रिपोर्ट – अमन ओझा (ब्यूरो चीफ, कोल्हान)
सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना की कार्यशैली इन दिनों चर्चा और सवालों के घेरे में है। थाना में कई अनुभवी पदाधिकारियों की तैनाती के बावजूद लंबित मामलों के निष्पादन में सुस्ती और आपसी समन्वय की कमी साफ तौर पर देखने को मिल रही है। सूत्रों के अनुसार थाना प्रभारी और अन्य अधिकारियों के बीच तालमेल पूरी तरह संतोषजनक नहीं है, जिसका सीधा असर जांच प्रक्रिया और कार्रवाई की गति पर पड़ रहा है।
इस स्थिति का ताजा उदाहरण 14 मार्च को हुए चर्चित संजय इलेक्ट्रॉनिक्स फायरिंग कांड में सामने आया है। घटना के पखवाड़े भर बीत जाने के बावजूद पुलिस को अब तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है। मामले में अमन सिंह, अमित रंजन उर्फ शानू सिंह, ऋषि तिवारी और साहिल सोनकर जैसे आरोपियों के नाम सामने आ चुके हैं, लेकिन सभी अब तक पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। जांच की जिम्मेदारी अनुभवी अधिकारी सतीश बर्नवाल को सौंपी गई है, जो पूर्व में थाना प्रभारी भी रह चुके हैं। इसके बावजूद पुलिस की टीम का आरोपियों तक नहीं पहुंच पाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि कहीं आरोपियों को संरक्षण तो नहीं मिल रहा, या फिर वे इतने शातिर अपराधी हैं कि आसानी से पुलिस की पकड़ से बाहर बने हुए हैं। मामले को और संवेदनशील बनाता है यह तथ्य कि मुख्य आरोपी अमन सिंह और शानू सिंह आपस में सगे भाई बताए जा रहे हैं और उनके राजनीतिक संबंध होने की भी चर्चा है। ऐसे में पुलिस पर निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई का दबाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि थाना स्तर पर बेहतर टीमवर्क, स्पष्ट रणनीति और मजबूत समन्वय हो, तो ऐसे मामलों का जल्द खुलासा संभव है। फिलहाल आदित्यपुर थाना के सामने सबसे बड़ी चुनौती न केवल इस फायरिंग कांड की गुत्थी सुलझाना है, बल्कि आम जनता के बीच पुलिस की साख और भरोसे को भी बनाए रखना है। स्थानीय लोगों की निगाहें अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, और सभी को उम्मीद है कि जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ इस मामले का खुलासा होगा।

