यूजीसी ड्राफ्ट 2026 छात्र हितों के खिलाफ, तुरंत वापस लिया जाए: शिव शंकर सिंह
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर झारखंड क्षत्रिय संघ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के प्रस्तावित ड्राफ्ट रेगुलेशन 2026 पर गंभीर आपत्ति जताई है. संघ ने इसे छात्रों के हितों के खिलाफ बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है. इस संबंध में उपायुक्त के माध्यम से संबंधित मंत्रालय और केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपा गया.
ज्ञापन में कहा गया है कि यूजीसी ड्राफ्ट 2026 में भेदभाव की परिभाषा को अस्पष्ट रखा गया है, जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों को भी बिना ठोस आधार के शिकायतों और अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. संघ का आरोप है कि इससे शैक्षणिक संस्थानों में ‘एकेडमिक वेंडेटा’ यानी व्यक्तिगत दुर्भावना के तहत कार्रवाई की आशंका बढ़ सकती है. संघ ने शिकायत निवारण तंत्र, इक्विटी स्क्वॉड और छात्र अनुशासन से जुड़े प्रावधानों पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि ड्राफ्ट में शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने और त्वरित कार्रवाई के प्रावधान तो हैं, लेकिन आरोपी को पर्याप्त सुनवाई का अवसर न मिलने की आशंका बनी रहती है.
इक्विटी स्क्वॉड को व्यापक निगरानी शक्तियां देने के प्रस्ताव को भी संघ ने संस्थानों की स्वायत्तता के लिए खतरा बताया है. उनका कहना है कि इससे शिक्षा का लोकतांत्रिक वातावरण प्रभावित हो सकता है और निर्णय प्रक्रिया में असंतुलन पैदा हो सकता है. झारखंड क्षत्रिय संघ ने मांग की है कि ड्राफ्ट रेगुलेशन 2026 को तत्काल वापस लिया जाए. साथ ही छात्रों और शिक्षकों से व्यापक परामर्श के बाद ही कोई नया प्रावधान लाया जाए. संघ ने उच्च शिक्षा में पर्याप्त सरकारी वित्तपोषण और संस्थानों की स्वायत्तता सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई है.

