बांग्लाभाषी उन्नयन समिति का राज्य सम्मेलन जमशेदपुर संपन्न
राष्ट्र संवाद संवाददाता
झारखण्ड बांग्लाभाषी उन्नयन समिति के राज्य सम्मेलन का आयोजन रविवार को जमशेदपुर के होटल मिस्टी इन में संपन्न हुआ l इसमें प्रदेश भर के सभी जिलों के बांग्लाभाषी संगठन के प्रतिनिधि शामिल हुए l झारखण्ड में बांग्ला भाषा एवं बांग्ला भाषियों के अस्तित्व को मिटाने की कोशिश हो रही है उस पर विस्तृत चर्चा हुई एवं आगे की रणनीति निर्धारित किया गया।
इस आशय की जानकारी एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से देते हुए झारखण्ड बांग्लाभाषी उन्नयन समिति के प्रदेश सयुक्त सचिव काबू दत्ता ने कहा कि झारखण्ड ऐतिहासिक एवं भौगोलिक रूप से बांग्ला भाषा बहुल राज्य है। प्रदेश के चौबीस में से 16 जिलों में बांग्ला ही प्रमुख सम्पर्क भाषा है।परन्तु झारखण्ड गठन के बाद से पिछले पच्चीस वर्षों में प्रदेश की सभी सरकारों ने बांग्ला भाषा एवं बांग्ला भाषियों के अस्तित्व को मिटाने का ही कूट षडयंत्र किया है। आज प्रदेश के बांग्लाभाषियों से उनकी मातृभाषा को ही छीनने की कोशिश हो रही है,जिसे प्रदेश के एक करोड़ तीस लाख बांग्ला भाषी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। झारखण्ड गठन के बाद से ही पिछली सरकारों ने बांग्ला में पठन पाठन को बन्द करने के उद्देश्य से बांग्ला में पाठ्य पुस्तकों की आपूर्ति बन्द कर दी, बांग्ला भाषी शिक्षकों की नियुक्ति को भी बन्द कर दिया गया,जिसका परिणाम यह हुआ कि स्कूलों में बांग्ला भाषी छात्रों की संख्या घटने लगी, स्कूलों से ड्रॉप आउट की संख्या बढ़ गई,फिर उन सोलह हजार स्कूलों को बन्द कर दिया गया,जहां छात्र कम थे और इस सबका सीधा प्रभाव प्रदेश के बांग्लाभाषी छात्रों पर ही पड़ा। अब आज प्रदेश के शिक्षा मंत्री कहते हैं कि पहले छात्र लाइए फिर पुस्तक एवं शिक्षक देंगे। पिछले पच्चीस वर्षों से सरकार के गलत नीति एवं निर्णय के कारण जो स्थिति उत्पन्न हुई है उसका खामियाजा समाज क्यों उठाएगा? शिक्षा मंत्री सारी वस्तु स्थिति से पूर्ण रूपेण अवगत हैं,फिर भी संवैधानिक पद पर रहते हुए उनके इस प्रकार के गैर जिम्मेदाराना बयान से प्रदेश का बांग्लाभाषी समाज क्षुब्ध है
सम्मेलन में इन्हीं विषयों पर पूरे प्रदेश भर से जुटे बांग्लाभाषी संगठनों के द्वारा विचार विमर्श किया गया और सभी पहलुओं पर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। अभी पूरे प्रदेश में 19 मई से बांग्ला जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है।यह अभियान प्रदेश के 150 प्रखंडों के पच्चीस हजार गांवों में चलाया जाएगा।

