यूसीआईएल सीमेंट खरीद मामले में राजनीतिक प्रतिक्रिया, भाजपा नेता ने पीएमओ व डीएई से की जांच की मांग
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर | यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) में सीमेंट खरीद प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब इस प्रकरण में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आ गई है। भाजपा नेता एवं जिला मंत्री रोहित सिंह परमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
भाजपा नेता ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) सहित संबंधित केंद्रीय एजेंसियों को टैग करते हुए कहा है कि यूसीआईएल में सीमेंट खरीद से जुड़े आरोप अत्यंत गंभीर हैं और इसकी उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। जानकारों का मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठने और उस पर राजनीतिक स्तर से जांच की मांग होने पर संबंधित विभागों की जवाबदेही स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।
गौरतलब है कि यूसीआईएल में पिछले एक दशक से अधिक समय से सीमेंट खरीद की प्रक्रिया, दरों, निविदा शर्तों तथा एक ही सप्लायर को बार-बार लाभ मिलने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब इस प्रकरण में राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद उच्चस्तरीय जांच की मांग को और बल मिला है।
हालांकि, इस पूरे मामले पर यूसीआईएल प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, यूसीआईएल के सीएमडी की भूमिका और लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों को नहीं हटाए जाने को लेकर भी उनकी कार्यशैली और दबावों पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

यूसीआईएल सीमेंट घोटाले पर प्रबंधन की चुप्पी, मिलीभगत के गंभीर आरोप
यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) में कथित सीमेंट घोटाले को लेकर उच्च प्रबंधन की चुप्पी पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि पिछले एक दशक से अधिक समय से एक ही स्थानीय ब्रांड आईएसडी सीमेंट की लगातार खरीद की जा रही है, जो मांगकर्ता, क्रय, लेखा, आंतरिक ऑडिट विभाग और उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं मानी जा रही है।
बताया जा रहा है कि यूसीआईएल ने खरीद नियमों में ऐसे प्रावधान किए, जिससे राष्ट्रीय स्तर की सीमेंट कंपनियां निविदा प्रक्रिया से बाहर हो गईं। अगस्त 2025 में जादूगोड़ा परियोजना के लिए 1100 मीट्रिक टन सीमेंट लगभग ₹3600 प्रति मीट्रिक टन (जीएसटी अलग) यानी करीब ₹485 प्रति बोरा की दर से खरीदा गया, जबकि बाजार में ब्रांडेड सीमेंट की कीमत करीब ₹330 प्रति बोरा बताई जा रही है। नरवा पहाड़, तुरामडीह सहित अन्य परियोजनाओं को मिलाकर कुल खरीद 3000 मीट्रिक टन से अधिक बताई जा रही है।
आरोप है कि वार्षिक आपूर्ति आदेश से पहले जीएफआर नियमों के तहत कई बार ऊंची दरों पर खरीद की गई और फर्जी कोटेशन के जरिए एक ही सप्लायर को लाभ पहुंचाया गया। सिविल अधिकारी सुलभ कुमार बेस पर भी करीब डेढ़ करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
वहीं, पिछले 18 वर्षों से क्रय विभाग में जमे मुख्य नियंत्रक (भंडार एवं क्रय) प्रवीण कुमार पाल पर विशेष संरक्षण के आरोप हैं। अब तक यूसीआईएल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे पूरे मामले में संदेह और गहरा गया

