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    वह काली रात ‘डॉक्टर’ नें जबरन पकड़ रखा था ! मैं चीखी, भागी, लेकिन कौन सुनेगा गरीब ‘नौकरानियों का दर्द’ !

    News DeskBy News DeskNovember 6, 2025No Comments5 Mins Read
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    वह काली रात ‘डॉक्टर’ नें जबरन पकड़ रखा था ! मैं चीखी, भागी, लेकिन कौन सुनेगा गरीब ‘नौकरानियों का दर्द’ !

    मुंबई, ठाणे के वर्तकनगर इलाके से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जो न सिर्फ एक डॉक्टर की हैवानियत को उजागर करती है, बल्कि गरीबी की उस काली सच्चाई को भी नंगा कर देती है, जहां मजबूर औरतें रोजगार के नाम पर शोषण की भेंट चढ़ जाती हैं। “डॉ. श्री अनिल गर्ग” नामक एक डॉक्टर पर चार महिलाओं के साथ यौन शोषण का गंभीर आरोप लगा है। वर्तकनगर पुलिस थानें में दर्ज FIR (संख्या 800/2025) भारतीय दंड संहिता की धारा 74 और 79 के तहत दर्ज की गई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह केस सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा। या सरकार इस गरीबी की चीख को सुन पाएगी, 21 साल की महिला श्रीमती सुषमा ( बदला हुआ नाम), एक गरीब परिवार की बेटी, जो वावेट गांव (रायगढ़ जिला) की मूल निवासी हैं, आज अपनी आंसुओं भरी आपबीती बयां कर रही हैं। “मैं तो बस परिवार का पेट पालने के लिए भांडुप की दीपक एजेंसी में केयरटेकर का काम कर रही थी। छह महीने से रोज सुबह उठकर घरों में झाड़ू-पोंछा, बर्तन धोना, मालिश करना—सब कुछ। मेरी कमाई से पापा, दो बहनें और गांव का घर चलता है। लेकिन 17 जून 2025 को जब एजेंसी ने मुझे डॉक्टर अनिल गर्ग के फ्लैट हस्ता बिल्डिंग, कोरस नक्षत्र टावर) वर्तकनगर ,थानें भेजा, तो मैंने सोचा था कि यह बस एक और नौकरी है। कौन जानता था कि यह मेरी जिंदगी का सबसे काला दिन साबित होगा। सुषमा की जुबानी, शुरुआत तो सामान्य थी। डॉक्टर साहब और उनकी पत्नी प्रीति गर्ग के घर झाड़ू लगाना, बाहर घुमाने जाना, हाथ-पैर की मालिश करना—सब कुछ सहन हो गया। लेकिन 18 अक्टूबर 2025 को मालिश के बहाने अनिल गर्ग ने अपनी हैवानियत दिखाई। “उन्होंने कहा, ‘गुप्तांगों की भी मालिश करो’। मैंने मना किया, लेकिन उनकी पत्नी ने कहा, ‘वह मजबूर नहीं कर रहे’। फिर 26 अक्टूबर की वह काली रात—रात 8:30 बजे बेडरूम में गाने चला दिए, मुझे जबरन छुआ, शरीर पर गंदे हाथ फेरने की कोशिश की। मैं चीखी, भागी, लेकिन कौन सुनेगा एक गरीब नौकरानी की!”

     

     

     

    समीक्षा रोते हुए बताती हैं। काम छोड़ दिया, लेकिन तब तक तीन अन्य महिलाएं भी इसी डॉक्टर के जाल में फंस चुकी थीं। ये महिलाएं भी एजेंसी के जरिए भेजी गईं—गरीबी ने उन्हें मजबूर किया, और एक ‘डॉक्टर’ ने उन्हें शिकार बनाया। यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज की लाचारी का आईना है। डॉक्टर अनिल गर्ग—जिन्हें समाज ‘भगवान’ का दर्जा देता है—एक सम्मानित पेशे को कलंकित कर दिया। मरीजों की सेवा करने वाले हाथों से महिलाओं का शोषण. यह कैसी विडंबना है! लेकिन असली अपराधी कौन। वह गरीबी जो इन महिलाओं को एजेंसी के चंगुल में धकेल देती है, जहां कोई सुरक्षा नहीं, कोई जांच नहीं। दीपक एजेंसी जैसी संस्थाएं बिना बैकग्राउंड चेक के घरों में भेजती हैं, और शोषण होता रहता है। चार महिलाएं—सभी गरीब, सभी मजबूर। एक की कहानी सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं, तो चार की कल्पना कीजिए। और सरकार। महाराष्ट्र सरकार की महिलाओं की सुरक्षा योजनाएं—’बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ से लेकर ‘महिला हेल्पलाइन’ तक—कहां हैं? ठाणे जैसे महानगर में, जहां करोड़ों की महिलाएं घरेलू कामगार हैं, वहां श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी, स्वास्थ्य बीमा या शोषण रोकने के लिए सख्त कानून क्यों नहीं।नकेंद्र सरकार की ‘उज्ज्वला’ या ‘पीएम आवास’ जैसी स्कीम्स गरीबी मिटाने का दावा करती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गांव की बेटियां शहरों में आती हैं

     

     

    तो शोषण का शिकार बनती हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि 2024 में ही महाराष्ट्र में घरेलू कामगार महिलाओं पर यौन शोषण के 1,200 से ज्यादा मामले दर्ज हुए, लेकिन सजा के दरकारे कितने। मुश्किल से 5%! यह आंकड़े नहीं, चीखें हैं जो सरकार की नींद उड़ाने चाहिए। समीक्षा कहती हैं, “मैंने FIR दर्ज कराई, लेकिन डर लगता है। क्या न्याय मिलेगा।नया डॉक्टर साहब की ‘रसूख’ सब दबा देगी।” अन्य तीन महिलाएं भी नाम छिपाकर मीडिया के सामने आकर बोल रही हैं—गरीबी का बोझ इतना कि आवाज दब जाती है। यह घटना ठाणे की सड़कों पर गूंज रही है, लेकिन विधानसभा में बहस कब होगी। मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस और महिला एवं बाल विकास मंत्री से सवाल है—क्या इन गरीब बहनों के लिए कोई ठोस कदम उठेगा। एजेंसियों पर सख्त निगरानी, डॉक्टरों के बैकग्राउंड चेक,

     

     

    और गरीबी उन्मूलन के वास्तविक कार्यक्रम—बिना इनके, यह शोषण का चक्र चलता रहेगा। आज समीक्षा और उन चार बहनों की आंखों में आंसू हैं, लेकिन समाज की अंतरात्मा जागे तो शायद न्याय की किरण दिखे। गरीबी कोई अपराध नहीं, लेकिन इसका फायदा उठाना सबसे बड़ा पाप है। सरकार, जागिए! डॉक्टरों का सम्मान बचाइए, और इन गरीब बहनों को न्याय दीजिए। वरना, यह चीखें और तेज हो जाएंगी।

    – इंद्र यादव / स्वतंत्र लेखक,

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