प्रोफेसर गौरव वल्लभ ने ज्वलंत मुद्दों से रघुवर को घेरने की बनााई रणनीति
देवानंद सिंह
जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्ष्ोत्र से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सह यूपीए गठबंधन ने प्रोफेसर गौरव वल्लभ को संयुक्त प्रत्याशी घोषित कर दिया है। उन्होंने प्रत्याशी घोषित होने के साथ ही, रघुवर दास के खिलाफ सवालों की बौछार शुरू कर दी है। दिग्गज प्रत्याशियों के उक्त सीट पर चुनाव मैदान में होने से मुद्दों की लड़ाई चरम तक जाने की संभावना बढ़ गई है। इसमें सबसे अधिक चुनौतियों का सामना मुख्यमंत्री रघुवर दास को करना पड़ेगा। प्रोफेसर गौरव वल्लभ के अलावा सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार का बिगुल पकड़े निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में सरयू राय भी हैं, जबकि प्रोफेसर गौरव वल्लभ राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्दों पर गहरी पकड़ रखते हैं, जिनके जरिए वह रघुवर दास को घेरने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। ऐसे में, दोनों ही प्रभावशाली नेताओं को रघुवर दास कितना डिफेंड कर पाएंगे, यह देखना खासा दिलचस्प होगा।
प्रोफेसर गौरव वल्लभ ने जिस तरह से मीडिया से बातचीत में प्रदेश के मुद्दे उछाले हैं। वे अपने-आप में बहुत मायने रखते हैं। प्रदेश में बढ़ा भ्रष्टाचार, घटते रोजगार, 86 बस्तियों के मालिकाना हक के मुद्दे से लेकर जमशेदपुर का विकास उठकर खड़कपुर तक पहुंचना जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा प्रदेश में शिक्षा की खराब स्थिति व मेडिकल कॉलेजों को खोलने के नाम पर प्रदेश की जनता के साथ की गई धोखाधड़ी जैसे मुद्दों को लेकर भी रघुवर दास को घ्ोरने का कोई मौका नहीं छोड़ा जाने वाला है। बकायदा, गौरव वल्लभ ने उन तमाम मुद्दों की सूची बना डाली है, जिनको लेकर रघुवर दास को घ्ोरा जाना है। एक अच्छे राष्ट्रीय प्रवक्ता के साथ-साथ प्रोफेसर वल्लभ की छवि प्रखर बुद्धिजीवी के रूप में है। इसीलिए इस बात की पूरी संभावना है कि वह मुद्दों को लेकर अपना पक्ष मजबूती से रखने में पीछे नहीं रहेंगे।
यहां बता दें कि प्रोफेसर गौरव वल्लभ वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डा. संबित पात्रा से एक टीवी चैनल के डिबेट में पूछ लिया था कि पांच ट्रिलियन में कितने जीरो होते हैं और संबित पात्रा इसका जवाब नहीं दे सके हालांकि गौरव बल्लभ का राजनीतिक सफर बहुत लंबा नहीं है, लेकिन उनकी योग्यता को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाकर अहम जिम्मेदारी सौंपी है, जिसे वह बखूबी निभा भी रहे हैं।
42 वर्षीय गौरव वल्लभ पिछले 18 वर्षों से एक्सएलआरआइ में फाइनांस के प्रोफेसर हैं। उनके माता-पिता भी दोनों शिक्षाविद् हैं। गौरव ने फाइनांस एंड बिजनेस मैनेजमेंट के साथ ही एलएलबी, सीए, कंपनी सेक्रेटी, एम. कॉम, पीएचडी और अमेरिका से रिस्क मैनेजमेंट की पढ़ाई की है। वह हावर्ड युनिवर्सिटी में भी पढ़ा चुके हैं। भारत और अमेरिका के विभिन्न विश्वविद्यालयों से उनके करीब 1०० शोध-पत्र भी प्रकाशित हो चुके हैं। वह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में भी कार्य कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त वह देश के लगभग सभी आइआइएम में पढ़ाने के साथ ही देश के कई बड़े बैंकों व कंपनियों के बोर्ड में भी शामिल हैं। उन्हें लोकसभा रिसर्च फेलोशिप भी मिल चुका है। चुनाव मैदान में उतरते ही उन्होंने अपने उद्देश्य को साफ करते हुए कहा कि उनका मकसद सरकारी शिक्षा के क्ष्ोत्र को मजबूत करना, सरकारी अस्पताल को आम जनता के लिए जिम्मेदार बनाना, कंपनियों को किसी भी हाल में बंद नहीं होने देना, मालिकाना हक दिलाने हेतु प्रतिबद्धता और समाज एवं प्रदेश के सभी विषयों का संज्ञान लेना होगा। उन्होंने कहा कि अगर, रघुवर सरकार इन सभी मुद्दों को लेकर गंभीर रही होती तो प्रदेश की तस्वीर कुछ अलग होती।
उन्होंने मोमेंटम झारखंड के मुद्दे को लेकर भी प्रदेश की सरकार को घ्ोरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस कार्यक्रम को प्रदेश में निवेश बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े जोरशोर से आयोजित किया था, लेकिन नतीजा यह हुआ कि प्रदेश में कोई भी निवेशक नहीं आया। भव्य आयोजन में करोड़ों खर्च करने के बाद भी निवेश नहीं आया तो इसका जिम्मेदार कौन है ? क्या सरकार को इसकी जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए। प्रोफसर वल्लभ ने कहा कि यह कार्यक्रम महज 3-4 हजार की एक थाली खाने और लाखों की चाय पीने के लिए आयोजित किया गया था। मालिकाना हक दिलाने को लेकर भी उन्होंने सरकार को घ्ोरा। उनका मानना है कि इस संबंध में सरकार के पास कोई खुला विजन नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर, उन्हें क्ष्ोत्र की जनता का प्यार मिलता है और वह जीतते हैं तो वह इस समस्या का समाधान निश्चित ही कराएंगे। उन्होंने बताया कि उनके पास इस संबंध में पूरा विजन है। जिसके तहत वह इस समस्या को हल करेंगे। शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर भी उन्होंने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने जोर दिया कि प्रदेश में डिग्री कॉलेजों की संख्या बढ़नी चाहिए।
वहीं, प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को खोलने के इतर सरकारी अस्पतालों की स्थिति सुधारने पर जोर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जमश्ोदपुर में जो सरकारी अस्पताल है, वहां लोग इलाज कराने तो जाते हैं, लेकिन वापस भी बीमार होकर ही लौटते हैं। इसकी वजह है कि सरकार की तरफ से सरकारी अस्पतालों के जीर्णोद्धार के लिए कुछ नहीं किया गया। यही स्थिति रोजगार से लेकर अन्य मौलिक सुविधाओं को लेकर भी है। निश्चित ही मौलिक समस्याओं से लोगों का ज्यादा टच होता है। अब देखना यह है कि लोग अपनी मौलिक समस्याओं को अधिक महत्व देते हैं या फिर मोदी फैक्टर व प्रदेश सरकार की रणनीति को।
