अपराधियों के आरोपों से नहीं, कानून के शासन से तय होगी सच्चाई
देवानंद सिंह
धनबाद के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान के कथित वायरल वीडियो ने झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। वीडियो में धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार पर लगाए गए गंभीर आरोपों को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार से निष्पक्ष जांच और अधिकारी को हटाने की मांग की है। लोकतंत्र में किसी भी आरोप की जांच होना आवश्यक है, लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि अपराधियों के बयानों को अंतिम सत्य मान लेने की जल्दबाजी न हो।
प्रिंस खान जैसे अपराधियों का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। रंगदारी, धमकी और भय का नेटवर्क कमजोर पड़ने पर अक्सर ऐसे तत्व पुलिस और प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए सोशल मीडिया और राजनीतिक माहौल का इस्तेमाल करते हैं। हाल के दिनों में धनबाद में माफिया नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई हुई है, जिससे यह स्वाभाविक है कि अपराध जगत में बेचैनी बढ़ी हो। ऐसे में किसी भी वीडियो या आरोप को तथ्यों और निष्पक्ष जांच की कसौटी पर परखा जाना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष की भूमिका केवल आरोपों को आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें यह भी देखना चाहिए कि कहीं अपराधी तत्व राजनीतिक मंचों का इस्तेमाल अपने हित में तो नहीं कर रहे। यदि आरोपों में सच्चाई है तो कानून अपना काम करेगा, लेकिन यदि यह पुलिस कार्रवाई से बचने की रणनीति है, तो ऐसे प्रयासों को भी बेनकाब करना जरूरी है।
राज्य में कानून का राज तभी मजबूत होगा जब न अपराधियों को संरक्षण मिले और न ही बिना प्रमाण किसी अधिकारी की सार्वजनिक छवि को राजनीतिक विवादों में घसीटा जाए।

