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    Home » पूर्वी सिंहभूम के एकलव्य विद्यालय के 20 शिक्षकों का सेवा विस्तार नहीं होने से एवं वेतन नहीं मिलने से शिक्षक बेहाल। आदिवासी बच्चों की पढ़ाई में हो बाधित।
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    पूर्वी सिंहभूम के एकलव्य विद्यालय के 20 शिक्षकों का सेवा विस्तार नहीं होने से एवं वेतन नहीं मिलने से शिक्षक बेहाल। आदिवासी बच्चों की पढ़ाई में हो बाधित।

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarJune 21, 2026Updated:June 21, 2026No Comments4 Mins Read
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    पूर्वी सिंहभूम के एकलव्य विद्यालय के 20 शिक्षकों का सेवा विस्तार नहीं होने से एवं वेतन नहीं मिलने से शिक्षक बेहाल। आदिवासी बच्चों की पढ़ाई में हो बाधित।

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    जादूगोड़ा एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों की किस्मत जिले-दर-जिले बदल रही है। पश्चिमी सिंहभूम में जहां 43 अतिथि शिक्षकों को सेवा विस्तार की सौगात मिली है, वहीं पूर्वी सिंहभूम के 20 शिक्षक चार महीने से वेतन और सेवा विस्तार दोनों के लिए भटक रहे हैं। आर्थिक तंगी से जूझ रहे इन शिक्षकों का कहना है- “एक ही योजना, एक ही काम, फिर हमारे साथ सौतेला व्यवहार क्यों?”

    प. सिंहभूम ने दिखाई राह, पू. सिंहभूम में सन्नाटा
    शनिवार को चाईबासा समाहरणालय सभागार में DC मनीष कुमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय एकलव्य विद्यालय समिति की बैठक हुई। इसमें जिले के एकलव्य स्कूलों में कार्यरत सभी 43 अतिथि शिक्षकों के सेवा विस्तार प्रस्ताव को सर्वसम्मति से हरी झंडी दे दी गई। इस फैसले से शिक्षकों में खुशी है।

    इसके उलट पूर्वी सिंहभूम के एकलव्य विद्यालयों में गहरा सन्नाटा है। धालभूमगढ़, डुमरिया और पोटका स्थित तीन एकलव्य विद्यालयों के कुल 20 अतिथि शिक्षक महीनों से सेवा विस्तार के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। सबसे बड़ी मार यह कि इन शिक्षकों को जनवरी, फरवरी, मार्च और अप्रैल- यानी पूरे चार महीने का वेतन भी नहीं मिला है।

    “रांची तक दौड़ लगा चुके, अब बच्चों का स्कूल छुड़वाने की नौबत”
    नाम न छापने की शर्त पर पोटका एकलव्य विद्यालय के एक शिक्षक ने भास्कर को बताया, “साहब, चार महीने से घर कैसे चल रहा है हम ही जानते हैं। उधार मांग-मांग कर थक गए। बच्चों की फीस नहीं भर पा रहे। सेवा विस्तार के लिए DC कार्यालय के दर्जनों चक्कर लगा चुके। 10-12 शिक्षक रांची मुख्यालय तक जाकर गुहार लगा आए, पर वहां से भी सिर्फ आश्वासन मिला।”

    एक अन्य महिला शिक्षिका ने रुंधे गले से कहा, “हमसे कहा जाता है कि आप आदिवासी बच्चों का भविष्य बना रहे हैं। पर हमारा भविष्य कौन देखेगा? वेतन नहीं मिलने से मानसिक रूप से टूट चुके हैं। मकान मालिक किराया मांग रहा है, राशन वाले ने उधार देना बंद कर दिया।”

    एक ही योजना, दो तरह का नियम?
    शिक्षकों का सबसे बड़ा सवाल यही है। पश्चिमी सिंहभूम में जब समिति की बैठक कर एक दिन में फैसला हो सकता है, तो पूर्वी सिंहभूम में फाइल क्यों अटकी है? शिक्षकों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की सुस्ती का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।

    “हम भी उसी NESTS के तहत काम कर रहे हैं, उसी सिलेबस से पढ़ा रहे हैं। फिर पश्चिमी सिंहभूम के शिक्षकों को राहत और हमें मायूसी क्यों?” एक शिक्षक ने सवाल उठाया।

    क्या कहते हैं आंकड़े
    पश्चिमी सिंहभूम: 43 अतिथि शिक्षक, सेवा विस्तार मंजूर
    पूर्वी सिंहभूम: 20 अतिथि शिक्षक, सेवा विस्तार लंबित + 4 माह का वेतन बकाया
    प्रभावित स्कूल: एकलव्य विद्यालय धालभूमगढ़, डुमरिया, पोटका

    अब निगाहें अगली बैठक पर
    पश्चिमी सिंहभूम के फैसले के बाद पूर्वी सिंहभूम के शिक्षकों को उम्मीद बंधी है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और जिला स्तरीय एकलव्य समिति की अगली बैठक पर टिकी हैं। शिक्षकों ने DC से जल्द बैठक बुलाकर पश्चिमी सिंहभूम की तर्ज पर सेवा विस्तार और बकाया वेतन जारी करने की मांग की है।
    अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो शिक्षकों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। एक शिक्षक ने कहा, “पेट खाली हो तो ब्लैकबोर्ड पर क्या लिखेंगे? मजबूरी में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।”
    वहीं शिक्षकों की कमी के कारण अब परिजन भी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं बच्चों को हॉस्टल भेज दिए हैं लेकिन पढ़ाई नहीं हो पा रही। ।
    इस मामले में एकलव्य विद्यालय डुमरिया की प्रिंसिपल मधुलिका कुमारी का कहना है कि सभी शिक्षकों को बुलाने का आदेश हुआ है एक-दो दिन में सेवा विस्तार में साइन भी हो जाएगा।

    पूर्वी सिंहभूम के एकलव्य विद्यालय के 20 शिक्षकों का सेवा विस्तार नहीं होने से एवं वेतन नहीं मिलने से शिक्षक बेहाल। आदिवासी बच्चों की पढ़ाई में हो बाधित।
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