यूसिल में रोटेशन नीति पर गंभीर सवाल,परचेज से सीएमडी कार्यालय तक वर्षों से जमे अधिकारी, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा सिस्टम?
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा : यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसिल) में लंबे समय से पदस्थापना, रोटेशन नीति की अनदेखी और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कंपनी के भीतर ऐसे कई अधिकारी हैं, जो साल-दर-साल, बल्कि दशक-दर-दशक एक ही पद पर बने हुए हैं—जिससे यूसिल के रोटेशन नियम, डीएई गाइडलाइन और C&AG के मानकों पर बड़े प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन अधिकारियों के खिलाफ पहले भी शिकायतें की जा चुकी हैं, जिनमें से एक शिकायत तो राष्ट्रपति सचिवालय तक पहुँची थी, और उसके आधार पर कुछ कार्रवाईयों की शुरुआत भी हुई थी। इसके बावजूद कुछ अधिकारी आज भी उसी पद पर जमे हुए हैं, जिससे अन्य अधिकारियो और कर्मचारियों में गहरी नाराज़गी है।
परचेज विभाग में 18 वर्षों से तैनात प्रवीण कुमार पाल संवेदनशील विभाग में इतनी लंबी पोस्टिंग पहली बार अधिकारियो व यूनियनों के अनुसार परचेज विभाग जैसे अति संवेदनशील विभाग में टेंडर, खरीद, क्वालिटी, स्टॉक,सप्लाई जैसे पूरे सिस्टम पर नियंत्रण होता है। ऐसे विभाग में सीपीएसयू नियमों के अनुसार अधिकतम 2–3 वर्ष से अधिक किसी अधिकारी को नहीं रखा जा सकता। लेकिन प्रवीण कुमार पाल लगभग 18 वर्षों से इसी विभाग में तैनात हैं।
अधिकारियो और कर्मचारियों की शिकायत खरीद में महंगी दरें, बार-बार एक ही सप्लायर को लाभ, फर्जी कोटेशन,सामग्री की गुणवत्ता पर प्रश्न, स्टोन चिप्स, बालू और स्टील की खरीद में अनियमितताओं की आशंका।
इन मामलों को लेकर पहले भी कई आंतरिक शिकायतें हुई हैं, लेकिन पोस्टिंग बदली नहीं गई। सीएमडी के पीए सुरोजित दास लगातार लगभग 20 वर्षों से एक ही पद पर बने रहना नियम के विपरीत है। यूसिल के सीएमडी कार्यालय में पर्सनल असिस्टेंट सुरोजित दास लगातार लगभग 20 वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत हैं। इस दौरान कई सीएमडी बदल गए, लेकिन उनकी पोस्टिंग नहीं बदली।
क्यों बड़ा मुद्दा है
डीएई गाइडलाइन कहती है, किसी भी महत्वपूर्ण पद पर लंबे समय तक एक ही कर्मचारी की पोस्टिंग प्रशासनिक पारदर्शिता के खिलाफ है।
रोटेशन नीति को सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
सीएमडी का पीए पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि वहां से गोपनीय पत्राचार,अपॉइंटमेंट,प्रशासनिक नोटिंग, सीएमडी के आदेशों का क्रियान्वयन सब नियंत्रित होता है। कर्मचारियों का आरोप है कि इतने वर्षों से एक ही पद पर बने रहना कहीं न कहीं प्रभाव बनाने और सिस्टम को अपने अनुकूल चलाने की गुंजाइश पैदा करता है।
एसके सिंह पर भी नियमों की अनदेखी का आरोप
सूत्रों के अनुसार एसके सिंह (एडीशनल सुपरीटेंडेंट माइंस मैकेनिक, भाटिन माइंस) भी वर्षों से एक ही सेटअप/एक ही दायित्व में काम कर रहे हैं, जबकि नियमित रोटेशन नीति के अनुसार इनकी पोस्टिंग भी बदलनी चाहिए थी। शिकायत पत्रों में उनका नाम भी शामिल किया गया था।
राष्ट्रपति सचिवालय तक गई शिकायत, श्रीधर बाबू ने भेजा था पत्र, दिल्ली ने माँगी थी रिपोर्ट पुरानी दस्तावेज़ों के अनुसार यूसिल के ही एक वरिष्ठ कर्मचारी श्रीधर बाबू ने विस्तार से पोस्टिंग अनियमितताओं, परचेज विभाग की शिकायत, सीएमडी कार्यालय की अनियमितताओं को लेकर राष्ट्रपति सचिवालय को पत्र भेजा था।
दिल्ली से यूसिल प्रबंधन को एक्सप्लनेशन और फैक्ट रिपोर्ट माँगी गई थी। कुछ अधिकारियों का तबादला हुआ भी था, लेकिन जिन पर मुख्य आरोप थे। सुरोजित दास, प्रवीण पाल और एसके सिंह उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
संयुक्त यूनियनों का सवाल, कौन बचा रहा है इन्हें :
कर्मचारियों और संयुक्त यूनियन का कहना है जब राष्ट्रपति सचिवालय तक शिकायत गई, दिल्ली से रिपोर्ट माँगी गई, फिर भी कुछ अधिकारी उसी पद पर आज भी बैठे है। आखिर कौन है जो इनका संरक्षण कर रहा है। संयुक्त यूनियन नेताओं का कहना है कि, रोटेशन नीति का पालन न होना यूसिल की छवि पर असर डाल रहा है। वर्षों से जमे अधिकारी सिस्टम को अपनी सुविधा के अनुसार चलाते हैं। नई सीएमडी टीम से अपील है कि वे इस मामले में सख्त और पारदर्शी कदम उठाएँ
क्या नए सीएमडी के भी चाहेते बन चुके हैं ये अधिकारी :
अधिकारी और कर्मचारी खुलकर कहने लगे हैं कि हर नया सीएमडी आते ही जिनकी पोस्टिंग बदलनी चाहिए, वे उल्टा और मज़बूत हो जाते हैं। क्या कारण है कि रोटेशन नीति सब पर लागू होती है, लेकिन इन चुनिंदा नामों पर नहीं। यह सवाल अब यूसिल के भीतर प्रशासनिक चर्चा में बड़ा मुद्दा बन चुका है।
यूसिल के नियम साफ हैं, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं:
यूसिल + सीपीएसयू + डीएई के नियम : 3–4 वर्ष सामान्य रोटेशन, 2–3 वर्ष संवेदनशील विभाग (परचेज/फाइनेंस/स्टोर्स) 5 वर्ष से अधिक पोस्टिंग अनुचित। इम्पोर्टेन्ट सीट (सीएमडी पीए) पर 20 वर्ष सीधा उल्लंघन है। ऑडिट इसे रेड फ्लैग घोषित करता है। इन नियमों के बावजूद कार्रवाई न होना कंपनी में कई और प्रश्न खड़े कर रहा है।

