यूसीआईएल जादूगोड़ा कॉलोनी वीरान और डरावनी बन गई
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा. यूसीआईएल जादूगोड़ा कॉलोनी, जो कभी रौनक से भरी रहती थी, अब वीरान और डरावनी बन गई है। शाम होते ही कॉलोनी खंडहर जैसी लगने लगती है। हर गली और सड़क अंधेरे में डूबी रहती है। स्ट्रीट लाइटें या तो बंद हैं या झिलमिला रही हैं। इससे लोगों को घर से निकलने में डर लगता है।

सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। जगह-जगह गड्ढे हैं। कॉलोनी के चारों ओर जंगल और झाड़ियां फैल गई हैं। सांप-बिच्छू का डर बना रहता है। लोग शाम होते ही घरों में कैद हो जाते हैं। कॉलोनी में मौजूद छोटी दुकानों और ठेलों को भी समय से पहले बंद करवाया जा रहा है। दुकानदारों का आरोप है कि अधिकारी महेश साहू रोज आकर दुकानें बंद करवाते हैं, चाहे ग्राहक हों या नहीं। इससे दुकानदारों को शर्मिंदगी और नुकसान दोनों झेलना पड़ रहा है।

रहवासियों ने बताया कि वे ड्यूटी से रात 10 बजे लौटते हैं। जरूरी सामान लेने के लिए दुकानें खुली नहीं मिलतीं। ठेला-खोमचा वालों ने कहा कि पिछले 50 साल में ऐसी स्थिति कभी नहीं बनी। ग्राहक नहीं आने से सामान खराब हो रहा है। रोजी-रोटी पर संकट गहराता जा रहा है। कॉलोनीवासियों ने कंपनी प्रबंधन से मांग की है कि स्ट्रीट लाइटें ठीक करवाई जाएं। सड़कें मरम्मत हों। दुकानों पर लगाई गई बंदिशें हटाई जाएं।

