यूसीआईएल की रोटेशन नीति पर उठे सवाल, संवेदनशील पदों पर वर्षों से जमे अधिकारियों को लेकर चर्चा तेज
किसी का दो साल में चार बार तबादला, तो कोई 15-20 वर्षों से एक ही विभाग में पदस्थापित
राष्ट्र संवाद मुख्य संवाददाता, जादूगोड़ा। यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) में रोटेशन एवं स्थानांतरण नीति को लेकर कर्मचारियों और यूनियन सदस्यों के बीच चर्चा तेज हो गई है। आरोप है कि जहां कुछ कर्मचारियों का कम समय में कई बार तबादला किया गया, वहीं कई अधिकारी वर्षों से एक ही विभाग और पद पर बने हुए हैं।
कर्मचारियों के अनुसार यूसीआईएल के वर्तमान सीएमडी के पीए काशीनाथ चौधरी का दो वर्षों के भीतर चार बार तबादला किया गया, जबकि कुछ अधिकारी 15 से 20 वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। परचेज विभाग में कार्यरत प्रवीण पाल तथा भाटिन माइंस के एस.के. सिंह को लेकर भी कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि वे लंबे समय से एक ही विभाग में पदस्थापित हैं।
यूनियन से जुड़े लोगों का कहना है कि परचेज, फाइनेंस, कार्मिक और खनन जैसे विभाग संवेदनशील श्रेणी में आते हैं, जहां निर्धारित अवधि के बाद रोटेशन लागू होना चाहिए। कर्मचारियों का तर्क है कि यदि कुछ पदों पर रोटेशन नीति लागू की जा रही है और कुछ को इससे बाहर रखा जा रहा है, तो इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और समानता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा है कि 28 अधिकारियों के तबादले की सूची तैयार होने के बावजूद अब तक आदेश जारी नहीं हुआ है। वहीं कंपनी में उत्पादन में कमी और खरीद प्रक्रियाओं को लेकर समय-समय पर उठते रहे आरोपों के कारण भी प्रबंधन की कार्यशैली चर्चा में है।
कर्मचारियों और यूनियनों की निगाह अब नए सीएमडी के अगले कदम पर टिकी है। उनका मानना है कि रोटेशन नीति को सभी संवेदनशील पदों पर समान रूप से लागू कर प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत किया जाना चा
कर्मचारियों के बीच उठ रहे प्रमुख सवाल
दो वर्षों में चार बार तबादला, जबकि कई अधिकारी 15-20 वर्षों से एक ही पद पर क्यों?
संवेदनशील विभागों में रोटेशन नीति समान रूप से लागू क्यों नहीं हो रही?
28 अधिकारियों के प्रस्तावित तबादले की सूची पर अब तक आदेश क्यों नहीं?
परचेज विभाग को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रबंधन की क्या कार्रवाई?
नए सीएमडी भ्रष्टाचार और प्रशासनिक असंतुलन पर क्या कदम उठाएंगे?
कर्मचारियों का कहना है कि पारदर्शी और समान स्थानांतरण नीति ही संस्थान में विश्वास और जवाबदेही को मजबूत कर सकती है।

