गुजरात के डायमंड हब की तरह जेमस्टोन हब बन सकता है गुड़ाबांदा
अमन शांडिल्य
झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांदा इलाके में पन्ना (Emerald) के भंडार पिछले 15 साल से सरकार के लिए बड़ी संभावना बने हुए हैं। प्राइवेट कंपनी “मां तारा इस्पात प्राइवेट लिमिटेड” ने 2010 में प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया, उसके बाद 2013 में राज्य सरकार और एनएमडीसी ने मिलकर सर्वे किया। लेकिन नक्सल प्रभावित क्षेत्र और नीतिगत विलंब के कारण इस संसाधन का सही उपयोग आज तक नहीं हो सका।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार ठोस कदम उठाए, तो यह क्षेत्र जेमस्टोन हब के रूप में विकसित होकर राज्य के राजस्व में भारी वृद्धि करेगा और करीब 10,000 लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराएगा। बावजूद इसके पिछले 15 वर्षों में सरकार नीतिगत निर्णय लेने में असफल रही।
इस इलाके में अवैध खनन की घटनाएं और दुर्घटनाएं भी चिंता का विषय हैं। 2013 में चार लोगों की जान गई और संरक्षित वन क्षेत्र में भी अवैध उत्खनन की खबरें सामने आईं। यह स्पष्ट संकेत है कि अगर नियामकीय ढांचा मजबूत नहीं हुआ, तो संसाधनों का संरक्षण और सुरक्षा दोनों प्रभावित होंगे।
नीतिगत ठहराव के कई कारण
आईबीएम का अभाव, मूल्य निर्धारण न होना और ऑक्शन प्रक्रिया में देरी। 2021 में नियमों में बदलाव के बावजूद कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई। जेमफिल्ड, मानिकेश्वरी जेम, टीपी साहु सहित कई कंपनियों ने रुचि दिखाई, लेकिन सरकार नीतिगत निर्णय लेने में विफल रही।
हालांकि, झारखंड हाईकोर्ट के संज्ञान लेने के बाद अब सरकार पर दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि योजनाबद्ध तरीके से कदम उठाए जाने पर पूर्वी सिंहभूम की तस्वीर बदल सकती है। गुजरात के डायमंड हब की तरह यह इलाका जेमस्टोन हब बन सकता है, रोजगार और राजस्व दोनों में लाभ देगा।
संसाधन मौजूद हैं, लेकिन नीतिगत इच्छाशक्ति की कमी विकास की राह में सबसे बड़ा बाधक बनी हुई है। अब वक्त है, सरकार ठोस निर्णय लेकर इस बहुमूल्य खनिज का लाभ राज्य और लोगों तक पहुंचाए।

