शिव महापुराण कथा के द्वितीय दिन श्रद्धा और भक्ति का श्रीपुर में अद्भुत संगम
राष्ट्र संवाद सं
बिंदापाथर: श्रीपुर गांव में आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के द्वितीय दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती के पावन विवाह प्रसंग का भावपूर्ण एवं विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे वातावरण को हर-हर महादेव के जयघोष से गुंजायमान कर दिया।
वृंदावन से पधारे प्रसिद्ध कथा वाचक विष्णुकांत शास्त्री ने शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनाते हुए कहा कि यह प्रसंग त्याग, तपस्या, समर्पण और आदर्श दांपत्य जीवन का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया, जो यह संदेश देता है कि सच्ची श्रद्धा और धैर्य से जीवन के सभी लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं।
कथा के दौरान भगवान शिव की बारात, देवताओं की उपस्थिति, माता पार्वती के हर्ष और हिमालय परिवार के आनंदमय वातावरण का जीवंत चित्रण किया गया। जैसे ही विवाह प्रसंग का वर्णन हुआ, श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। भजनों और मंगल गीतों के माध्यम से विवाह उत्सव का दृश्य सजीव हो गया। कई श्रद्धालु भावुक होकर नृत्य करते भी नजर आए।
कथावाचक ने कहा कि शिव-पार्वती विवाह केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि समाज को यह शिक्षा देता है कि जीवन में आडंबर नहीं, बल्कि संस्कार, प्रेम और समझदारी ही सबसे बड़ा धन है। उन्होंने युवाओं से इस कथा से प्रेरणा लेने की अपील की।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में मंदिर कमेटी के सदस्यों की सराहनीय भूमिका रही। सुरक्षा, व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया। कथा के अंत में महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित कर भगवान शिव और माता पार्वती से सुख-समृद्धि की कामना की।

