एसबीआई कुंडहित शाखा में लोन प्रक्रिया पर उठे सवाल,शाखा प्रबंधक द्वारा बार-बार डॉक्यूमेंट गुम हो गया कहना कही जेब की भरपाई का खेल तो नही?
निजाम खान। राष्ट्र संवाद
जामताड़ा: कुंडहित प्रखंड क्षेत्र के दलाबाड़ गांव से एक व्यक्ति ने राष्ट्र संवाद को फोन के माध्यम से गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने लोन के लिए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) कुंडहित शाखा में आवेदन किया था, लेकिन आवेदन प्रक्रिया के दौरान बार-बार उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि उनके दस्तावेज (डॉक्यूमेंट) “खो गए” हैं।
उनके अनुसार, यह स्थिति एक-दो बार नहीं बल्कि लगभग पाँच बार हुई। हर बार शाखा प्रबंधक रबी गड़ी के द्वारा नए सिरे से दस्तावेज जमा करने को कहा गया, जिससे आवेदक परेशान हो चुका है। सवाल यह उठता है कि आखिर एक सरकारी बैंक में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो सकती है? क्या वाकई दस्तावेज खो रहे हैं, या फिर इसके पीछे कोई और खेल चल रहा है?
पीड़ित व्यक्ति, जिसने सुरक्षा कारणों से अपना नाम सार्वजनिक करने से इनकार किया है, ने बताया कि लोन प्रक्रिया के दौरान उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि बिना “बिचौलियों” के माध्यम से काम कराना कठिन है। लगता है कि “जो लोग बीच में किसी को पैसे देते हैं, उनका लोन जल्दी पास हो जाता है, लेकिन जो लोग ऐसा नहीं करते, उनके फाइल या तो अटक जाते हैं या डॉक्यूमेंट ‘गुम’ हो जाते हैं।”
स्थानीय लोगों के अनुसार, बैंक में ऐसे कई मामलों की चर्चा है जहाँ आवेदकों को बार-बार कागजात जमा कराने के बावजूद लोन स्वीकृत नहीं हुआ। इससे ग्रामीणों में नाराजगी व्याप्त है और बैंक की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
राष्ट्र संवाद के पत्रकार निज़ाम खान ने जब इस मामले में कुंडहित भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक रवि गड़ी से संपर्क करने की कोशिश की, तो उनसे संपर्क नहीं हो सका।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह “डॉक्यूमेंट खोने” की घटना बार-बार हो रही है, तो यह महज संयोग नहीं हो सकता। यह प्रणालीगत लापरवाही या भ्रष्टाचार का संकेत हो सकता है। बैंकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इससे सीधे जनता के आर्थिक अधिकार जुड़े हैं।
इस पूरे मामले में जिले के उपायुक्त रवि आनंद से हस्तक्षेप की अपेक्षा की जा रही है।स्थानीय का कहना है कि यदि इस तरह की घटनाओं की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आम जनता का सरकारी बैंकों पर से विश्वास उठ जाएगा।
विशेषज्ञों का मत है कि यदि किसी शाखा में दस्तावेज बार-बार गायब हो रहे हैं, तो इसकी तकनीकी और प्रशासनिक जांच अनिवार्य है। डिजिटल रिकॉर्डिंग, सीसीटीवी फुटेज, और दस्तावेज प्रबंधन प्रणाली की समीक्षा की जानी चाहिए।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं। फिलहाल स्थानीय के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर एक सरकारी बैंक में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो सकती है — और क्या यह “डॉक्यूमेंट गुम होना” भ्रष्टाचार की किसी बड़ी जड़ की ओर इशारा कर रहा है?

