जामताड़ा में हेलमेट क्रांति: एसपी राजकुमार मेहता की पहल से सड़क हादसे लगभग शून्य
निजाम खान। राष्ट्र संवाद
जामताड़ा: झारखंड का छोटा सा जिला जामताड़ा अब पूरे राज्य के लिए सड़क सुरक्षा का मॉडल बन गया है। यहाँ के पुलिस अधीक्षक राजकुमार मेहता की सराहनीय पहल से जिले में हेलमेट पहनने की संस्कृति इतनी गहराई से विकसित हो गई है कि अब लगभग सौ प्रतिशत दोपहिया वाहन चालक और सवार हेलमेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछेक प्रतिशत को छोड़ दें, तो पूरा जिला इस नियम का पालन कर रहा है। इसका सबसे बड़ा और ऐतिहासिक फायदा यह हुआ है कि जिले में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या लगभग शून्य पर पहुँच गई है।
पहल की शुरुआत
एसपी राजकुमार मेहता ने जामताड़ा की कमान संभालने के बाद देखा कि सड़क हादसों में अनगिनत लोग घायल हो रहे हैं और कई की जान जा रही है। इनमें से अधिकांश घटनाओं में पीड़ितों ने हेलमेट नहीं पहना था। उन्होंने ठाना कि जिले में इस स्थिति को बदलना है। इसके बाद जिले में सड़क सुरक्षा अभियान की शुरुआत की गई, जिसका केंद्रबिंदु था – “हर सवारी, हर सफर में हेलमेट जरूरी।”
जागरूकता और सख्ती का संतुलन
अभियान की सफलता का राज सिर्फ चालान काटना या दंड लगाना नहीं था। एसपी मेहता ने पहले जनता को जोड़ा। जगह-जगह जागरूकता शिविर लगाए गए, स्कूल-कॉलेज के छात्रों से संवाद हुआ और सोशल मीडिया पर भी लगातार संदेश दिया गया। पुलिसकर्मी स्वयं उदाहरण बने और हेलमेट पहनने की अपील की।
साथ ही, सख्ती भी दिखाई गई। बिना हेलमेट पकड़े जाने वालों को पहले चेतावनी दी गई, फिर चालान जैसी कार्रवाई भी हुई। इस दोहरी रणनीति ने लोगों की मानसिकता को बदल दिया।
जिले में दिखा बड़ा बदलाव
आज स्थिति यह है कि शहर हो या गाँव, बाज़ार हो या सड़क – दोपहिया वाहन पर हेलमेट के बिना किसी को देख पाना मुश्किल है। जो कभी असंभव लगता था, वह अब जामताड़ा की पहचान बन चुका है। दुकानदारों से लेकर किसानों और युवाओं तक, सभी ने इसे अपनी आदत बना लिया है।
दुर्घटनाओं में भारी कमी
इस अभियान का सबसे बड़ा और संतोषजनक परिणाम सामने आया है – सड़क हादसों की संख्या लगभग शून्य हो गई है। पहले जहाँ हर महीने कई लोग दुर्घटनाओं का शिकार होते थे, वहीं अब गंभीर घटनाएँ लगभग बंद हो चुकी हैं। अस्पतालों में सिर पर चोट से भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में भी भारी गिरावट आई है। इसका सीधा मतलब है कि हेलमेट अभियान ने न केवल कानून का पालन सुनिश्चित किया, बल्कि अनगिनत जिंदगियाँ भी बचा लीं।
लोगों की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि एसपी मेहता ने जिस जज्बे के साथ यह पहल की, वह काबिल-ए-तारीफ़ है। अब लोग मानते हैं कि हेलमेट पहनना पुलिस का डर नहीं बल्कि खुद की सुरक्षा का ज़रिया है। कई परिवारों का मानना है कि अगर यह नियम पहले लागू होता, तो शायद उनके अपने सड़क हादसों में न खोते।
जामताड़ा में एसपी राजकुमार मेहता की यह पहल साबित करती है कि सही दिशा और मजबूत इच्छाशक्ति से असंभव दिखने वाला बदलाव भी संभव है। आज जामताड़ा जिले ने यह दिखा दिया है कि सड़क सुरक्षा सिर्फ नियम नहीं बल्कि जीवन बचाने का आंदोलन है।

