संवाद 2025 का भव्य समापन, 9 प्रतिभागियों को संवाद फेलोशिप प्रदान
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर | संवाद 2025 का अंतिम दिन आदिवासी विचार, कला और ज्ञान की विविधता को एक मंच पर समेटे शानदार समापन के साथ संपन्न हुआ। पूरे दिन चले सत्रों में आदिवासी उपचार पद्धतियों, कला–हस्तशिल्प, डिजाइन नवाचार, समुदाय-आधारित कहानियों और सामाजिक–पर्यावरणीय चुनौतियों पर व्यापक चर्चा हुई।

टाटा स्टील फाउंडेशन ने संवाद फेलोशिप 2025 के लिए 572 आवेदनों में से 9 फेलो के चयन की घोषणा की। चयन प्रक्रिया में 25 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों की 122 जनजातियों के प्रतिनिधि शामिल थे, जिनमें 10 आवेदन विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों से थे। फेलोशिप चयन प्रतिष्ठित जूरी द्वारा किया गया जिसमें डॉ. सोनम वांगचुक सहित कई विशेषज्ञ शामिल थे।
टाटा स्टील फाउंडेशन के सीईओ सौरव रॉय ने कहा कि फेलोशिप का उद्देश्य लुप्तप्राय स्वदेशी ज्ञान, भाषा, कला, कारीगरी और मौखिक परंपराओं के संरक्षण को बढ़ावा देना है। उन्होंने संवाद को आदिवासी ज्ञान की जीवंतता और सामुदायिक शक्ति का मजबूत संकेत बताया।
शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रम में मुंडा, कूकी, गारो और कंधा जनजातियों की जीवंत प्रस्तुतियों ने माहौल को ऊर्जा से भर दिया। गरिमा एक्का और अर्जुन लकड़ा की नागपुरी धुनों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया। आदिवासी व्यंजन, कला, हस्तशिल्प और उपचार पर आधारित स्टॉलों ने भी खूब प्रशंसा बटोरी।

