लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
कभी अपनी स्वच्छता और सुंदरता के लिए प्रसिद्ध जादूगोड़ा स्थित यूसील कॉलोनी आज बदहाली का शिकार है। कॉलोनी में गंदगी का अंबार, डस्टबिनों की नियमित सफाई का अभाव, नालियों की सफाई बंद, झाड़ियों की कटाई नहीं होने और फॉगिंग व्यवस्था ठप रहने से कॉलोनीवासियों में भारी नाराजगी है। बरसात से पहले ही डेंगू और मच्छरों के बढ़ते खतरे ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
ए-टाइप, बी-टाइप और टाइप-वन क्वार्टरों के सामने डस्टबिनों की सफाई नहीं होने से जानवरों और मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले वर्षों में कॉलोनी में डेंगू के कई मामले सामने आए थे, जिनमें शिक्षक कोकिला पाल और कृष्ण प्रसाद शर्मा की मौत भी हो चुकी है।
सफाई कार्य के लिए टेंडर दिए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। वहीं कॉलोनी की सड़कें और क्वार्टर जर्जर हो चुके हैं। कई स्थानों पर भवनों से प्लास्टर झड़ रहा है, जिससे कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कॉलोनीवासियों ने यूसील के संपदा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सिविल अधिकारी दिलीप कुमार मंडल पर आरोप है कि लंबे समय से एक ही पद पर रहने के बावजूद कॉलोनी की मूलभूत समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सफाई, मेंटेनेंस और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं ठप पड़ी हैं।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से निर्मित चारदीवारी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल हैं और इस कार्य में भ्रष्टाचार हुआ है। इसके अलावा जर्जर सड़कों के कारण कॉलोनीवासियों को प्रतिदिन भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
नए सीएमडी से कॉलोनीवासियों को उम्मीद
यूसील के नए सीएमडी डॉ. कचम आनंद राव से
कॉलोनीवासियों को बड़ी उम्मीदें हैं। लोगों का मानना है कि नए नेतृत्व में कॉलोनी की स्वच्छता, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा तथा संपदा विभाग में कथित भ्रष्टाचार और लापरवाही पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
आखिर किसके संरक्षण में वर्षों से जमे हैं अधिकारी?
कॉलोनीवासियों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि यूसील में समय-समय पर कई सीएमडी बदलते रहे, लेकिन संपदा विभाग के कुछ अधिकारी वर्षों से अपने पद पर बने हुए हैं। लोगों का सवाल है कि आखिर इन अधिकारियों की पहुंच कितनी ऊपर तक है कि लगातार नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद उनकी कार्यशैली और पदस्थापन पर कोई असर नहीं पड़ता। स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जवाबदेही तय करने की मांग की है।

