सतनाम–वाहेगुरु के जाप संग सिख समुदाय ने किया नववर्ष 2026 में प्रवेश
राष्ट्र संवाद संवाददाता
सिख पंथ की दसवीं पातशाही श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के 359वें प्रकाशोत्सव को समर्पित महान कीर्तन दरबार “नवां साल गुरु दे नाल” के माध्यम से सिख समुदाय ने श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ नववर्ष 2026 में प्रवेश किया। साकची गुरुद्वारा मैदान में आयोजित दो दिवसीय कीर्तन दीवान में संगत ने सतनाम–वाहेगुरु का जाप करते हुए गुरु ग्रंथ साहिब पर पुष्पवर्षा की।

कीर्तन दीवान के अंतिम दिन पूरे पंडाल में “सतनाम–वाहेगुरु” और “बोले सो निहाल, सतश्रीअकाल” के जयकारे गूंजते रहे। खालसा सेवा दल के तत्वावधान में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, साकची के सहयोग से आयोजित समागम में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, बड़ी संख्या में संगत ने हाजिरी भरी।
हजूरी रागी भाई सरूप सिंह ने “जो ना भजने नारायणा, तिन का मैं न करूं दर्शना” सबद गाकर संगत को भाव-विभोर कर दिया। अन्य प्रख्यात रागी जत्थों ने भी गुरबाणी की अमृतवर्षा से समागम को दिव्य बना दिया।
समागम के दौरान गुरु का अटूट लंगर निरंतर चलता रहा। आयोजन को सफल बनाने में गुरुद्वारा प्रबंधन, खालसा सेवा दल और सेवादारों का सराहनीय योगदान रहा।

