पोटका प्रखंड के कुलडीहा पंचायत में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेजों से मकान बनाने का मामला ने पकड़ा तूल
सुंदर के नाम से बसा सुंदरनगर की भी है अजब कहानी, सरकारी जमीन पर बन रहे हैं मकान अधिकारी से लेकर भूमाफिया तक है शामिल?
राष्ट्र संवाद संवाददाता
पोटका प्रखंड के कुलडीहा पंचायत में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेजों से मकान बनाने का मामला तूल पकड़ चुका है। झारखंड भूदान यज्ञ कमेटी के नाम पर फर्जी कागजात तैयार कर बांटने वाला एक संगठित गिरोह सक्रिय है। सूत्रों के अनुसार, इस गिरोह का नेटवर्क चाईबासा तक फैला है। मोटी रकम लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं।
पोटका प्रखंड के कलिकापुर में फर्जी कागजात बना रहे हैं जिसमें एक से डेढ़ लाख रुपया तक की लेनदेन हो रही है यह मामले को सामाजिक कार्यकर्ता सुनील मुर्मू के द्वारा जिला के उपायुक्त से जांच कर कार्रवाई करने की मांग की।
अब तक 75 लोगों पर जेपीएलई एक्ट के तहत केस दर्ज हो चुका है। इनमें से कई ने अंचल कार्यालय में भूदान यज्ञ कमेटी के दस्तावेज जमा किए हैं। सीओ निकिता बाला ने इन दस्तावेजों की जांच के लिए वरीय अधिकारियों को पत्र लिखा है। लेकिन अब तक कोई जांच रिपोर्ट नहीं आई है।
कुछ दिन पहले सीओ निकिता बाला ने सरकारी जमीन पर बने शिशिर पात्रों के घर को गिरा दिया था। अब शिशिर पात्रों कोर्ट की शरण में हैं।
अब तक किसी भी आरोपी ने दस्तावेज बेचने वालों या भू-माफिया का नाम नहीं बताया है। लोग खुद पर केस झेल रहे हैं, लेकिन विक्रेताओं का नाम उजागर नहीं कर रहे। इससे गिरोह अब भी सक्रिय है और सरकारी जमीन बेचने का काम बेरोकटोक जारी है।
शिशिर पात्रों के साथ रमेश दास को भी 2 जनवरी को नोटिस दिया गया था। उन्होंने सरकारी जमीन पर बड़ा दुकान खोल लिया है। उन्हें 15 दिन में जमीन खाली करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन उन्होंने भी भूदान यज्ञ कमेटी का दस्तावेज जमा कर दिया। अब जांच लंबित है और कार्रवाई नहीं हो पाई है।
सूत्रों के अनुसार, कुलडीहा पंचायत में सबसे ज्यादा सरकारी जमीन पर कब्जा हुआ है। भू-माफिया ने यहां जमीन बेचकर करोड़ों की कमाई की है। अब वही जमीन खरीदारों के लिए मुसीबत बन गई है।
शिशिर पात्रों का घर गिराए जाने के बाद सरकारी जमीन पर बसे अन्य लोगों में डर का माहौल है। अब वे भी फर्जी दस्तावेज बनवाकर खुद को बचाने की कोशिश में लगे हैं। प्रशासन की सख्ती जरूरी हो गई है।

