*रूमतुलै की ओर से आयोजन, जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा होंगे मुख्य अतिथि*
राष्ट्र संवाद संवाददाता, सरायकेला
वारंगक्षिति लिपि के जनक एवं हो समाज के महान भाषा चिंतक ओत गुरु कोल लाको बोदरा की 107वीं जयंती 27 अगस्त को उनके पैतृक गांव पासेया में मनाई जाएगी। अंङाई पुनेई के अवसर पर आयोजित होने वाले समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। कार्यक्रम का आयोजन रूमतुलै की ओर से किया जा रहा है। समारोह में सरायकेला-खरसावां जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। रूमतुलै के पदाधिकारियों ने उन्हें आमंत्रण पत्र सौंपकर समारोह में शामिल होने का आग्रह किया, जिस पर उन्होंने आभार व्यक्त करते हुए मौखिक सहमति प्रदान की।
रूमतुलै के अध्यक्ष रोशन तियु ने बताया कि जयंती समारोह को भव्य बनाने की तैयारी चल रही है। आयोजन में हो समाज की भाषा, संस्कृति और परंपरा को प्रदर्शित करने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। समारोह को लेकर पासेया और आसपास के क्षेत्रों में लोगों में खासा उत्साह है।
पश्चिमी सिंहभूम जिले के खूंटपानी प्रखंड तथा खरसावां विधानसभा क्षेत्र से जुड़े पासेया गांव को ओत गुरु लाको बोदरा की जन्मस्थली और पैतृक गांव के रूप में जाना जाता है। यहीं से निकलकर उन्होंने हो भाषा को अपनी स्वतंत्र लिखित पहचान देने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किया।
लाको बोदरा का सबसे बड़ा योगदान वारंगक्षिति लिपि का विकास माना जाता है। उन्होंने महसूस किया कि किसी समाज की भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति, परंपरा, इतिहास और सामुदायिक पहचान की आधारशिला है। इसी सोच के साथ उन्होंने हो भाषा के लिए लिपि विकसित करने और उसे समाज के बीच पहुंचाने का अभियान चलाया।
लाको बोदरा ने भाषा के साथ साहित्य और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज वारंगक्षिति हो समाज की भाषाई अस्मिता का महत्वपूर्ण प्रतीक है। ऐसे में पैतृक गांव में आयोजित जयंती समारोह को उनकी भाषा और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
समारोह की तैयारी में रूमतुलै के कोषाध्यक्ष संजय बोदरा, सचिव कविता मुंडरी, उपाध्यक्ष नीतिमा बोदरा और उप सचिव होलीका पूर्ति समेत अन्य सदस्य जुटे हुए हैं।

