मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, अर्जुन मुंडा, मधु कोड़ा समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
राष्ट्र संवाद संवाददाता
गम्हरिया।राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पौत्र वीर सिंह सोरेन का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव जिले के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत झीलिंगगोड़ा में सामाजिक रीति रिवाज के साथ गुरुवार को कर दिया गया। उनके अंतिम संस्कार में काफी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण शामिल हुए। अंतिम संस्कार में मुख्य रूप से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, मधु कोड़ा, सांसद जोबा माझी, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, भाजपा नेता रमेश हांसदा समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए। इससे पूर्व वीर सिंह सोरेन का

पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव झीलिंगगोरा पहुंचते ही पूरा माहौल और गमगीन हो गया। घर की महिलाओं के साथ साथ गांव की अन्य महिलाओं के क्रंदन से अंतिम दर्शन के लिए जुटे लोगों की आंखे भी नम हो गई। टीएमएच से शव के गांव पहुंचते ही अंतिम दर्शन के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन भी बेहद भावुक नजर आए। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।अपने बड़े बेटे का शव देख वीर सिंह सोरेन की माता बार बार बेहोश हो रही थी जिसे ग्रामीण महिलाएं किसी प्रकार संभाले रखी थी। वहीं, पिता बाबूलाल सोरेन का रक्तचाप और शुगर भी अनियंत्रित हो जा रहा था। उन्हें चिकित्सक की निगरानी में रखा गया था। गांव में शोक की लहर उस समय और गहरी हो गई जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अंत्येष्टि में शामिल होने पहुंचे। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पौत्र वीर सिंह सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की और शोक संतप्त परिवार को ढाढस बंधाया। मुख्यमंत्री ने परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वीर सोरेन के असमय निधन केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे राज्य की अपूरणीय क्षति है। कहा कि दुःख की इस घड़ी में पूरी सरकार और राज्य की जनता शोक संतप्त परिवार के साथ खड़ी है।उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना किया। अंत्येष्टि संपन्न होने तक जिले के डीसी नीतीश कुमार सिंह, एसपी मुकेश कुमार लूणायत समेत कई प्रशासनिक और पुलिस के अधिकारी भी उक्त स्थल पर मौजूद रहे। इस दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल की तैनाती के साथ भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। इधर, वीर सोरेन के निधन से पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। निधन की खबर मिलने के बाद से ही कई घरों में चूल्हा तक नहीं जलाया गया है।

