लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा क्षेत्र में जन वितरण प्रणाली (PDS) के चावल की कथित PDS का चावल की कालाबाजारी का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गरीबों को मिलने वाला सरकारी राशन बिचौलियों और कुछ डीलरों के माध्यम से चावल मिलों तक पहुंचाया जा रहा है। वहां चावल की प्रोसेसिंग और पॉलिश के बाद उसे खुले बाजार में बेचने का दावा किया जा रहा है। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिले की चावल मिलों में औचक छापेमारी कराने की मांग की है।
PDS का चावल और कालाबाजारी का नेटवर्क
ग्रामीणों के अनुसार, कथित तौर पर PDS का चावल को लगभग 2,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदकर पॉलिश करने के बाद करीब 3,300 रुपये प्रति क्विंटल में बेचा जाता है। हालांकि, इन दरों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस तरह का कारोबार चल रहा है, तो इसकी जांच से सरकारी राशन की कालाबाजारी से जुड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर राशन कार्डधारकों से अंगूठा लगवा लिया जाता है, लेकिन उन्हें निर्धारित मात्रा में चावल नहीं दिया जाता है। राशन मांगने पर स्टॉक नहीं आने की बात कहकर टाल दिया जाता है। इससे गरीब परिवारों को अपने हक के राशन के लिए परेशान होना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि दिन और रात के समय वाहनों से चावल मिलों तक सरकारी राशन पहुंचाया जाता है। उनका आरोप है कि सस्ते में चावल हासिल कर उसे प्रोसेसिंग के बाद बाजार में बेचने से अवैध मुनाफा कमाया जा रहा है। हालांकि, किसी विशेष मिल या व्यक्ति की संलिप्तता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग और PDS का चावल वितरण
ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले को लेकर जिला उपायुक्त और जिला आपूर्ति पदाधिकारी से कई बार शिकायत की गई, लेकिन उनकी जानकारी के अनुसार अब तक प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है। उन्होंने प्रशासन से जिले की बड़ी चावल मिलों में औचक छापेमारी करने, स्टॉक रजिस्टर की जांच करने और PDS डीलरों के वितरण रिकॉर्ड से उसका मिलान कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने दोषी पाए जाने वाले डीलरों, बिचौलियों और मिल संचालकों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की भी मांग की है। उनका कहना है कि जांच में यदि सरकारी राशन की अवैध खरीद-बिक्री की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों पर कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
अब सवाल प्रशासन की कार्रवाई का है। यदि सरकारी राशन की कालाबाजारी हो रही है, तो यह गरीबों के अधिकारों पर सीधा प्रहार है। ऐसे में शिकायतों की निष्पक्ष जांच, राशन वितरण व्यवस्था का सत्यापन और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई जरूरी है। फिलहाल ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन जल्द कदम उठाकर सच्चाई सामने लाए और जरूरतमंदों तक उनका पूरा राशन पहुंचना सुनिश्चित करे। अधिक जानकारी के लिए आप National Food Security Act की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।

