यूसीआईएल अस्पताल के रेफरल सिस्टम पर जेएलकेएम नेता राजा कालिंदी ने उठाए गंभीर सवाल
*डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य के कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच की मांग, सीवीओ, पीएमओ और परमाणु ऊर्जा विभाग में शिकायत दर्ज।*
*फ्लैट और विदेशी यात्रा के आरोपों की भी जांच की मांग*
*राष्ट्र संवाद संवाददाता*
जादूगोड़ा
यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) की चिकित्सा रेफरल व्यवस्था को लेकर उठे सवाल अब और गंभीर होते जा रहे हैं। पहले कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों की ओर से अस्पताल चयन, इलाज के बढ़ते खर्च, निजी अस्पतालों की ओर रेफर किए जाने तथा निजी लैब में जांच के लिए नमूने भेजे जाने को लेकर सवाल उठाए गए थे।
अब जेएलकेएम नेता राजा कालिंदी ने यूसीआईएल अस्पताल के सीएमओ डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य के कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। राजा कालिंदी का आरोप है कि डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य के यूसीआईएल अस्पताल का सीएमओ बनने के बाद चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय सतर्कता अधिकारी (सीवीओ), प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और परमाणु ऊर्जा विभाग में शिकायत भेजकर पूरे मामले की जांच की मांग की है।
*देसून और रूबी जैसे निजी अस्पतालों को रेफरल पर सवाल*
राजा कालिंदी ने आरोप लगाया कि जादूगोड़ा और आसपास के यूसीआईएल कर्मचारियों को इलाज के लिए देसून अस्पताल और रूबी जैसे निजी अस्पतालों में रेफर किए जाने की प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए। उनका दावा है कि इन अस्पतालों को प्राथमिकता दिए जाने के पीछे आर्थिक हित या कमीशन की भूमिका की आशंका है।
उन्होंने कहा कि यदि मरीजों के लिए बेहतर और विश्वसनीय चिकित्सा संस्थान उपलब्ध हैं, तो रेफरल प्रक्रिया में उनका विकल्प क्यों नहीं रखा जाता। उन्होंने विशेष रूप से बीएम बिरला अस्पताल, कोलकाता तथा सीएमसी वेल्लोर जैसे संस्थानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन संस्थानों में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं और वहां इलाज कराने वाले कई मरीज संतुष्ट भी रहे हैं।
राजा कालिंदी का आरोप है कि इसके बावजूद अधिक खर्च वाले निजी अस्पतालों की ओर मरीजों को भेजे जाने की प्रक्रिया की जांच नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि अस्पतालों के चयन का आधार क्या है और किन परिस्थितियों में किसी मरीज को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में रेफर किया जाता है। उन्होंने मांग की कि पिछले कुछ वर्षों में यूसीआईएल कर्मचारियों के इलाज से संबंधित रेफरल, अस्पताल चयन, मेडिकल जांच, लैब जांच, बिल भुगतान और अस्पतालों के साथ हुए टाई-अप का स्वतंत्र वित्तीय एवं तकनीकी ऑडिट कराया जाए।
*फ्लैट और विदेशी यात्रा के आरोप*
राजा कालिंदी ने डॉ. भट्टाचार्य पर गंभीर व्यक्तिगत लाभ के आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कोलकाता में अस्पतालों के आसपास न्यू टाउन क्षेत्र में एक फ्लैट उपलब्ध कराए जाने तथा विदेशी यात्रा कराए जाने संबंधी आरोपों की भी जांच होनी चाहिए।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कालिंदी ने कहा कि इन्हीं आरोपों को लेकर उन्होंने संबंधित जांच एजेंसियों से डॉ. भट्टाचार्य की चल-अचल संपत्ति, आय के स्रोत और कार्यकाल के दौरान हुए आर्थिक लेन-देन की जांच कराने की मांग की है।
*रिटायरमेंट लाभ रोकने की मांग :*
राजा कालिंदी ने कहा कि डॉ. भट्टाचार्य के सेवानिवृत्त होने की स्थिति को देखते हुए यदि उनके खिलाफ औपचारिक जांच लंबित है, तो जांच पूरी होने तक नियमानुसार उनके सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान को लेकर भी सक्षम प्राधिकारी निर्णय लें।
उन्होंने कहा कि पूर्व में भी यूसीआईएल के कुछ अधिकारियों के खिलाफ गंभीर आरोप और जांच के मामलों में पीएफ, ग्रेच्युटी समेत अन्य सेवानिवृत्ति लाभों पर जांच पूरी होने तक रोक लगाए जाने की कार्रवाई की गई है। उनका कहना है कि यदि वर्तमान मामले में भी नियमों के तहत ऐसी कार्रवाई संभव है, तो जांच पूरी होने तक संबंधित लाभों के संबंध में भी निर्णय लिया जाना चाहिए।
*गणेश मुर्मू प्रकरण के बाद फिर गरमाया मामला :*
यूसीआईएल की रेफरल व्यवस्था पर विवाद उस समय और चर्चा में आया था, जब नरवां निवासी यूसीआईएल कर्मी गणेश मुर्मू के इलाज को लेकर परिजनों की ओर से कोलकाता के देसून अस्पताल में कथित तौर पर तीन लाख रुपये जमा कराने का आरोप लगाया गया था।
इस मामले में यूसीआईएल अस्पताल के एचओडी डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने कहा था कि मरीज उनके संपर्क में नहीं था और न ही देसून अस्पताल उनके संपर्क में था। उन्होंने यह भी कहा था कि संबंधित रोबोटिक सर्जरी की अनुमति नहीं थी और संभवतः इसी कारण मरीज ने स्वयं भुगतान किया होगा।
इसके बाद कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों ने रेफरल व्यवस्था, अस्पताल चयन तथा इलाज के खर्च में अंतर को लेकर स्वतंत्र जांच और ऑडिट की मांग उठाई थी।
*पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो :*
राजा कालिंदी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी साबित करना नहीं, बल्कि यूसीआईएल की चिकित्सा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कराना है। उन्होंने मांग की कि सीवीओ अथवा किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से पूरे मामले की जांच कराई जाए और यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, नियमों का उल्लंघन अथवा निजी लाभ का मामला सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि अस्पताल चयन से लेकर रेफरल, लैब जांच और बिल भुगतान तक पूरी प्रक्रिया का ऑडिट होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि यूसीआईएल के कर्मचारियों के इलाज में कंपनी का पैसा किस प्रकार खर्च किया जा रहा है और अस्पतालों के चयन में निर्धारित नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
वही हाल के दिन में सुकांतिमुखी के 22 दिनों में 22 लाख का बिल होने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं संयुक्त यूनियन के द्वारा भी इस मामले को लेकर जांच पड़ताल कर कार्रवाई करने की मांग की भाजपा के नेता रोहित सिंह ने भी उल अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए अस्पताल को पूरी तरह से बदहाल करने का आरोप लगाया है मरीजों के यहां इलाज नहीं मिल पा रहा है उन्होंने कहा कि यूसिल प्रबंधन के द्वारा उन्हें 15 दिन का समय मांगा गया था लेकिन इसके बावजूद भी अभी तक स्थिति बढ़ा ली है कई बार यहां मरीजों के द्वारा काफी हंगामा भी किया जाता है लोगों को दवाई भी सही समय पर नहीं मिल पा रही है सभी ने एक स्वर में सीएमओ डॉक्टर देवाशीष भट्टाचार्य को यहां से हटाने की मांग की है।
*बॉक्स*
*डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने लगाए गए कमीशन अथवा निजी लाभ संबंधी आरोपों को निराधार बताया*
खबर छपने पर सीएमओ डॉक्टर देवाशीष भट्टाचार्य के द्वारा जेल भेजने की धमकी भी दी जाती है
वहीं डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने लगाए गए कमीशन अथवा निजी लाभ संबंधी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि सभी काम नियम अनुसार किये गए हैं। यूसीएल अस्पताल के सीएमओ डॉक्टर एसडीएन शर्मा के द्वारा यह भी कहा गया है कि डॉ देवाशीष भट्टाचार्य के रिटायर इसी माह सितंबर माह में है इसको देखते यूसिल प्रबंधन को दूसरे दंत चिकित्सक के बहाली को लेकर मांग किया गया है।

