Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » मथुरा में स्पेशल डीजीसी श्रीमती अलका उपमन्यु ने रचा सजा कराने का इतिहास
    Breaking News Headlines अपराध उत्तर प्रदेश खबरें राज्य से झारखंड बिहार राष्ट्रीय

    मथुरा में स्पेशल डीजीसी श्रीमती अलका उपमन्यु ने रचा सजा कराने का इतिहास

    कैदी ही नहीं ब्रजबासी बोलते हैं फांसी बाली मैडम
    Devanand SinghBy Devanand SinghFebruary 11, 2025No Comments5 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    मथुरा में स्पेशल डीजीसी श्रीमती अलका उपमन्यु ने रचा सजा कराने का इतिहास

    चार फांसी, 42 केसों में आजीवन एवं कठोर सजा, डेढ़ सौ से अधिक केसों में त्वरित कराए निर्णय

    देश की नंबर वन सरकारी अधिवक्ता बनी अलका उपमन्यु

    कैदी ही नहीं ब्रजबासी बोलते हैं फांसी बाली मैडम

    राष्ट्र संवाद संवाददाता
    मथुरा से गौतम की रिपोर्ट
    मथुरा। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ सरकार की संतुति पर उत्तर प्रदेश शासन की महामहिम राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन द्वारा नियुक्त मथुरा में पॉक्सो न्यायालय में स्पेशल डीजीसी श्रीमती अलका उपमन्यु एडवोकेट द्वारा अपने सवा चार साल के कार्यकाल में ऐतिहासिक निर्णय कराकर देश की पहली सरकारी अधिवक्ता के वन गयी है, जेल के कैदी ही नहीं अब तो बृजवासी भी उन्हें फांसी वाली मैडम बोलने लगे हैं
    डीजीसी श्रीमती अलका उपमन्यु एडवोकेट ने अपने सवा चार साल के कार्यकाल के अंदर ऐतिहासिक निर्णय कराए है, इसके लिए उन्हें उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख गृह सचिव एवं डीजीपी द्वारा पुलिस मेडल एवं प्रशस्ति पत्र तथा अभियोजन विभाग के डीजीपी, एवं कमिश्नर अपर पुलिस महानिदेशक डीआईजी डी एम द्वारा प्रशस्ति पत्र भी देकर उनके कार्य की भूरि भूरि प्रशंसा भी की है, यही नहीं उन्हें लगातार दो बार से गणतंत्र दिवस की परेड में सरकार के कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण सिंह द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर के सम्मानित किया गया है वहीं जिले की सांसद श्रीमती हेमा मालिनी द्वारा भी प्रशस्ति पत्र देकर उनके कार्य की प्रशंसा की गई है।

     

    प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पॉक्सो न्यायालय में स्पेशल डीजीसी पद पर तैनात श्रीमती अलका उपमन्यु एडवोकेट ने एक फांसी की सजा घटित घटना के कोर्ट के 22 वे वर्किंग डे में दूसरी फांसी की सजा 35 दिन में और तीसरी फांसी की सजा 42 दिन में और चौथी फांसी की सजा 14 महीने में कराई है जो देशभर में अभियोजन विभाग में एक इतिहास है यही नहीं 42 घटनाओं में अपराधियों को आजीवन एवं कठोर सजा कराई तथा जो लोग पहले रिपोर्ट दर्ज करा देते हैं और फिर समझौता कर लेते हैं और कोर्ट में आकर अपने बयान से मुकर जाते हैं ऐसे डेढ़ सौ से अधिक केसों में 22 पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत जुर्माना आदि की सजा करा कर सरकार को लाखों का राजस्व जमा कराया है।

    कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन मैंने हार नहीं मानी

    मथुरा के पॉक्सो न्यायालय में स्पेशल डीजीसी पद पर तैनात श्रीमती अलका उपमन्यु ने अपने सवा चार साल के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसले के साथ कुल 260 मामलो को निस्तारण करने में अपनी अहम भूमिका निभाई है,उन्होंने चार मामली में दोषियों को फांसी की सजा दिलवाई, जिनमें से एक फैसले को जहां उन्होंने मात्र 22 कार्य दिवसों में सुनिश्चित किया, वहीं 32 दिन में दूसरी 42 दिन में तीसरी और 14 महीने में चौथी फांसी की सजा दिलाई। इसके अलावा उन्होंने 42 से अधिक मामलों में दोषियों को आजीवन एवं कठोर सजा दिलवाई, जिसमें 14 आजीवन के मामलों में यह सुनिश्चित किया गया कि वे अपनी अंतिम सास तक जेल में ही रहे उन्होंने डेढ़ सौ से अधिक मामलों में, जहां पीड़ित पक्ष पहले रिपोर्ट दर्ज करवाकर समाहौता करने की कोशिश पर 22 पॉक्सो एक्ट के तहत सजा और जुर्माने को सुनिश्चित किया, जिससे सरकार को लाखों रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। इस इंटरव्यू में उन्होंने अपने करियर, चुनौतियों और न्याय व्यवस्था से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
    सरकारी वकील अलका उपमन्यु से विशेष बातचीत:

    आपने वकालत के क्षेत्र में आने
    का फैसला कब और क्यों लिया?

    जब मैंने वकालत को अपने करियर के रूप में चुनने का फैसला किया, उस समय समाज में वकालत की तुलना में बीएड (शिक्षण) की पढ़ाई को अधिक प्राथमिकता दी जाती थी। लोग सरकारी अध्यापक बनने को ज्यादा बेहतर मानते थे लेकिन मेरी रुचि हमेशा कुछ अलग और चुनौतीपूर्ण करने की रही। में समाज में न्याय दिलाने की प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहती थी इसलिए मैंने कानून की पढ़ाई करने का निर्णय लिया।

    एक महिला वकील के रूप में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

    वकालत का क्षेत्र पुरुष प्रधान माना जाता है और एक महिला के रूप में यहां अपनी जगह बनाना आसान नहीं था। जब मैंने इस क्षेत्र में कदम रखा, तब महिलाओं को ज्यादा मौके नहीं मिलते थे। समाज में यह धारणा थी कि कठिन और गंभीर आपराधिक मामलों को पुरुष वकील ही बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं। शुरुआत में मुझे भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन मैंने हार नहीं मानी।

    आज की न्याय व्यवस्था में सबसे बड़ी खामी क्या है और इसमें क्या सुधार होने चाहिए?

    न्याय व्यवस्था में सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई फरियादी दबाव या लालच में आकर अपने बयान से पलट जाते हैं। जब ऐसा होता है तो अभियोजन पक्ष की पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है। अपराधी बच निकलते है और समाज में अपराध बढ़ता है। मैंने ऐसे डेढ़ सौ से अधिक मामलों में जहां फरियादी अपने बयान से पलट गए, उनके खिलाफ कार्रवाई सहित 22 पॉक्सो एक्ट के तहत सजा और आर्थिक दंड की कार्रवाई कराई है

    मथुरा में स्पेशल डीजीसी श्रीमती अलका उपमन्यु ने रचा सजा कराने का इतिहास
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleसुरक्षित इंटरनेट दिवस के अवसर पर एसजीएसवाई सभागार में कार्यशाला का हुआ आयोजन
    Next Article उपायुक्त आंजनेयुलु दोड्डे की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में महाशिवरात्रि तैयारी को लेकर बैठक आयोजित की गई

    Related Posts

    भाजपा में बवाल: कदमा मंडल अध्यक्ष नियुक्ति पर 44 BLA-2 का इस्तीफा

    June 4, 2026

    गिरती पत्रकारिता: आईना कब तक तोड़ोगे!

    June 4, 2026

    मालवीय नगर अग्निकांड: 21 मौतों का जिम्मेदार कौन?

    June 4, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    भाजपा में बवाल: कदमा मंडल अध्यक्ष नियुक्ति पर 44 BLA-2 का इस्तीफा

    गिरती पत्रकारिता: आईना कब तक तोड़ोगे!

    मालवीय नगर अग्निकांड: 21 मौतों का जिम्मेदार कौन?

    मेघालय से विश्व पर्यावरण दिवस: प्रकृति-प्रेमी जीवनशैली

    पर्यावरणीय संकट: समाधान की ओर बढ़ते कदम

    क्या बेलपत्र डेंटल क्लिनिक कानून से ऊपर है? या स्वास्थ्य विभाग ने आंखें मूंद रखी हैं?

    राखा कॉपर प्लांट विस्तार पर बवाल: पेड़ कटाई से भड़के ग्रामीण, ग्रामसभा ने रुकवाया काम

    एमजीएम अस्पताल को जल्द मिलेगी निर्बाध पेयजल आपूर्ति, उपायुक्त ने निर्माणाधीन वाटर टावर का किया निरीक्षण

    अखिल भारतीय लोधी क्षत्रिय महासभा और आलोक संस्था की बैठक, सामाजिक उत्थान पर हुई चर्चा

    चालान विवाद पर बवाल: युवक ने एसएसपी कार्यालय पहुंच जताया विरोध, वायरल वीडियो से बढ़ी हलचल

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.