लव स्टोरी में ‘लव’ कम, ‘FIR’ ज़्यादा , मऊ की मोहब्बत में धर्म, फतवा और सर्जिकल स्ट्राइक!
इंदिरा यादव, व्यंग्य-कलम
उत्तर प्रदेश का मऊ इन दिनों प्रेम, धर्म और अपराध–कोड की त्रिवेणी में डूबा हुआ है। कहानी सुनने में रोमांटिक लगती है—विशाल और सुनैना परवीन। नाम पढ़ते ही लगता है कि मामला इश्क का है, लेकिन नहीं… यह तो पूरा “FIR-verse” है, जिसमें हीरोइन कम और धाराएं ज़्यादा हैं।
2022 से साथ रह रहे विशाल जी अचानक एक सुबह स्नान करके नहीं, ‘घर वापसी’ करके प्रकट हुए। और आते ही ऐसा महाकाव्यात्मक खुलासा किया कि प्रेम की कहानी देखते-देखते राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बन गई
जबरन धर्म परिवर्तन, असम ले जाकर खतना, और नमाज़ की डोज़।
अब मोहब्बत में इतना एडवांस कोर्स कौन करवाता है, यह तो विशाल ही जानें।
इधर विशाल की माताश्री रिंकी सिंह ने जिस तेजी से FIR दर्ज करवाई है, उसे देखकर लगता है कि पुलिस नहीं, मऊ की जनता अब उन्हें “धर्म रक्षा ब्रिगेड की ब्रांड एंबेसेडर” बनाने वाली है। नामजदों की लिस्ट कोई छोटी-मोटी नहीं—बाप से लेकर मौलाना तक सब पर धाराएं फिट।
पर असली ट्विस्ट यह है
तीन साल तक प्यार की ‘नमाज़’ पढ़ने वाले विशाल को अचानक ‘हिंदू खतरे में’ का प्रोमो कैसे दिख गया?
क्या कोई ट्रेलर रिलीज़ हुआ था जिसे जनता नहीं देख पाई?
सुनैना परवीन शायद बैकग्राउंड में बैठी सोच रही होंगी—
“प्यार अंधा होता है, लेकिन ये तो आंख खोलकर कोर्ट चला गया!”
मौलाना सलमान पर जो आरोप लगे, वे भी बैठकर दाढ़ी सहला रहे होंगे
“हमने तो दुआ सिखाई थी, ये खतना वाली कहानी किस लेखक ने लिखी?”
पुलिस जांच कर रही है, पर सच पूछिए तो यहां जांच प्यार की नहीं, समाज की समझदारी की होनी चाहिए। आजकल रोमांस की किस्में भी बदल गई हैं—पहले प्यार में दिल टूटता था, अब एफआईआर कटती है।
अगर विशाल सही हैं, तो कार्रवाई अनिवार्य है।
अगर नहीं—तो बेटा अगली बार गर्लफ्रेंड चुनते वक्त “धर्म-न्यूट्रल” और “FIR-सेफ्टी प्रमाणित” ले जाना।
वरना मऊ की यह प्रेम कहानी तो बस सैंपल है पूरा ‘धर्म बनाम प्रेम’ ब्रह्मांड किसी भी वक्त नया एपिसोड रिलीज़ कर सकता है।

