बागबेड़ा पंचायत भवन में चोरी-आगजनी का मामला संदिग्ध, उच्च स्तरीय जांच की मांग, विनोद राम ने उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर : बागबेड़ा कॉलोनी पंचायत भवन में बीते शुक्रवार, 10 अक्टूबर की रात हुई कथित चोरी एवं आगजनी की घटना ने अब नया मोड़ ले लिया है। बागबेड़ा महानगर विकास समिति के संयोजक विनोद राम ने इस पूरे मामले को संदिग्ध और पूर्व नियोजित साजिश बताया है। उन्होंने उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी और अनुमंडल पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि पंचायत भवन में हुई घटना को चोरी के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि वस्तुतः यह गबन या साक्ष्य मिटाने का मामला प्रतीत होता है। समिति का आरोप है कि मुखिया राजकुमार गौड़ और पंचायत सचिव की मिलीभगत से आवश्यक कागजात गायब करवा दिए गए, जिन्हें बाद में जलाकर नष्ट कर दिया गया।
*“चोरी नहीं, कागजात नष्ट करने की साजिश”*
बागबेड़ा महानगर विकास समिति के संयोजक विनोद राम ने कहा कि अगर यह सचमुच चोरी होती, तो पंचायत भवन में रखे कंप्यूटर सेट, प्रिंटर, वाटर कूलर जैसे कीमती सामान भी चोरी हो जाते। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। केवल जरूरी फाइलें और दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें जलाया गया है। यह स्पष्ट संकेत है कि भ्रष्टाचार के सबूत मिटाने के लिए यह नाटक रचा गया। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत भवन की चाबी मुखिया राजकुमार गौड़ के पास रहती है। ऐसे में ताला तोड़कर चोरी का नाटक रचकर प्रशासन और जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई है।
*“पूर्व में भी लग चुके हैं घोटाले के आरोप”*
बागबेड़ा महानगर समिति के संयोजक विनोद राम ने बताया कि इससे पहले भी कई बार मुखिया और पंचायत सचिव के खिलाफ घोटाला, अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। कई आवेदन उपायुक्त और संबंधित विभागों को दिए गए, परंतु अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारियां भी अब तक नहीं दी गईं।
*“डीसी के आदेश के बाद हुई थी घटना”*
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने 10 अक्टूबर को जनता दरबार में कहा था कि घाटशिला उपचुनाव के बाद वे स्वयं बागबेड़ा जलापूर्ति योजना और अवैध कनेक्शनों की जांच करेंगे। उसी रात पंचायत भवन में यह घटना घटित हुई, जिससे स्पष्ट होता है कि भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेजों को नष्ट करने के लिए यह आगजनी की गई।
*पंचायत भवन में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल*
बागबेड़ा महानगर समिति के संयोजक विनोद राम ने आरोप लगाया है कि मुखिया के पास हर महीने ₹15,000 पंचायत भवन के सौंदर्यीकरण के लिए आते हैं, बावजूद इसके वहां सीसीटीवी कैमरा, गार्ड या लाइट की उचित व्यवस्था नहीं है। भवन को गोदाम बनाकर रखा गया है, जहां निर्माण सामग्री तक जमा है। यह सब इस बात का संकेत है कि मुखिया की भूमिका संदिग्ध है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
अंत में बागबेड़ा महानगर विकास समिति के संयोजक विनोद राम ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, जिला स्तरीय जांच कराई जाए और जांच के दौरान समिति के सदस्यों को भी सूचित किया जाए ताकि वे सहयोग कर सकें। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासनिक स्तर पर जांच नहीं हुई, तो वे न्यायालय के माध्यम से जांच की मांग करेंगे ताकि सच्चाई सामने आ सके।

