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    Home » तेघड़ा श्रीकृष्ण जन्म शताब्दी महोत्सव का भव्य समापन: राजस्थानी कालबेलिया नृत्य ने बिखेरा लोकसंस्कृति का रंग, 2027 में राजकीय मेले की घोषणा
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    तेघड़ा श्रीकृष्ण जन्म शताब्दी महोत्सव का भव्य समापन: राजस्थानी कालबेलिया नृत्य ने बिखेरा लोकसंस्कृति का रंग, 2027 में राजकीय मेले की घोषणा

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 9, 2026No Comments3 Mins Read
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    तेघड़ा श्रीकृष्ण जन्म शताब्दी महोत्सव
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    लेखक: राष्ट्र संवाद ब्यूरो

    तेघड़ा श्रीकृष्ण जन्म शताब्दी महोत्सव का चार दिवसीय आयोजन मंगलवार रात गौशाला परिसर में भव्य समापन के साथ संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक महोत्सव ने आस्था, संस्कृति और लोककला के अनूठे संगम से मथुरा-वृंदावन के बाद एशिया के प्रमुख श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आयोजनों में तेघड़ा की पहचान को नई ऊंचाई प्रदान की है।

    तेघड़ा श्रीकृष्ण जन्म शताब्दी महोत्सव का मंगलवार रात गौशाला परिसर में भव्य समापन हुआ। चार दिनों तक चले इस महोत्सव में आस्था, संस्कृति और लोककला का ऐसा संगम बना कि मथुरा-वृंदावन के बाद एशिया के प्रमुख श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आयोजनों में तेघड़ा की पहचान को इस आयोजन ने नई ऊंचाई दी।

    जिला प्रशासन, कला-संस्कृति विभाग और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेला समिति के संयुक्त तत्वावधान में हुए समापन समारोह के मुख्य अतिथि बिहार सरकार के मंत्री विजय सिन्हा रहे। समिति अध्यक्ष अरुण साहू ने अध्यक्षता की, जबकि डॉ. कुंदन कुमार ने संचालन किया।

    राजस्थान की कालबेलिया ने बांधा समां

    समापन की सांस्कृतिक शाम में जैसलमेर के खाटू सपेरा कालबेलिया दल ने राजस्थान की लोकसंस्कृति को मंच पर जीवंत कर दिया। पारंपरिक वेशभूषा, लोकवाद्यों की थाप और लयबद्ध कालबेलिया नृत्य ने पंडाल में मौजूद हजारों दर्शकों को देर तक बांधे रखा। कलाकारों की घूमती लय और चपल कदमों के साथ राजस्थान की लोकपरंपरा का रंग तेघड़ा के मंच पर उतर आया। स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों ने भी समापन समारोह को प्रभावी बनाया।

    मुख्य अतिथि मंत्री विजय सिंह ने कहा कि सौ वर्ष पुरानी सांस्कृतिक परंपरा तेघड़ा की ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। इस सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सरकार सहयोग करेगी।

    संयोजक सह विधायक रजनीश कुमार ने कहा कि शताब्दी महोत्सव ने तेघड़ा की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई दी है। उद्घाटन समारोह में कला-संस्कृति विभाग के मंत्री प्रमोद कुमार ने महोत्सव को सरकारी कैलेंडर में शामिल करते हुए 11 लाख रुपए का सहयोग दिया। वर्ष 2027 में इसे राजकीय मेला घोषित किए जाने की घोषणा भी की। जिलाधिकारी रिची पांडेय और एसडीओ नीरज कुमार सिन्हा के प्रशासनिक नेतृत्व में महोत्सव का आयोजन संपन्न हुआ।

    कार्यकारी अध्यक्ष सुरेश प्रसाद रोशन ने कहा कि जनसहभागिता, समिति की सक्रियता और प्रशासन के सहयोग से महोत्सव को व्यापक स्वरूप मिला। सचिव विकास कुमार ने आयोजन की सफलता में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से योगदान देने वाले प्रशासनिक अधिकारियों, समिति सदस्यों, कलाकारों, स्वयंसेवकों और श्रद्धालुओं को साधुवाद दिया।

    समारोह में कला-संस्कृति विभाग के पदाधिकारी श्याम कुमार सहनी, उपाध्यक्ष शिव कुमार केजरीवाल, गोपाल सिंह, पूर्व विधायक ललन कुंवर, सचिव विकास कुमार सहित समिति के पदाधिकारी और सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद थे।

    तेघड़ा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की परंपरा सौ वर्षों से चली आ रही है। यह महोत्सव प्रति वर्ष भव्य रूप से मनाया जाता है, जिसमें दूर-दराज से श्रद्धालु आते हैं। इस वर्ष शताब्दी वर्ष होने के कारण इसका आयोजन विशेष स्तर पर किया गया। जिला प्रशासन और कला-संस्कृति विभाग के संयुक्त प्रयासों ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। स्थानीय जनता की सहभागिता और कलाकारों के उत्साह ने महोत्सव को यादगार बना दिया।

    इस प्रकार तेघड़ा श्रीकृष्ण जन्म शताब्दी महोत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया बल्कि लोककला और संस्कृति के संरक्षण में भी मील का पत्थर साबित हुआ। बिहार सरकार के सहयोग और स्थानीय जनभागीदारी से इस आयोजन ने भविष्य में राजकीय मेला के रूप में और भव्य स्वरूप लेने का संकेत दिया है। अधिक जानकारी के लिए बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

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