एक तरफ बेटी की डोली, दूसरी तरफ जनता की टोली चुनाव प्रचार और शादी की रस्मों को एक साथ निभा रही हैं सोमवारी सोरेन
राष्ट्र संवाद संवाददाता
चाकुलिया l राजनीति के मैदान में अक्सर नेताओं को केवल वोटों के गणित में उलझा देखा जाता है, लेकिन चाकुलिया नगर पंचायत क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आ रही है जो मातृत्व और कर्तव्य की एक अनूठी मिसाल पेश कर रही है. झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) समर्थित अध्यक्ष पद की प्रत्याशी सोमवारी सोरेन इन दिनों एक साथ दो-दो बड़ी जिम्मेदारियां बखूबी निभा रही हैं. सोमवारी सोरेन के लिए यह समय अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. एक तरफ जहां चाकुलिया की जनता के बीच जाकर वे अपने पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए चुनाव प्रचार के मैदान में पसीना बहा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके घर में शहनाइयां गूंजने वाली हैं. उनकी बेटी की शादी तय है और आगामी 12 फरवरी से 14 फरवरी तक शादी के मुख्य समारोह होने हैं.

घर और राजनीति के बीच संतुलन
जब राष्ट्र संवाददाता संवाददाता सोमवारी सोरेन के आवास पर पहुंचे, तो वहां का नजारा बेहद भावुक और प्रभावित करने वाला था. चुनावी रणनीतियों पर चर्चा करने के बजाय, सोमवारी उस वक्त अपनी बेटी और परिजनों के लिए खरीदे गए नए कपड़ों को संवारने और उन्हें सहेजने में व्यस्त थीं. एक मां की ममता और एक जनसेवक की निष्ठा उनके चेहरे पर साफ झलक रही थी.
दिन में जनसंपर्क, रात को मंगल गीत
सोमवारी सोरेन का दिन सुबह की पहली किरण के साथ शुरू होता है. सुबह से शाम तक वे मतदाताओं के द्वार पर दस्तक देकर जनसंपर्क में जुटी रहती हैं, और जैसे ही घर लौटती हैं, वे एक समर्पित मां की भूमिका में आ जाती हैं. शादी की तैयारियों का जायजा लेना, मेहमानों की लिस्ट देखना और रस्मों की तैयारी करना—वे हर काम खुद अपनी देखरेख में कर रही हैं.
बेटी की विदाई और लोकतंत्र का उत्सव
सोमवारी सोरेन का कहना है कि उनके लिए दोनों ही जिम्मेदारियां बेहद महत्वपूर्ण हैं. बेटी का घर बसाना एक मां का सबसे बड़ा धर्म है, तो जनता की सेवा करना उनका संकल्प. 12 से 14 फरवरी तक वे पूरी तरह से बेटी की शादी के रस्म-ओ-रिवाज में व्यस्त रहेंगी, लेकिन उनका मानना है कि जनता का प्यार और परिवार का साथ ही उनकी असली ताकत है.

