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    Home » समेकित जनजातीय विकास अभिकरण, जामताड़ा के सौजन्य से आज एसजीएसवाई प्रशिक्षण भवन सभागार में वन अधिकार अधिनियम 2006, अबुआ बिर अबुआ दिशोम अभियान के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का हुआ आयोजन
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    समेकित जनजातीय विकास अभिकरण, जामताड़ा के सौजन्य से आज एसजीएसवाई प्रशिक्षण भवन सभागार में वन अधिकार अधिनियम 2006, अबुआ बिर अबुआ दिशोम अभियान के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का हुआ आयोजन

    Nizam KhanBy Nizam KhanJuly 3, 2024No Comments4 Mins Read
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    समेकित जनजातीय विकास अभिकरण, जामताड़ा के सौजन्य से आज एसजीएसवाई प्रशिक्षण भवन सभागार में वन अधिकार अधिनियम 2006, अबुआ बिर अबुआ दिशोम अभियान के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का हुआ आयोजन

    जामताड़ा जिला अंतर्गत योग्य व्यक्तिगत वनाधिकार दावों तथा सामुदायिक वनाधिकार दावों को चिन्हित कर आवेदन प्राप्त करने, दावों की जांच एवं वन पट्टा निर्गत करने के लिए की जा रही है कार्रवाई; योग्य लोगों को मिलेगा वनाधिकार पट्टा – उपायुक्त

    जामताड़ा: समाहरणालय जामताड़ा अवस्थित एसजीएसवाई प्रशिक्षण भवन सभागार में समेकित जनजाति विकास अभिकरण के सौजन्य से वन अधिकार अधिनियम 2006 एवं अबुआ बिर अबुआ दिशोम अभियान से संबंधित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

    आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी जामताड़ा श्रीमती कुमुद सहाय (भा०प्र०से०), वन प्रमंडल पदाधिकारी श्री बनकर अजिंक्य देवीदास (भा०व०से०), उप विकास आयुक्त श्री निरंजन कुमार, परियोजना निदेशक आईटीडीए श्री जुगनू मिंज, अपर समाहर्ता श्रीमती पूनम कच्छप, अनुमंडल पदाधिकारी श्री अनंत कुमार एवं अन्य के द्वारा किया गया।

    *कार्यशाला को संबोधित करते हुए उपायुक्त श्रीमती कुमुद सहाय (भा०प्र०से०) ने कहा कि* आप सभी अवगत हैं कि वन अधिकार अधिनियम 2006 एवं नियम 2008 के सफल क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकार द्वारा “अबुआ बिर अबुआ दिशोम अभियान” प्रारम्भ किया गया है।

    राज्यस्तर से प्राप्त निर्देश के अनुसार “अबुआ बिर अबुआ दिशोम अभियान” को आगे बढ़ाते हुए वनाधिकार अधिनियम 2006 एवं नियम 2008 के तहत अनुसूचित जनजातियों तथा अन्य परम्परागत वन्य निवासियों से व्यक्तिगत, सामुदायिक एवं सामुदायिक वन संसाधन अधिकार का दावा प्राप्त करने हेतु विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं एवं 09 अगस्त 2024 (विश्व आदिवासी दिवस) के दिन वैसे अनुसूचित जनजातियों/अन्य परम्परागत वन निवासियों को जिनका 13 दिसम्बर 2005 के पूर्व वन भूमि पर दखल है, उन्हें व्यक्तिगत वनाधिकार दावा/सामुदायिक वनाधिकार दावा को मान्यता देते हुए भूमि का पट्ट्टा दिया जाना है।

    इस हेतु जामताड़ा जिलान्तर्गत योग्य व्यक्तिगत वनाधिकार दावों तथा सामुदायिक वनाधिकार दावों को चिन्हित करते हुए आवेदन प्राप्त करने/प्राप्त दावों का जाँच करने तथा वन पट्ट्टा निर्गत करने के लिए निम्न प्रकार समय सारणी निर्धारित की गई है। आप सभी लोग इस कार्यशाला में आए हैं सभी अच्छे से वनाधिकार पट्टा एवं इस अभियान के बारे में अपेक्षित जानकारी प्राप्त कर लें। उन्होंने कहा कि इस हेतु प्रखंड स्तर पर कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। साथ ही वनाधिकार पट्टा दिलाने हेतु 5 जुलाई से 7 अगस्त के बीच विभिन्न स्तरों पर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी। इसके लिए उन्होंने सभी संबधित पदाधिकारियों को आवश्यक एवं उचित दिशा निर्देश दिया। कोई भी योग्य लाभुक इस अधिनियम के तहत वंचित नहीं हों, इसके लिए उपायुक्त ने अनुमंडल पदाधिकारी को पूरे विशेष अभियान के दौरान व्यक्तिगत ध्यान देकर उचित कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया।

    *वहीं वन प्रमंडल पदाधिकारी श्री बनकर अजिंक्य देवीदास ने कहा कि* वन अधिकार अधिनियम 2006 वैसे अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वननिवासी को वन अधिकारों की मान्यता देना है, जिसे इस अधिनियम में विस्तार से बताया गया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए कट ऑफ डेट 13.12.2005 रखा गया है अर्थात इस तिथि से पूर्व कम से कम 03 पीढ़ी जो पूरी तरह से वन एवं वनोपज पर निर्भर है, उन्हें चिन्हित कर कानूनी मान्यता/स्वीकृति देना है। उन्होंने कहा आप लोग बेहतर ढंग से प्रशिक्षण प्राप्त करें ताकि बिना किसी कठिनाई के अग्रतर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

    *वहीं इस दौरान परियोजना निदेशक आईटीडीए श्री जुगनू मिंज ने* कार्यशाला के उद्देश्य की चर्चा करते हुए कहा कि वन अधिकार अधिनियम 2006 का मुख्य उद्देश्य वन भूमि या वनोपज पर आश्रित योग्य जनजातीय लोगों को नियम के तहत वनाधिकार देना है। उन्होंने अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 की चर्चा करते हुए कहा कि यह कानून संपूर्ण देश में हर तरह की वन भूमि पर लागू होता है। उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत ग्राम सभा सबसे क्षमतापूर्ण है, जो वन अधिकार समिति का गठन कर वन अधिकार समिति द्वारा सत्यापित दावों का अनुमोदन करती है। उन्होंने कहा कि वन में निवास करनेवाली अनुसूचित जनजाति जो पहले से प्राथमिक रुप से वन भूमि पर निवास करती हों और अपनी आजीविका की वास्त्विक जरुरतों के लिए वन या वन भूमि पर निर्भर हों, उन्हें वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत दावा करने का अधिकार प्राप्त है।

    *पीपीटी के माध्यम से दी गई जानकारी*

    इस मौके पर पीपीटी प्रजेंटेंशन के जरिए वन अधिकार अधिनियम 2006 के विभिन्न अध्याय, धाराएं और नियमावली की विस्तार से जानकारी दी। वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत ग्राम सभा की भूमिका, वनाधिकार समिति की संरचना, दावों का भौतिक सत्यापन, व्यक्तिगत वन अधिकार एवं सामुदायिक अधिकार, ग्राम सभा की क्षमताएं, वन अधिकार समिति, उपखंड स्तरीय समिति, जिला स्तरीय समिति, राज्य स्तरीय निगरानी समिति एवं इनकी जिम्मेदारियां, वन अधिकार हेतु पात्रता सहित अन्य बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई।

    *इस अवसर पर* उपरोक्त के अलावा जिला पंचायती राज पदाधिकारी श्री पंकज कुमार रवि संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी, वन प्रमंडल के अन्य अधिकारी सहित कर्मी आदि उपस्थित रहे।

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