टाटा स्टील ने सुकिंदा में सस्टेनेबल माइनिंग के लिए नेक्स्टजेन वाटर मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी तैनात की
उन्नत शोधन संयंत्र और डिजिटल मॉनिटरिंग से जिम्मेदार जल प्रबंधन को नई दिशा
राष्ट्र संवाद संवाददाता
सुकिंदा (ओडिशा), 25 फरवरी 2026। वैश्विक जल संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच टाटा स्टील ने जाजपुर जिले के सुकिंदा क्षेत्र में जिम्मेदार खनन को सुदृढ़ करने के लिए उन्नत जल प्रबंधन तकनीकों की तैनाती की है। कंपनी ने जल प्रदूषण नियंत्रण, संसाधनों के संरक्षण और समुदाय के स्वास्थ्य की सुरक्षा के उद्देश्य से एकीकृत शोधन प्रणालियाँ और स्मार्ट मॉनिटरिंग टूल्स लागू किए हैं।

सुकिंदा क्रोमाइट माइन में 4,500 केएल प्रति घंटा क्षमता वाला अत्याधुनिक एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) स्थापित किया गया है, जो औद्योगिक अपशिष्ट जल और सतही बहाव का उपचार कर सुरक्षित पुनः उपयोग या मानकों के अनुरूप निर्वहन सुनिश्चित करता है। वहीं सरुआबिल क्रोमाइट माइन में 1,200 केएल प्रति घंटा क्षमता का नया ईटीपी शुरू किया गया है, जो पहले से संचालित 380 केएल प्रति घंटा इकाई को सुदृढ़ करता है। शोधित जल का उपयोग बागवानी और धूल नियंत्रण में किया जा रहा है तथा यह ओडिशा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (OSPCB) के मानकों के अनुरूप है।
कंपनी ने सरुआबिल और कमार्दा माइंस में 50 घन मीटर प्रति घंटा क्षमता वाले ऑनसाइट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) की स्थापना की पहल भी की है। इसके साथ ही आईओटी सेंसर, ऑटोमेशन और डेटा एनालिटिक्स आधारित स्मार्ट वाटर मैनेजमेंट सिस्टम से जल प्रवाह और खपत की रियल-टाइम निगरानी की जा रही है।
सेंसर आधारित जल गुणवत्ता विश्लेषण के आंकड़ों का सत्यापन NABL मान्यता प्राप्त तृतीय पक्ष प्रयोगशाला से कराया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है। फ्लक्स जेन सस्टेनेबल टेक्नोलॉजीज के सहयोग से पूरे जल चक्र का डिजिटलीकरण कर डेटा को मोबाइल और वेब डैशबोर्ड पर उपलब्ध कराया गया है।
टाटा स्टील के फेरो एलॉयज़ एंड मिनरल्स डिवीजन (FAMD) के एग्जीक्यूटिव-इन-चार्ज ने कहा कि जल संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है और उन्नत तकनीकों में निवेश से कंपनी अपने समुदायों के सतत भविष्य के प्रति प्रतिबद्ध है।
इन पहलों के माध्यम से टाटा स्टील सुकिंदा में सस्टेनेबल माइनिंग और जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन के नए मानक स्थापित कर रही है।

