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    गेवरा प्रोजेक्ट में छीन गई 54 कर्मियों की संडे ओटी और पीएचडी सुविधा,प्रभावी नेताओं पर कृपा बरकरार

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarAugust 28, 2025Updated:August 28, 2025No Comments4 Mins Read
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    गेवरा प्रोजेक्ट में छीन गई 54 कर्मियों की संडे ओटी और पीएचडी सुविधा,प्रभावी नेताओं पर कृपा बरकरार

    राष्ट्र संवाद ब्यूरो कमाल अहमद

    कार्मिक विभाग के बजाय एचआर ने जारी किया आदेश

    गेवरा/कोरबा:- साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के गेवरा क्षेत्र अंतर्गत गेवरा प्रोजेक्ट में कामकाज के अपने नियम हैं और इस बारे में उपर के अधिकारियों को भी कोई लेना-देना नहीं। शायद इसीलिए नीचे के अधिकारी अपने हिसाब से काम कर रहे हैं। एक आदेश के अंतर्गत इस प्रोजेक्ट के अलग-अलग स्थान पर काम कर रहे 54 कर्मियों की वे सुविधाएं छीन ली गई है जो संडे, ओवरटाइम और पेड हॉलीडे से जुड़ी हुई हैं। लेकिन विडंबना यह है कि प्रबंधन ने यूनियनों के पदेन पदाधिकारियों यानि प्रभावी नेताओं पर कृपा दृष्टि बनाए रखी है। उन्हे यह सुविधा मिलती रहेगी।

    गेवरा क्षेत्र में नियम कायदों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं और एक बार फिर नया मामला सामने आया है। खबर के अनुसार प्रबंधन ने यहां एक आदेश के अंतर्गत कुल 54 कर्मचारियों को संडे ड्यूटी के अलावा ओटी और पीएचडी अब अपात्र घोषित कर दिया है और इसे अमल में लेने की बात कही है। एसईसीएल गेवरा परियोजना के प्रबंधक द्वारा इस बारे में एक आदेश संख्या 8302025 जारी किया गया है जिसे सक्षम अधिकारी द्वारा अनुमोदित होने का दावा किया गया। इसमें कहा गया कि मुख्यालय बिलासपुर के पत्र क्रमांक 152/16 अप्रैल 2015 के अनुपालन में यह व्यवस्था बनाई जा रही है। इसके अनुसार ऐसे कामगार जो अपना मूल जॉब छोडक़र लाइट जॉब या वैकल्पिक जॉब कर रहे हैं उन्हें उपरोक्त अतिरिक्त लाभ वाली ड्यूटी नहीं दी जाएगी। इनमें वेस्ट एमटीके के अलग-अलग श्रेणी के 15 कर्मचारी शामिल हैं। वर्कशॉप एमटीके के 17 कर्मचारी इस व्यवस्था से प्रभावित किए गए हैं,

    जबकि ईस्ट एमटीके से 8 कर्मचारी उपरोक्त आर्थिक फायदे वाली सुविधाओं से अगले समय तक के लिए वंचित किए गए हैं। जबकि साइलो एमटीके के 14 कर्मचारियों के नाम इस सूची में शामिल किया गया है। जानकार सूत्रों ने दावा किया कि अपने लोगों को बचाने के लिए कतिपय यूनियनों के द्वारा इस तरह की व्यवस्था के लिए काम कराया गया है ताकि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे। कहा जा रहा है कि अभी भी बहुत सारे ऐसे कर्मी हैं जिन्हें बड़े नेताओं ने हल्के स्तर का जॉब उपलब्ध करा दिया है ताकि उन्हें काम करने में आसानी हो और वे अतिरिक्त सुविधाएं भलीभांति प्राप्त करते रहे। वहीं बदली व्यवस्था के बावजूद सुविधाओं की कटौती के मामले में ट्रेड यूनियन की नेतागिरी करने वाले पदेन प्रतिनिधियों या उनके खास शागीर्दों को बक्क्ष दिया गया है, यानि वे पहले की तरह अभी भी सुविधा का लाभ लेने के मामले में अग्रणी रहेंगे।

    सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि सामान्य तौर पर जब कभी कर्मचारियों के सेक्शन बदले जाते हैं या कामकाज को लेकर किसी प्रकार के परिवर्तन होते हैं तो ऐसे आदेश कार्मिक विभाग जारी करता है। लेकिन विशेष कारणों से इस आदेश को डिप्टी जीएम के रूचि से जारी कराया गया है।

    इन श्रेणियों के कर्मी प्रभावित

    सूची का अवलोकन करने से मालूम चलता है कि प्रभावित कर्मचारियों में डोजर ऑपरेटर, सॉवेल ऑपरेटर, केबलमेन, असिस्टेंट फोरमेन, ड्राइवर, ईपी इलेक्ट्रिशियन, डंपर ऑपरेटर, ड्रील ऑपरेटर, पे लोडर, क्रेन ऑपरेटर, लॉरी क्लीनर, फीडर ब्रेकर ऑपरेटर, मेकेनिकल फीटर, अस्सिटेंट लोडिंग ऑपरेटर, एसपीडीटी, मेकेनिकल फीटर हेल्पर, कन्वेयर ऑपरेटर और जनरल मजदूर जैसी श्रेणी वाले कर्मी को शामिल किया गया है।

     

     

    कुछ यूनियनों ने किया आपत्ति

    खबरों के अनुसार गेवरा परियोजना में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के आर्थिक हितों पर कुठाराघात करने वाली इस व्यवस्था को लेकर विरोध के स्वर बुलंद हो रहे हैं। जानकारी मिली है कि कोयला उत्पादन और बेहतर कार्य संस्कृति पर भरोसा रखने वाली कुछ यूनियनों ने इस मामले में आपत्ति जताई है। उनके द्वारा इस बारे में हेड क्वाटर के साथ-साथ कोयला मंत्रालय से लेकर कोल इंडिया तक शिकायत करने की मानसिकता बनाई जा रही है।

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