Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » क्या यूपी में कांग्रेस-सपा गठबंधन एनडीए को दे पाएगा चुनौती….?
    Breaking News Headlines उत्तर प्रदेश ओड़िशा जमशेदपुर जामताड़ा झारखंड रांची राजनीति राष्ट्रीय संपादकीय

    क्या यूपी में कांग्रेस-सपा गठबंधन एनडीए को दे पाएगा चुनौती….?

    Devanand SinghBy Devanand SinghFebruary 22, 2024No Comments4 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    क्या यूपी में कांग्रेस-सपा गठबंधन एनडीए को दे पाएगा चुनौती….?

     

    देवानंद सिंह

    आने वाले दिनों में देश में लोकसभा चुवाव होने हैं, इन चुनावों के मद्देनजर देश का सबसे बड़ा राज्य होने के नाते उत्तर प्रदेश की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होने वाली है, क्योंकि इस राज्य में लोकसभा की 80 सीटें हैं, जो सीटें केंद्र की सत्ता तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इसीलिए राजनीतिक पार्टियों को पूरा फोकस यूपी पर है। बीजेपी ने जहां चौधरी चरण सिंह को ‘भारत रत्न’ देकर प्रदेश के किसान वोटरों को अपने पाले में करने का दांव चला है, वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने भी गठबंधन कर लिया है। दोनों पार्टियों के बीच यूपी में 80 सीटों को लेकर हुई डील के तहत कांग्रेस 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि सपा 63 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। सपा अपने कोटे से कुछ छोटे दलों को भी सीटें दे सकती है।

     

     

    दरअसल, अखिलेश यादव ने चुनाव में एनडीए को हराने के लिए पीडीए का फॉर्मूला दिया था। पीडीए यानी पिछड़ा वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक। समाजवादी पार्टी ने लोकसभा उम्मीदवारों की लिस्ट में ‘पीडीए’ पर दांव लगाया है। सपा की उम्मीदवारों की लिस्ट में ओबीसी, दलित और मुस्लिम प्रत्याशी शामिल है। वहीं, पीएम मोदी कई मौकों पर चार जातियों की बात कर चुके हैं। जातिगत राजनीति को लेकर पीएम मोदी ने कहा था कि उनके लिए 4 जातियां अहम हैं-नारी शक्ति, युवा शक्ति, किसान और गरीब परिवार। ऐसे में सवाल ये है कि यूपी में कांग्रेस का साथ पाने के बाद अखिलेश यादव का पीडीए पीएम मोदी की 4 जातियों के आगे कितना टिक पाएगा? अगर जमीनी स्थिति देखें तो एक बड़ी आबादी को साधने की राहुल गांधी और अखिलेश याद के प्रयासों के बावजूद माहौल बीजेपी के पक्ष में ज्यादा दिखता है, क्योंकि बीजेपी के पास अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण से बना माहौल है।

     

     

     

    दूसरी ओर, पीएम मोदी की राष्ट्रीय छवि बीजेपी को फायदा पहुंचाती है। वहीं, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि हिंदुत्व के रक्षक नेता की है, जिसका लाभ भी मिलना तय है। यहां एनडीए ने छोटे दलों को साधकर अपनी ताकत मजबूत कर ली है। इसके पलट विपक्ष अपने घर में मचे भगदड़ से त्रस्त है। वहां हफ्ते भर में चार-चार झटके लगे। चौधरी चरण सिंह को मोदी सरकार ने ‘भारत रत्न’ दे दिया, तो उनके पोते और आरएलडी चीफ जयंत चौधरी ने अखिलेश से गठबंधन तोड़ने का पूरा मन बना लिया, हालांकि, अभी बीजेपी-आरएलडी या सपा तीनों में से किसी ने ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं किया है। दरअसल, अखिलेश की समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन का मुकाबला उस एनडीए से है, जिसे 2019 के चुनाव में बीजेपी को 49.6% वोट मिले थे, जबकि अपना दल को 1.2% मिले।

     

     

     

    यानी एनडीए को 50.8% वोट हासिल हुए। दूसरी तरफ महागठबंधन में शामिल समाजवादी पार्टी को 18% वोट मिले थे, BSP को 19.3% और राष्ट्रीय लोकदल को 1.7% वोट मिले। यानी समूचे गठबंधन को 39% हासिल हुए। वहीं, यूपीए में कांग्रेस को 6.3% वोट हासिल हुए थे, लेकिन अब बदले हालात में गठबंधनों का चरित्र बदल गया है। पिछले चुनाव के आधार पर मौजूदा गठबंधन का वोट जोड़ें तो एनडीए में बीजेपी, अपना दल और संभावित तौर पर एनडीए में शामिल होने जा रही आरएलडी के वोट जोड़कर 52.5% हो जाते हैं, जबकि दूसरी तरफ, इंडिया ब्लॉक में शामिल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के वोट जोडकर 24.3% होते हैं। यानी एनडीए पिछले चुनावों के आधार पर इंडिया ब्लॉक की तुलना में दोगुना से भी ज्यादा मजबूत दिखती है।

     

     

    पिछले चुनावों का समीकरण तो विपक्ष के लिए अच्छी तस्वीर पेश नहीं करता, बावजूद इसके अखिलेश यादव अपने पीडीए यानी ‘पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक’ की हांक लगाकर बड़े वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर, राहुल गांधी भी तकरीबन हर मंच से 73% आबादी (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) के हित और हक की बात कर रहे हैं, लेकिन देखने वाली बात होगी कि आगामी लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश का पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक किसे दिल्ली की सत्ता तक ले जाते हैं।

     

    क्या यूपी में कांग्रेस-सपा गठबंधन एनडीए को दे पाएगा चुनौती....?
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous ArticleJAMSHEDPUR: श्रीराम मंदिर स्थापना के चतुर्थ वर्षगांठ पर राममय होगी लौहनगरी, सूर्य मंदिर समिति की सभी तैयारियां हुई पूरी, कल प्रतिमाओं का होगा नगर भ्रमण, सूर्यधाम सिदगोड़ा से निकलेगी भव्य शोभायात्रा, शामिल होंगे पूर्व सीएम एवं ओडिशा के राज्यपाल रघुवर दास, 23 से श्रीराम कथा का होगा शुभारंभ
    Next Article हेडलाइंस राष्ट्र संवाद

    Related Posts

    मानगो में सड़क किनारे खड़ी बस में लगी भीषण आग, जलकर हुई खाक

    June 3, 2026

    कार को बचाने के प्रयास में फ्लाई ऐश लदा हाईवा हादसे का शिकार, टावर पोल से टकराकर डिवाइडर पर चढ़ा

    June 3, 2026

    शिक्षा व्यवस्था पर जेएमएम का हमला, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

    June 2, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    मानगो में सड़क किनारे खड़ी बस में लगी भीषण आग, जलकर हुई खाक

    कार को बचाने के प्रयास में फ्लाई ऐश लदा हाईवा हादसे का शिकार, टावर पोल से टकराकर डिवाइडर पर चढ़ा

    शिक्षा व्यवस्था पर जेएमएम का हमला, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

    बीएमडब्ल्यू प्लांट से रंगदारी मांगने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता, प्रिंस खान गैंग का सहयोगी गिरफ्तार

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने जिला निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक, 15 जून तक मैपिंग कार्य पूरा करने के निर्देश

    रांची की यातायात व्यवस्था सुधारने को लेकर दुकानदारों के साथ बैठक, अतिक्रमण व अवैध पार्किंग पर सख्ती के निर्देश

    ऑनलाइन सट्टेबाजी के करोड़ों के खेल का खुलासा, राहुल कुमार गिरफ्तार

    ब्राह्मी लिपि पर त्रिदिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ, भारतीय ज्ञान-परंपरा से जुड़े प्रतिभागी

    डीएमएफटी न्यास परिषद की बैठक संपन्न, सड़क, जलापूर्ति, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना विकास योजनाओं पर हुई विस्तृत चर्चा

    ईंट निर्माता एसोसिएशन ने प्रदूषण बोर्ड चेयरमैन का किया स्वागत, लाइसेंस प्रक्रिया आसान होने पर जताया आभार

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.