Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » सारंडा-जादूगोड़ा में रेडिएशन का खतरा! 100 में 30 महिलाओं का गर्भपात, विकलांग जन्म के बढ़ते मामले 10 गांवों में ग्राउंड सर्वे, सहिया-सेविका के साथ पड़ताल; डॉक्टरों ने जताई चिंता
    Breaking News Headlines कारोबार खबरें राज्य से

    सारंडा-जादूगोड़ा में रेडिएशन का खतरा! 100 में 30 महिलाओं का गर्भपात, विकलांग जन्म के बढ़ते मामले 10 गांवों में ग्राउंड सर्वे, सहिया-सेविका के साथ पड़ताल; डॉक्टरों ने जताई चिंता

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarFebruary 22, 2026No Comments3 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    सारंडा-जादूगोड़ा में रेडिएशन का खतरा! 100 में 30 महिलाओं का गर्भपात, विकलांग जन्म के बढ़ते मामले 10 गांवों में ग्राउंड सर्वे, सहिया-सेविका के साथ पड़ताल; डॉक्टरों ने जताई चिंता

    राष्ट्र संवाद संवाददाता
    जमशेदपुर: झारखंड की नब्ज ‘जल, जंगल, जमीन’ पर आधारित हमारी विशेष इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट में पूर्वी सिंहभूम के जादूगोड़ा क्षेत्र से बेहद चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। एशिया के सबसे बड़े साल वन सारंडा के समीप स्थित यूरेनियम खदानों के आसपास के गांवों में रेडिएशन के संभावित प्रभाव को लेकर ग्रामीणों में लंबे समय से आशंका है। 1967 से संचालित खनन गतिविधियों के बीच अब गर्भपात और जन्मजात विकलांगता के मामलों ने सवाल खड़े कर दिए हैं।


    10 गांवों में सर्वे, चौंकाने वाले आंकड़े
    हमारी टीम ने खदान क्षेत्र के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांव—इचड़ा, दुड़को, मेचुआ, भाटिन, बांगो, माटीगोडा, डुंगरीडीह, चाटीकोचा, तिलाईटांड और झरिया—में सहिया और आंगनबाड़ी सेविकाओं के साथ मिलकर 100 महिलाओं के बीच सर्वे किया।
    सर्वे में सामने आया कि:
    100 में से 30 से अधिक महिलाओं का गर्भपात हो चुका है।
    20% महिलाओं ने एक बार गर्भपात की बात कही।
    10% महिलाओं को 4-5 बार तक गर्भपात का सामना करना पड़ा।
    कई मामलों में दो से तीन माह के भीतर गर्भपात की घटना सामने आई।
    दुड़को गांव की एक महिला ने बताया कि उसने पांच बार मृत शिशु को जन्म दिया। कई महिलाओं ने गर्भ ठहरने में कठिनाई की भी शिकायत की।
    अपंग और मानसिक विकलांग बच्चों का जन्म
    झारखंड ऑर्गेनाइजेशन अगेंस्ट रेडिएशन के अध्यक्ष घनश्याम बिरूली के अनुसार, बीते 15 वर्षों में लगभग 200 बच्चे शारीरिक व मानसिक रूप से विकलांग पैदा हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ वर्ष पूर्व माइनिंग एरिया के विकलांग बच्चों की सूची तैयार की गई थी, जिसमें 100 से अधिक नाम दर्ज थे।
    स्थानीय लोगों के अनुसार पहले जहां शारीरिक विकलांगता के मामले अधिक थे, अब मानसिक विकलांगता के साथ जन्म के मामले भी बढ़ रहे हैं। राजदोहा गांव के भचाय वास्के जैसे उदाहरणों का जिक्र ग्रामीण करते हैं।
    सेविका और डॉक्टरों ने जताई चिंता
    उत्तरी इचड़ा पंचायत की आंगनबाड़ी सेविका लतिका सिंह ने बताया कि बीते चार महीनों में उनके क्षेत्र में पांच गर्भपात के मामले सामने आए हैं। आशा कार्यकर्ता मीना दास ने भी गर्भधारण में दिक्कतों के बढ़ते मामलों की पुष्टि की।
    पोटका पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रंजीत महाकुंड ने बताया कि रेडिएशन से गर्भपात और जन्मजात विकलांगता का खतरा बढ़ सकता है। उनके अनुसार विकिरण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है और मृत शिशु जन्म भी इससे जुड़ा हो सकता है।
    कितना खतरनाक है रेडिएशन?
    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 50-100 मिलीसीवर्ट रेडिएशन के संपर्क से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। रेडिएशन की माप ‘सीवर्ट’ में होती है, जहां 1 सीवर्ट = 1000 मिलीसीवर्ट के बराबर होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक संपर्क गंभीर स्वास्थ्य प्रभाव डाल सकता है।
    संसद-विधानसभा में उठ चुका है मुद्दा
    यूसील के टेलिंग पोंड और आसपास के क्षेत्रों में रेडिएशन के खतरे को लेकर राज्यसभा सांसद महुआ मांझी संसद में सवाल उठा चुकी हैं। डुमरी विधायक जयराम महतो ने भी विधानसभा में गर्भपात और स्वास्थ्य समस्याओं का मुद्दा उठाया था।
    निष्पक्ष जांच की मांग
    ग्रामीणों ने खनन क्षेत्र में नियमित स्वास्थ्य जांच, रेडिएशन मॉनिटरिंग और प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजा व पुनर्वास की मांग की है। उनका कहना है कि वर्षों से समस्या बनी हुई है, लेकिन समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई।
    (नोट: रिपोर्ट में शामिल आंकड़े स्थानीय सर्वे और ग्रामीणों के बयानों पर आधारित हैं। स्वास्थ्य प्रभावों की वैज्ञानिक पुष्टि के लिए व्यापक और स्वतंत्र जांच आवश्यक है।)

    विकलांग जन्म के बढ़ते मामले 10 गांवों में ग्राउंड सर्वे सहिया-सेविका के साथ पड़ताल; डॉक्टरों ने जताई चिंता सारंडा-जादूगोड़ा में रेडिएशन का खतरा! 100 में 30 महिलाओं का गर्भपात
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleनिमडीह सीएचसी में अल्ट्रासाउंड और एक्सरे मशीन का उद्घाटन 58 लाख की लागत से डीएमएफटी फंड से स्थापित
    Next Article प्रोजेक्ट उल्लास’ के तहत पोटका में निःशुल्क मिर्गी जांच शिविर, 90 मरीजों की हुई स्क्रीनिंग

    Related Posts

    पूर्णिमा साहू ने दिशा बैठक के 21 एजेंडा और 12 जनहित मुद्दों पर उपायुक्त से की कार्रवाई की मांग

    July 18, 2026

    स्पा सेंटरों की आड़ में देहव्यापार: ठाणे क्राइम ब्रांच ने महिला एजेंट को दबोचा

    July 18, 2026

    हाइड्रोजन ट्रेन: भविष्य की ऊर्जा और लोकतांत्रिक मर्यादा का सवाल

    July 18, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    पूर्णिमा साहू ने दिशा बैठक के 21 एजेंडा और 12 जनहित मुद्दों पर उपायुक्त से की कार्रवाई की मांग

    स्पा सेंटरों की आड़ में देहव्यापार: ठाणे क्राइम ब्रांच ने महिला एजेंट को दबोचा

    हाइड्रोजन ट्रेन: भविष्य की ऊर्जा और लोकतांत्रिक मर्यादा का सवाल

    शाह-योगी मुलाकात ने बदली यूपी चुनाव 2027 की सियासी बिसात

    हल्की बारिश में ईस्ट प्लांट बस्ती जलमग्न, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य कुलवंत सिंह बंटी ने लिया जायजा*

    पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता के जन्मदिवस पर बधाइयों का तांता, आवास पर दिनभर रहा उत्सव का माहौल

    मलेरिया नियंत्रण को लेकर पोटका में ग्राम प्रधानों की बैठक, जनजागरूकता पर जोर

    दिशा बैठक से छूटे 21 एजेंडा और 12 जनहित मुद्दों पर विधायक पूर्णिमा साहू ने उपायुक्त से की कार्रवाई की मांग

    ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे के शहर आगमन पर भव्य स्वागत, ग्रामीण योजनाओं पर गहन विमर्श

    तुलसी सारस्वत सम्मान 2026 से सम्मानित होंगे आचार्य हरेराम त्रिपाठी ‘चेतन’

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.