Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » राष्ट्र संवाद नजरिया : देश को स्वस्थ राजनीति की जरूरत और कांग्रेस के दर्द को समझिए
    Breaking News Headlines उत्तर प्रदेश ओड़िशा खबरें राज्य से जमशेदपुर जामताड़ा झारखंड बिहार रांची राजनीति राष्ट्रीय संपादकीय

    राष्ट्र संवाद नजरिया : देश को स्वस्थ राजनीति की जरूरत और कांग्रेस के दर्द को समझिए

    News DeskBy News DeskMarch 22, 2024No Comments5 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    राष्ट्र संवाद नजरिया : देश को स्वस्थ राजनीति की जरूरत और कांग्रेस के दर्द को समझिए

    देवानंद सिंह

    लोकसभा चुनाव की तिथियों का ऐलान हो चुका है, सात चरणों में चुनाव होने हैं। इसके बीच जिस तरह से सियासत गरमाई हुई है, वह कई तरह के संदेश देती नजर आ रही है। देश में अगर अभी कोई सबसे बड़ा सवाल है तो वह यह है कि आने वाले दिनों में बचा हुआ विपक्ष भी बच पाएगा या नहीं, क्योंकि देश कांग्रेस मुक्ति की तरफ पूरी तरह बढ़ता हुआ दिख रहा है। उम्मीद थी कि 2024 के चुनावों में कुछ परिवर्तन दिख सकता है, लेकिन देश में जिस तरह का सियासी माहौल बन रहा है कि उसमें कांग्रेस की कोई साख बच पाएगी, यह भी अपने-आप में बड़ा सवाल है।

     

     

     

     

    यह सही ही कहा जाता है कि वक्त का चक्र किसी को भी अपने लपेटे में ले सकता है, आज कांग्रेस उसी वक्त की लाठी का शिकार हो रही है। कभी बीजेपी पर हंसने वाली कांग्रेस खुद हंसी का पात्र बनती जा रही है। जब कांग्रेस ने कम सीटें जीतने पर बीजेपी का मजाक बनाया था तो अटल बिहारी वाजपेई ने कहा था कि वह दिन भी आएगा, जब बीजेपी सत्ता में होगी और कांग्रेस का कोई नाम लेने वाला नहीं होगा, वाजपेई जी के उन वचनों को नरेंद्र मोदी सच करते हुए दिख रहे हैं। कांग्रेस की इस बात से साख दांव पर लगी है कि आखिर चुनाव कैसे लड़े, उसके पास फंड नहीं है, क्योंकि उसके अकाउंट फ्रिज कर दिए गए हैं, पर ऐसा लग रहा है कि उसका दर्द किसी को भी नहीं सुनाई दे रहा है और बीजेपी पूरी तरह निरंकुशता के साथ आगे बढ़ते हुए दिख रही है। वैसे तो बीजेपी राम राज्य की बात कर रही है,

     

     

    लेकिन राम राज्य कम, महाभारत ज्यादा देखने को मिल रही है। कुल मिलाकर वर्तमान परिस्थितियों में सियासी हवा में कांग्रेस का क्या अस्तित्व रहेगा, यह सबसे बड़ा सवाल है, क्योंकि अभी की सियासी हवा में बीजेपी 400 के लक्ष्य को पूरी तरह भेदती हुई नजर आ रही है, क्योंकि कांग्रेस में कोई टिकना ही नहीं चाहता है, हर कोई अपना कांग्रेस से दामन छुटाने में लगा हुआ है। जिस तर्ज पर कांग्रेस चली थी, शायद उसने ऐसा कभी सोचा नहीं होगा।

     

     

     

    दरअसल, देश की मूल समस्याओं को समझने और उनके हल प्रस्तुत करने की क्षमता के अभाव में नेहरू-गांधी परिवार के सदस्य देश, सरकार और दल को सफल नेतृत्व प्रदान ही नहीं कर सके। सच्चाई यही रही कि आर्थिक, आंतरिक और वैदेशिक मोर्चों पर सफलताएं कम ही मिलीं। कुछ क्षेत्रों में नेहरू-इंदिरा-राजीव की सफलताएं जरूर ध्यान खींचने वाली रहीं, पर इस गरीब देश को जिस तरह के निर्णायक नेतृत्व की जरूरत थी, वह आवश्यकता पूरी नहीं हो सकी। ऐसे में, प्रधानमंत्री मोदी ठीक ही कहते हैं, ‘इस देश के कई जरूरी काम मेरी ही प्रतीक्षा कर रहे थे।’ किसी देश के लिए आर्थिक मोर्चे पर सफलता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। आर्थिक साधनों से ही विकास, कल्याण तथा सुरक्षा के काम किए जा सकते हैं। इसी पृष्ठभूमि में 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था, ‘केंद्र सरकार 100 पैसे भेजती है, पर गांवों तक उसमें से सिर्फ 15 पैसे ही पहुंच पाते हैं।’ यह काम एक दिन में तो नहीं हुआ होगा। उसमें कुछ न कुछ योगदान 1947 से 1985 तक की सारी सरकारों का रहा ही होगा।

     

     

    यानी उन दिनों की सरकारें भ्रष्टाचार के खिलाफ उतनी सख्त नहीं थीं, जितनी किसी गरीब देश की सरकारों को होना चाहिए। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय में कई दशक पहले सचिव रहे एनसी सक्सेना ने यह सलाह दी थी कि बैंक खातों के जरिये ही लोगों तक आर्थिक मदद पहुंचाई जानी चाहिए। उससे लीकेज बंद होगा, लेकिन यह काम मोदी सरकार ने ही बड़े पैमाने पर शुरू किया।
    केवल कांग्रेस ही नहीं, नेताओं के वंशज-परिजन के बीच से निकले अपेक्षाकृत कम योग्य उत्तराधिकारियों के कारण ही अन्य कई दल भी संकट में हैं। कुछ तो डूब रहे हैं।
    संकेत हैं कि आने वाले दिन भी उनके लिए सुखकर नहीं हैं। इन दलों की स्थिति सुधरती नहीं देखकर बीते दिनों के कुछ लाभार्थी तरह-तरह के उपदेश दे रहे हैं।

     

     

    कुछ तो विलाप और प्रलाप भी कर रहे हैं। दलों के पराभव के मूल कारणों की गंभीर चर्चा संबंधित दलों के नेता भी नहीं कर रहे हैं, क्योंकि इससे हाईकमान के यहां उनकी पूछ खत्म हो जाएगी। लिहाजा, यह लोकसभा चुनाव तो महत्वपूर्ण है ही, लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण होंगे अगले पांच साल,

     

     

    क्योंकि इस कालखंड में और भी बहुत सारे बदलाव देखने को मिलेंगे, लेकिन स्वस्थ्य राजनीति के लिए एक मजबूत विपक्ष का होना बहुत जरूरी है, लेकिन यह निराशाजनक ही होगा कि इस कालखंड में बचे हुए विपक्ष का संकट और भी गहरा हो।

    राष्ट्र संवाद नजरिया : देश को स्वस्थ राजनीति की जरूरत और कांग्रेस के दर्द को समझिए
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleडॉ सुधा नंद झा ज्योतिषी मिथिला मनोकामना ज्योतिष केंद्र द्वारा प्रस्तुत राशिफल
    Next Article भैया जी’ के टीज़र रिलीज़ के साथ मनोज बाजपेयी का फ़िल्मी शतक

    Related Posts

    ग्रामीण बच्चों को पठन-पाठन सामग्री, सड़क सुरक्षा व नशामुक्ति को लेकर चलेगा अभियान

    September 5, 2026

    गाय चोरी के आरोप को लेकर जुगसलाई में तनाव, पुलिस ने संभाला मोर्चा

    September 5, 2026

    तीन साल के आर्यन का अपहरण, छह घंटे में खड़गपुर से सकुशल बरामद

    September 5, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    ग्रामीण बच्चों को पठन-पाठन सामग्री, सड़क सुरक्षा व नशामुक्ति को लेकर चलेगा अभियान

    गाय चोरी के आरोप को लेकर जुगसलाई में तनाव, पुलिस ने संभाला मोर्चा

    तीन साल के आर्यन का अपहरण, छह घंटे में खड़गपुर से सकुशल बरामद

    गुरुजनों के सम्मान से ही सशक्त समाज का निर्माण : दिनेश कुमार

    गोपबंधु विद्यापीठ में विद्यार्थियों ने शिक्षकों संग मनाया शिक्षक दिवस

    जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय का चौथा दीक्षांत समारोह 8 सितंबर को, 2200 छात्राओं को मिलेगी उपाधि

    एमजीएम अस्पताल के पीछे झाड़ियों में दिखी गोह, लोगों में कौतूहल

    फुटपाथ पर चलना मौलिक अधिकार, जमशेदपुर में अतिक्रमण हटाने की मांग : अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू

    कांग्रेस का 7 सितंबर को राजभवन के समक्ष महाधरना, सतीश पाल मुंजनी ने कार्यकर्ताओं से रांची पहुंचने का किया आह्वान

    शिक्षकों का सम्मान, शिक्षा का उत्थान विषयक सेमिनार आज

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.