैकल्पिक पुल के निर्माण कराया गया, अब इस पुल से गुजर कर चीन की मदद से की जाने वाली नेपाल की करतूतों पर नजऱ रखी जा सके, पुल निर्माण के बाद से एसएसबी के अधिकारी से लेकर जवान तक गांव वालों की देश भक्ति कि तारीफ कर रहे हैं

    ग्रामीणों से जनप्रतिनिधियों को भी सबक लेना चाहिए: कमांडेंट

    हमारी सेना किसी विदेशी सेना से 19-20 हो सकती है, लेकिन हमारा हौसला कही सब से ज्यादा है, क्योंकी भारत के गांव में बसने वाले लोगों ने भारत के दुश्मन को दिखा दिया की बो अपनी सेना और अपने देश के लिये क्या क्या कर सकते हैं, आज इस गांव की हर तरफ तारीफ हो रही है, वही ग्रामीणों के प्रयास से जनप्रतिनिधियों को सबक भी लेना चाहिए. भारत सरकार और प्रदेश सरकार को जल्दी पुख्ता इंतजाम करना होगा वरना चीन नेपाल से जुड़ी सीमा पर भारत को नुकसान पहुंचाने के लिये इन सड़कों का इस्तेमाल कर सकता है,,जब सब नेपाल द्वारा नेपाल का नया नक्सा लाया गया है तव से भारत और नेपाल की रिस्ते ठीक नही है वही चीन इसका फायदा उठाना चाहता है.

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