सरकार ने रास्ता नहीं दिया, गांव ने ख़ुद बना ली सड़क
*जब विकास का रास्ता व्यवस्था नहीं खोलती, तो ग्रामीण अपने हाथों से रास्ता बनाने को मजबूर हो जाते हैं। चांडिल के खुदियाडीह में ग्रामीणों ने चंदा जुटाया, 350 फीट रास्ता बनाया*
मृत्युंजय बर्मन
राष्ट्र संवाद संवाददाता, सरायकेला
विकास की राह जब सरकारी फाइलों में अटक गई तो खुदियाडीह के ग्रामीणों ने रास्ता तलाशने के बजाय रास्ता ही बना डाला। चांडिल के चावलीबासा पंचायत स्थित गांव में ग्रामीणों ने चंदा जुटाया, निर्माण सामग्री खरीदी और श्रमदान से करीब 350 फीट सड़क तैयार कर दी। यह पहल ग्रामीणों की एकजुटता की मिसाल है, लेकिन साथ ही उस व्यवस्था पर सवाल भी है जो वर्षों बाद भी गांव की बुनियादी जरूरत पूरी नहीं कर सकी।
ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत निधि से करीब 200 फीट पीसीसी सड़क स्वीकृत हुई थी। लाभुक समिति के माध्यम से निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन बाद में सड़क को दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया गया। कई बार गुहार के बाद भी जब समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीणों ने सरकारी मदद का इंतजार छोड़ अपने स्तर पर सड़क बनाने का निर्णय लिया।
गांव मुख्य सड़क के नजदीक होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार करीब 35-40 स्कूली बच्चों को पढ़ाई के लिए डेढ़ से दो किलोमीटर दूर जाना पड़ता है और उन्हें व्यस्त चौका-पातकुम मार्ग पार करना पड़ता है। ऐसे में सड़क का सवाल सिर्फ आवागमन का नहीं, बच्चों की सुरक्षा और ग्रामीणों के सम्मानजनक जीवन से भी जुड़ा है।
अनिल बास्के, सोमचंद बास्के, रमेश हांसदा, समल सोरेन, फूलचंद टुडू, डेनियल मुर्मू, श्यामल हांसदा और रबींद्र सोरेन समेत ग्रामीणों ने निर्माण में श्रमदान किया। 350 फीट की यह सड़क छोटी जरूर है, लेकिन इसका संदेश बड़ा है, जब विकास का रास्ता व्यवस्था नहीं खोलती, तो ग्रामीण अपने हाथों से रास्ता बनाने को मजबूर हो जाते हैं।

