तबाही में भी बंटा इंसानियत का तराज़ू , धराली आपदा पर धर्म की सियासत हावी
राष्ट्र संवाद संवाददाता
उत्तराखंड धराली:उत्तरकाशी जिले के धराली और आसपास के क्षेत्रों में हाल ही में बादल फटने से तबाही मच गई। कई घर बह गए, दर्जनों परिवार बेघर हो गए और जनहानि का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। लेकिन राहत और बचाव के इस मुश्किल दौर में भी इंसानियत का धर्म कांटा हिंदू-मुस्लिम में बंटता नज़र आया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आपदा में फंसे लोगों की मदद और संवेदना के बजाय चर्चा इस बात पर होने लगी कि पीड़ित किस धर्म से हैं। सोशल मीडिया से लेकर कुछ राजनीतिक बयानों तक, आपदा को सांप्रदायिक चश्मे से देखने की कोशिश ने माहौल को और कड़वा कर दिया।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रुझान खतरनाक है, क्योंकि इससे असली मुद्दे — जैसे आपदा प्रबंधन की कमी, पर्यावरणीय चेतावनी व्यवस्था का अभाव, और राहत कार्य की पारदर्शिता हाशिए पर चले जाते हैं। “धराली में तबाही से ज़्यादा नुकसान लोगों की सोच के बंटने से हो रहा है,” एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा।

धराली आपदा एक बार फिर यह सवाल छोड़ जाती है — क्या हम किसी का दर्द बांटने से पहले उसकी जात-धर्म की पहचान तौलेंगे, या इंसानियत का तराज़ू फिर से बराबरी पर लाने की कोशिश करेंगे?


