लेखक: मृत्युंजय बर्मन
टाटा संस में सत्ता-संतुलन पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है क्योंकि टाटा समूह में नेतृत्व को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल से आगे बढ़कर टाटा संस के शासन, बोर्ड के अधिकार और संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग तक पहुंच गया है। टाटा संस के निदेशक मंडल ने 17 सितंबर को चंद्रशेखरन को कार्यकारी चेयरमैन के रूप में अगले पांच वर्षों के लिए फिर नियुक्त करने का फैसला किया, लेकिन टाटा ट्रस्ट्स ने इस निर्णय की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे कानूनी रूप से अमान्य बताया है। घटनाक्रम का असर शुक्रवार को टाटा समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों पर भी दिखा और समूह का संयुक्त बाजार मूल्य करीब 38,361 करोड़ रुपये घट गया।
टाटा संस में सत्ता-संतुलन पर बड़ा सवाल: चंद्रशेखरन के कार्यकाल पर विवाद
टाटा संस के मुताबिक, चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को अगली अवधि के लिए खुद को उपलब्ध नहीं कराने का निर्णय लिया था। हालांकि बोर्ड के अनुरोध पर उन्होंने अपने फैसले पर पुनर्विचार किया और इसके बाद बोर्ड ने बहुमत से उनके पांच साल के नए कार्यकाल को मंजूरी दी। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना है।
टाटा ट्रस्ट्स का विरोध और कानूनी राय
टाटा ट्रस्ट्स ने अपने बयान में कहा कि 12 अगस्त का निर्णय स्वीकार किया जा चुका था। ट्रस्टों के अनुसार, टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के तहत चेयरमैन की नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति में टाटा ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों की सहमति आवश्यक है। ट्रस्ट चेयरमैन नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। ट्रस्टों ने अपने पक्ष के समर्थन में पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ से प्राप्त कानूनी राय का भी हवाला दिया है। यह अदालत का फैसला नहीं, बल्कि ट्रस्टों द्वारा प्राप्त कानूनी राय है।
लिस्टिंग पर मतभेद और आरबीआई का दबाव
विवाद का दूसरा प्रमुख मुद्दा टाटा संस की संभावित लिस्टिंग है। टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि उसने लिस्टिंग के लिए सहमति नहीं दी है और अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए। वहीं, आरबीआई के नियामकीय ढांचे के कारण टाटा संस पर लिस्टिंग का दबाव बना हुआ है। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की सामूहिक हिस्सेदारी करीब 66 प्रतिशत है। भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार, ऊपरी परत की एनबीएफसी को सूचीबद्ध होना आवश्यक है।
बाजार पर असर: मिलीजुली प्रतिक्रिया
शुक्रवार को टीसीएस में 3.88 प्रतिशत, टाटा केमिकल्स में 11.04 प्रतिशत और टाटा स्टील में 0.93 प्रतिशत गिरावट रही। हालांकि टाटा केपिटल, टाटा पावर और टाटा मोटर्स में तेजी दर्ज हुई। ऐसे में बाजार की प्रतिक्रिया भी एकरूप नहीं रही है।

